मुंह की बदबू से लेकर मसूड़ों की सूजन और चेहरे की चमक तक, सबका राज छिपा है आयुर्वेदिक रिचुअल गंडूष में।

आयुर्वेद जीवन का विज्ञान है और इसी विज्ञान ने हमें रहनसहन और खानपान के तौर तरीकों के बारे में बताया है। एक तरफ आयुर्वेद तन की तंदुरुस्ती के लिए योग और मन की खुशी के लिए ध्यान करने को कहता है तो दूसरी यह साइंस डेंटल हाइजीन के बारे में भी बात करती है। आयुर्वेद में मुंह और दांतों की क्लीनिंग की इस प्रक्रिया को गंडूष कहा जाता है।
गंडूष: आयुर्वेद का डेंटल हाइजीन
गंडूष को आजकल लोग ऑयल पुलिंग के नाम से जानते हैं, यह तरीका मसूड़ों, दांतों और मुंह का स्वास्थ्य को ठीक बनाए रखने में मदद करता है। आयुर्वेद में ऑयल पुलिंग एक बहुत प्राचीन पद्धति है जिसमें कवलधारण और गंडूष यानी दो क्रियाएं शामिल हैं। वैसे तो ये दोनों ही क्रियाएं एक जैसी हैं बस दोनों में एक फर्क है। गंडूष में मुंह में तेल को भर कर कुछ मिनटों के लिए बिना हिलाएडुलाए छोड़ा जाता है और थोड़ी देर बाद बाहर निकाला जाता है। जबकि मुंह में तेल भरकर उससे कुल्ला करने की क्रिया कवलधारण कही जाती है।
गंडूष के 4 प्रकार
आयुर्वेद के अनुसार, गंडूष के 4 प्रकार हैं, जिनका जिक्र यहां किया जा रहा है:
स्निग्ध
इसे मधुर रस और अम्ल रस से तैयार किया जाता है, इनमें तेल, घी और वसा शामिल होते हैं। आयुर्वेद वात दोष से पीड़ित लोगों को गंडूष के स्निग्ध तरीके को फॉलो करने की सलाह देता है। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
शमन
पित्त दोष वाले लोगों को डेंटल हाइजीन के लिए शमन गंडूष अपनाना चाहिए। इसमें कड़वे, कसैले और मीठे पदार्थों को शामिल किया जाता है।
शोधन
शोधन गंडूष में तीखे, नमकीन और खट्टी स्वाद वाली जड़ी बूटियां शामिल होती हैं। कफ दोष के लिए इस तरीके को अपनाएं।
रोपण
अगर आप मुंह के छालों और अल्सर जैसी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं तो इसके लिए रोपण गंडूष को रूटीन में शामिल करें। कसैले और कड़वी जड़ी बूटियों से बना यह पदार्थ समस्या से राहत दिला सकता है।
गंडूष के फायदे
- जबड़े और दांतों को मजबूत दे
- आवाज में शक्ति दे
- चेहरे को सेहतमंद और आकर्षक दिखाए
- मुंह के बैक्टीरिया खत्म कर बदबू दूर करे
- मुंह और गले का सूखापन दूर करे
- होंठ फटने से बचाए
- स्वाद की क्षमता बढ़ाए
- मसूड़ों की सूजन कम करे
- दांतों की सेन्सिटिविटी कम करे



