महाराष्ट्र सरकार के मंत्री कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति के आधार पर तैनात कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में भेजने का अभियान अभी पूरी तरह सफल नहीं हुआ है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मंत्री कार्यालयों में कुल 735 अधिकारीकर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर पहुंचे थे. इनमें से करीब 500 की वापसी हो चुकी है, जबकि लगभग 235 कर्मचारियों की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है.

प्रतिनियुक्ति खत्म करने के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले में जानकारी जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. विभाग की ओर से मंत्रियों के निजी सचिव और विशेष कार्य अधिकारियों से उनके कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों की डिटेल मांगी जा रही है.

आदेश के बावजूद कई कर्मचारी मंत्री कार्यालयों में

सरकार ने 25 अगस्त को प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने का निर्देश दिया था. इसके बाद 3 सितंबर को सभी मंत्री कार्यालयों से कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी मांगी गई. इसमें प्रतिनियुक्ति के साथसाथ मौखिक आदेश के आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों का विवरण भी शामिल था.

हालांकि, निर्धारित समय के बाद भी कई कार्यालयों से पूरी जानकारी नहीं मिलने के कारण सामान्य प्रशासन विभाग ने दोबारा जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है.

जवाबदेही पर PS और OSD ने उठाए सवाल

इस पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने के तरीके पर भी सवाल उठ रहे हैं. प्रशासन के कुछ अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों को मंत्री कार्यालय में तैनात करने का फैसला केवल PS या OSD के स्तर पर नहीं होता. ऐसे में नियुक्ति की अनुमति देने वाले स्तर की भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.

PS और OSD का कहना है कि कर्मचारियों की वापसी के मामले में उनसे जवाब मांगा जा रहा है, जबकि प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के मूल फैसले में उनकी भूमिका सीमित होती है. उनका तर्क है कि इस व्यवस्था के कारण कर्मचारी भी उनके प्रति नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.

अब सामान्य प्रशासन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंत्री कार्यालयों में बचे करीब 235 कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना और उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके मूल विभाग में वापस भेजना है.