हिमाचली खबर: Purushottam Maas katha In Hindi: सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास बेहद पावन महीना माना गया है। कहते हैं इस महीने में किए गए दानपुण्य के कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। ये महीना हर तीसरे साल में एक बार आता है। इस महीने में व्रत रखने, भगवान विष्णु और कृष्ण जी की पूजा करने और तुलसी उपासना करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके साथ ही इस महीने में एक खास कथा सुनना भी बेहद शुभ फलदायी माना गया है। चलिए आपको बताते हैं उस पावन कथा के बारे में विस्तार से यहां।

पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा
पुराणों में अधिकमास यानी मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ही रोचक कथा का वर्णन किया गया है। इस कथा के अनुसार सभी बारह महीनों के तो अलगअलग स्वामी थे पर मलमास का कोई स्वामी नहीं था जिस कारण इसकी काफी निंदा होने लगी। इस बात से दु:खी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास पहुंचा। इसके बाद श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुंचे, जहां पर श्रीकृष्ण विराजमान थे। भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की परेशानी जानकर उसे वरदान दिया कि अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूं। जिससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाहित हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से जाना जाता हूं और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूं। जिससे अब से तुम पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे।
शास्त्रों के अनुसार इसलिए इस मास में जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस मास में श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा इस दौरान तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं इस माह में किया गया दान सौ गुना अधिक फल देता है। इसलिए अधिक मास में दानपुण्य देने का बहुत महत्व होता है। इस माह में धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करना भी बेहद पुण्य का काम माना जाता है।



