अगर आपकी सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम 2026 में मैच्योर होने वाली है, तो अब यह तय करने का समय है कि इस रकम का आगे क्या किया जाए. वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर रिटायर लोगों के लिए पूरी राशि एक ही योजना में लगाने के बजाय अलगअलग सुरक्षित विकल्पों में बांटना ज्यादा समझदारी हो सकती है.

SCSS में एक्सटेंशन भी है एक विकल्प

SCSS की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सरकार समर्थित योजना है और नियमित आय देती है. मैच्योरिटी के बाद खाते को मौजूदा नियमों के तहत आगे भी बढ़ाया जा सकता है. अगर आपको सुरक्षित और तय ब्याज वाली आय चाहिए, तो यह विकल्प आपके लिए उपयुक्त हो सकता है. हालांकि, फैसला लेने से पहले उस समय लागू ब्याज दर और अपनी जरूरतों का आकलन जरूर करें.

बैंक FD और पोस्ट ऑफिस MIS पर भी करें विचार

अगर आपको निवेश में कुछ लचीलापन चाहिए, तो बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं. बैंक FD में अलगअलग अवधि चुनने की सुविधा मिलती है, जबकि POMIS नियमित मासिक आय का विकल्प देती है. निवेश से पहले ब्याज दर, टैक्स और समयावधि की तुलना करना जरूरी है.

डेट फंड भी बन सकते हैं विकल्प

जो निवेशक थोड़ा जोखिम उठाकर बेहतर टैक्स दक्षता और अधिक लिक्विडिटी चाहते हैं, वे डेट म्यूचुअल फंड पर भी विचार कर सकते हैं. हालांकि, इनका रिटर्न बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है और यह SCSS या FD की तरह गारंटीड नहीं होता.

टैक्स और लिक्विडिटी का रखें ध्यान

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए. निवेश से पहले यह भी देखें कि ब्याज पर कितना टैक्स लगेगा, जरूरत पड़ने पर पैसा कितनी आसानी से निकाला जा सकेगा और महंगाई के बाद वास्तविक रिटर्न कितना बचेगा. कई मामलों में अलगअलग योजनाओं का संतुलित मिश्रण बेहतर रणनीति साबित हो सकता है.

हर निवेशक की जरूरत अलग होती है

रिटायरमेंट के बाद किसी के लिए नियमित मासिक आय सबसे महत्वपूर्ण होती है, तो किसी के लिए पूंजी की सुरक्षा या जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा निकालने की सुविधा. इसलिए SCSS मैच्योर होने पर दोबारा निवेश का फैसला अपनी आय, खर्च, टैक्स स्लैब और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही करें.