नाग पंचमी के करीब आते ही सोशल मीडिया पर सांपों से जुड़े भ्रमों की संख्या बढ़ने लगती है. लोग उस पर आसानी से विश्वास कर लेते हैं. ऐसे ही भ्रम हैं, जैसे सांप दूध पीते हैं. एक साथ ही मौत होने पर उसका दूसरा साथी बदला लेता है. सांप के सुनने की क्षमता बहुत तेजी होती है. विज्ञान कहता है, ज्यादातर बातें उलटी हैं. यानी उनमें सच्चाई नहीं है. लेकिन इनका पूरा सच क्या है अब यह भी समझ लेते हैं.

दुनिया के सबसे पुराने और सबसे प्रचलित मिथों में से एक है कि सांप दूध पीता है. विज्ञान कहता है कि रेंगने वाले जीव दूध समेत कई डेयरी उत्पाद पचा ही नहीं पाते हैं. सांप को दूध पीना पसंद ही नहीं है. ऐसा तब भी हो सकता है जब उसे प्यास लगी हो तो वो दूध ही नहीं दूसरे लिक्विड पी सकता है. लेकिन दूध पीना उसके सामान्य व्यवहार का हिस्सा नहीं है.

नाग पंचमी के मौके पर सांप को दूध पिलाने की परंपरा वास्तव में सांपों को नुकसान पहुंचाने का काम करती है. यह उनके पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है.

नागपंचमी को सांप को दूध पिलाने की परंपरा है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। फोटो: AI Generated

क्या सांप बदला लेने के लिए वापस आते हैं?

यह भ्रम भारतीय फिल्मों और टीवी सीरियल्स की कहानियाें ने गढ़े हैं. कहानियों में दिखाया गया कि नागिन अपने साथी की मौत का बदला लेती है. बहुत से लोग इसे सच मान बैठते हैं. विज्ञान कहता है कि सांपों में किसी तरह का सामाजिक बंधन नहीं होता, न ही इतनी बुद्धि या याददाश्त कि वे किसी हमलावर को पहचान सकें या याद रख सकें. दो सांप आमतौर पर सिर्फ प्रजनन के समय ही एक साथ दिखते हैं, बाकी समय बड़ा सांप छोटे सांप को खा भी सकता है.

सपेरे की बीन सुनकर सांप के नाचने की बात कितनी सच्ची?

यह मिथ बचपन से हर भारतीय के दिमाग में बसा है, लेकिन हकीकत कुछ और है. सांपों के कान में इंसानों की तरह पर्दा नहीं होता, इसलिए वे बीन की धुन नहीं सुन पाते, लेकिन उनके कान जमीन से आने वाले कंपन और कुछ हद तक कम फ्रीक्वेंसी वाली हवा में चलने वाली आवाज जरूर पकड़ लेते हैं. सपेरे की बीन के आगेपीछे हिलने की गति ही असल में सांप को हरकत में लाती है. आवाज नहीं, बल्कि मूवमेंट पर सांप की प्रतिक्रिया होती है.

सांप बीन की आवाज से नहीं, उसके मूवमेंट के हिसाब से हिलता है. फोटो: AI Generated

क्या सांप हमेशा जोड़े में रहते है?

विक्टोरिया म्यूजियम की रिपोर्ट के मुताबिक, आम लोगों के धारणा है कि सांप हमेशा जहां भी जाते हैं जोड़ों में जाते हैं, यह बात पूरी तरह से सच नहीं, है. ये न तो जोड़ों में रहते हैं और न ही ग्रुप में शिकार करते हैं. नर और मादा सिर्फ मेटिंग सीजन में मिलते हैं. कुछ समय के लिए साथ रहते हैं और फिर अपनेअपने रास्ते पर चले जाते हैं.

सिर कटने के बाद भी जिंदा रहता है?

अगर किसी सांप का सिर काट दिया जाए, तो वह सूरज डूबने तक ज़िंदा रहता है. यह बात खासकर ऑस्ट्रेलिया के ग्रामीण इलाकों में काफी प्रचलित है. हो सकता है कि यह बात इस आधार पर बनी हो कि सिर कटने के बाद भी सांप का शरीर कुछ देर तक तड़पता रहता है, लेकिन यह कहानी बिल्कुल भी सच नहीं है.