हिमाचली खबर: कहते हैं मां के कदमों में स्वर्ग होता है. एक मां अपने बच्चे को जन्म देने से लेकर उसकी परवरिश तक हर जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाती है, लेकिन जब यही मां नौकरीपेशा हो और उस पर वर्दी की जिम्मेदारी भी हो, तब उसका संघर्ष कई गुना बढ़ जाता है. मदर्ड डे पर आइए जानते हैं, ऐसी ही एक कहानी कानपुर के महिला थाने की, जहां महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी के साथसाथ अपने बच्चों की परवरिश भी बखूबी कर रही हैं.

Mother’s Day 2026: ममता का ये भी रूप! मां का प्यार और वर्दी का फर्ज… दोनों निभा रहीं; सलाम इन महिला सिपाहियों को​
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कानपुर महिला थाने में रोजाना एक ऐसा दृश्य देखने को मिलता है, जो मां की ममता और कर्तव्य की अनोखी मिशाल पेश करता है. यहां कई महिला पुलिसकर्मी ऐसी हैं, जिनके छोटेछोटे बच्चे हैं. घर पर बच्चों को संभालने वाला कोई नहीं होने के कारण वह अपने बच्चों को साथ लेकर थाने पहुंचती हैं. ड्यूटी के दौरान जब बच्चा रोता है तो मां उसे गोद में लेकर चुप कराती है और अगले ही पल अपनी जिम्मेदारी निभाने में जुट जाती है.

जुड़वा बच्चों के साथ ड्यूटी करती हैं नेहा

महिला पुलिसकर्मी नेहा के दो छोटे जुड़वा बच्चे हैं. वह बताती हैं कि घर पर बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है, इसलिए उन्हें अपने बच्चों को साथ लाना पड़ता है. उनका कहना है कि महिलाएं हर परिस्थिति में खुद को मजबूत बना लेती हैं और ड्यूटी के साथ बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाल लेती हैं.

ड्यूटी के साथ निभाती हैं मां का फर्ज

वहीं महिला पुलिसकर्मी दीक्षा का कहना है कि थाने के वरिष्ठ अधिकारी और साथी कर्मचारी काफी सहयोग करते हैं, जिससे काम और बच्चों की देखभाल दोनों आसान हो जाती है. थाने में कार्यरत आरती और आराधना भी अपने बच्चों को साथ लेकर ड्यूटी करती हैं और मां होने का फर्ज निभाते हुए पुलिस सेवा में पूरी निष्ठा से जुटी रहती हैं.

एडीसीपी शिवा सिंह ने बताया कि महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के साथ बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है. इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग उनकी छुट्टियों और ड्यूटी को लेकर विशेष सहयोग करता है. उन्होंने कहा कि मां ही वह शक्ति है जो परिवार और नौकरी दोनों जिम्मेदारियां एक साथ संभाल सकती है.