हिमाचली खबर: लीची वो फल है जो सबसे ज्यादा एशियाई देशों में खाया जाता है और दुनियाभा के देशों में भी इसकी मांग. इसे उगाने में भी एशियाई देश सबसे आगे हैं. मीठी और रसीली लीची अपने खास तरह के स्वाद के लिए जानी जाती है. ज्यादातर भारतीयों को लगता है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में इसका उत्पादन अधिक होने के भारत इसे उगाने में सबसे आगे है, लेकिन ऐसा नहीं है. लीची उगाने में भारत नहीं, चीन का दबदबा है. जानिए, क्या है इसकी वजह.

चीन कितनी लीची उगाता है… आंकड़े बताते हैं कि चीन हर साल 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक लीची उगाता है. यही वजह है कि यह दुनियाभर में सबसे ज्यादा लीची उगाने वाला देश है. यहां के अलगअलग प्रांतों में बड़े स्तर पर इसकी खेती की जाती है. चीन के इस रिकॉर्ड के पीछे सालों की मेहनत और यहां की जलवायु है.
चीन कैसे आगे निकला… लीची उगाने में चीन की बादशाहत सालों से बरकरार है. दूसरे पायदान पर भारत है. इसके बाद वियतनाम, थाइलैंड और बांग्लादेश हैं. चीन की बादशाहत का श्रेय यहां की उपोष्णकटिबंधीय जलवायु, कृषि के लिए उपजाऊ भूमि और लीची की खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों को जाता है. यहां सरकार ने ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है जो घरेलू और विदेशी मांग को पूरा करने में समर्थ है.
भारत में लीची का गढ़… बिहार के मुजफ्फरपुर में सबसे जयादा लीची का प्रोडक्शन होता है. यहां की शाही लीची दुनियाभर में अपनी खास पहचान रखती है. मुजफ्फरपुर की लीची अपने पल्प, मीठापन, खुशबू और बड़े आकार के लिए जाती है. दुनिया के कई देश भारतीय लीची को बड़े पैमाने पर खरीदते हैं.
कितने देश भारत से खरीद रहे लीची… मिडिल ईस्ट से लेकर यूरोप के कई देशों तक भारतीय लीची की डिमांड है. अमेरिका, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात भारतीय भारतीय लीची के सबसे बड़े खरीदार है. इसके अलावा कनाडा, नीदरलैंड, जर्मनी, ब्रिटेन, सिंगापुर और मलेशिया भी भारत से लीची खरीदते हैं.




