हमीरपुर। भारतीय सेना के लिए कम लागत में हाईटेक ड्रोन विकसित करने और इसके लिए 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने के दावे से सुर्खियों में आए fgekpy izns’k ds हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा का मामला अब दो अलग-अलग वजहों से चर्चा में है। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान हमीरपुर, बड़ू में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र सर्वेश बुधवार दोपहर बाद हॉस्टल की तीसरी मंजिल से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां से हालत को देखते हुए चंडीगढ़ PGI रेफर किया गया। 

DIO ने ग्रांट मिलने के दावे को बताया फर्जी

वहीं, दूसरी ओर उनके ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए रक्षा क्षेत्र से जुड़ी संस्था की ओर से 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने के दावे पर भी सवाल उठने लगे हैं। डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) के आधिकारिक X अकाउंट पर किए गए पोस्ट में ग्रांट मिलने के दावे को फर्जी बताया हैं। जिसके बाद के बाद इस ग्रांट को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बढ़ गई है। 

हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरे सर्वेश

हमीरपुर स्थित राजकीय बहुतकनीकी संस्थान बड़ू के हॉस्टल में बुधवार दोपहर बाद यह घटना हुई। कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में पढ़ने वाले सर्वेश शर्मा तीसरी मंजिल से नीचे गिरकर घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर पहुंचाया गया। उनकी हालत को देखते हुए बाद में चंडीगढ़ PGI रेफर कर दिया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना के कारणों को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। छात्र के गिरने को लेकर अलग-अलग आशंकाएं सामने आ रही हैं, लेकिन किसी भी आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

 

 

 

ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए 3.50 करोड़ की ग्रांट पर सवाल

सर्वेश शर्मा उस समय चर्चा में आए थे, जब उनके भारतीय सेना के लिए कम लागत वाला ड्रोन विकसित करने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, उन्होंने करीब 87 हजार रुपये की लागत से ड्रोन तैयार किया था और इसके आधार पर एक बड़े रक्षा प्रोजेक्ट पर काम करने की बात कही गई थी। दावा किया गया था कि इस प्रोजेक्ट के लिए 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर हुई है। इसके बाद सर्वेश की तकनीकी प्रतिभा और उनके प्रोजेक्ट को लेकर प्रदेश में चर्चा शुरू हो गई थी।

 

 

हालांकि, अब रक्षा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन के आधिकारिक X अकाउंट पर किए गए पोस्ट के बाद ग्रांट संबंधी दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 3.50 करोड़ रुपये की राशि वास्तव में स्वीकृत हुई थी या नहीं, और यदि स्वीकृति मिली थी तो वह किस संस्था, योजना और शर्तों के तहत दी गई थी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर ग्रांट को फर्जी घोषित करना भी उचित नहीं होगा, जब तक संबंधित संस्था की ओर से आधिकारिक दस्तावेजों और दावे के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए।

क्या सेना के लिए ड्रोन विकसित करने का था प्रोजेक्ट?

पहले प्रकाशित खबरों में सर्वेश शर्मा के प्रोजेक्ट को ‘रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ नाम के ड्रोन से जोड़कर बताया गया था। दावा किया गया था कि यह ड्रोन सीमा पर निगरानी जैसे कार्यों में उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट को IIT रुड़की में विकसित किए जाने और इसे लगभग 20 महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित होने की जानकारी भी सामने आई थी।

इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। किसी रक्षा प्रोजेक्ट की घोषणा, तकनीकी प्रस्ताव, ग्रांट के लिए चयन, वित्तीय स्वीकृति और वास्तविक राशि जारी होना अलग-अलग चरण हैं। इसलिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सर्वेश के प्रोजेक्ट को किस स्तर पर मंजूरी मिली थी और 3.50 करोड़ रुपये की राशि से जुड़ी जानकारी किस आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित थी।

 

 

राज्यपाल और सांसद से सम्मान मिलने के बाद चर्चा में आए थे छात्र

ड्रोन विकसित करने और करोड़ों रुपये की ग्रांट मिलने की खबरों के बाद सर्वेश शर्मा की उपलब्धियों की चर्चा प्रदेशभर में हुई थी। उनकी तकनीकी प्रतिभा की सराहना की गई और पूर्व में प्रकाशित खबरों के अनुसार, राज्यपाल कविंद्र गुप्ता तथा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी उन्हें सम्मानित किया था। एक साधारण परिवार से आने वाले छात्र के कम लागत में ड्रोन विकसित करने के प्रयास को युवाओं के तकनीकी नवाचार से जोड़कर देखा गया था।

 

 

पुलिस जांच के दायरे में हॉस्टल से गिरने की घटना

सर्वेश शर्मा के घायल होने के मामले में हमीरपुर पुलिस जांच कर रही है। एसपी हमीरपुर बलबीर सिंह के अनुसार, पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। छात्र किन परिस्थितियों में तीसरी मंजिल से नीचे गिरे, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल यह पुष्टि नहीं हुई है कि घटना दुर्घटनावश हुई, उन्हें चक्कर आया या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति थी। छलांग लगाने की आशंका को लेकर भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

 

 

पुलिस जांच में घटनास्थल की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। छात्र के घायल होने की घटना को ग्रांट संबंधी विवाद से जोड़कर देखना भी अभी उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों के बीच किसी संबंध की पुष्टि सामने नहीं आई है।

मेडिकल कॉलेज में निशुल्क उपचार के निर्देश

मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. देशराज शर्मा ने बताया था कि घायल छात्र को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया और उसके इलाज की व्यवस्था की गई। उनके अनुसार, सरकार की ओर से सर्वेश का निशुल्क उपचार करने के निर्देश मिले थे और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही थीं। बाद में छात्र को चंडीगढ़ PGI रेफर किया गया। फिलहाल उनके स्वास्थ्य की ताजा स्थिति के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

 

 

अब दो अहम सवालों के जवाब तलाशने की जरूरत

सर्वेश शर्मा से जुड़ा मामला अब दो प्रमुख सवालों पर केंद्रित हो गया है। पहला, हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने की घटना किन परिस्थितियों में हुई और छात्र की चोटों की गंभीरता को देखते हुए आगे उपचार की स्थिति क्या है। दूसरा, सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के प्रोजेक्ट और 3.50 करोड़ रुपये की कथित ग्रांट के संबंध में आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहते हैं।

 

पुलिस छात्र के घायल होने की घटना की जांच कर रही है, जबकि ग्रांट संबंधी दावे पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित संस्था के आधिकारिक रिकॉर्ड और बयान महत्वपूर्ण होंगे। जब तक ये तथ्य सामने नहीं आते, तब तक न घटना के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा और न ही ग्रांट संबंधी दावे को अंतिम रूप से सही या गलत ठहराना। आने वाले समय में जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।