ShakthiSAT Mission Kandula Jessie Success Story: सफलता की कहानी कई संघर्ष या सालों की मेहनत से नहीं बल्कि समझदारी होने पर भी लिखी जा सकती है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक 10वीं क्लास की छात्रा ने कुछ ऐसा किया है जिसके कारण उनकी सफलता की कहानी कई लोगों के लिए मिसाल बन रही है. एक तरफ जहां कक्षा 10वीं के छात्र बोर्ड परीक्षा में अच्छे से अच्छे स्कोर के लिए दिनरात मेहनत करने में लगे हुए थे वहीं, दूसरी ओर कक्षा 10वीं की छात्रा दुनिया के पहले ऑलगर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन यानी ‘मिशन शक्तिसैट’ में शामिल होने की तैयारी कर रही थी. नतीजा ये रहा कि उसने लगभग 108 देशों की छात्राओं को पीछे छोड़ दिया और बड़ी कामयाबी हासिल की.

अंतरिक्ष जाएगी कारपेंटर की बेटी
एक बेहद साधारण परिवार से आने वाली 14 वर्षीय कंडुला जेसी के पिता एक कारपेंटर हैं और वो आंध्र प्रदेश के एक सरकारी स्कूल में 10वीं की छात्रा है. कंडुला जेसी को मिशन शक्तिसैट प्रोग्राम में हिस्सा बनने का मौका मिला है और उन्होंने चुने गए 20 भारतीय छात्रों में अपनी जगह बनाई है.
दुनियाभर के करीब 108 देशों की छात्राओं ने रजिस्ट्रेशन किया था. दुनिया के इस पहला इंटरनेशनल ऑलगर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन में 12000 लड़कियों ने रजिस्ट्रेशन किया जिनमें इस मिशन के लिए भारत से 20 छात्राओं का चयन किया गया और उन्हीं में से एक कंडुला जेसी भी शामिल हैं.
आर्थिक स्थिति ने पहुंचाया सरकारी स्कूल
आंध्र प्रदेश की रहने वाली कंडुला जेसी के परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है. घर की हालत ज्यादा खराब होने के कारण उनके पिता ने उन्हें प्राइवेट स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए एडमिशन करवाया. वर्तमान में कंडुला आंध्र प्रदेश के धवलेश्वरम में स्थित जिला परिषद गर्ल्स हाई सरकारी स्कूल की छात्रा हैं और इस स्कूल ने ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है.
टीचर ने करवाया मिशन के लिए रजिस्ट्रेशन
भले ही आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की वजह से उनका दाखिला सरकारी स्कूल में हुआ लेकिन उसी स्कूल के टीचर ने उन्हें होनहार छात्रों में से एक समझा. साइंस में उनकी रुचि को देखकर फिजिकल साइंस के टीचर और अटल टिंकरिंग लैब की प्रभारी मणिमाला ने मिशन शक्तिसैट के लिए कंडुला का रजिस्ट्रेशन करवाया. मगर बाद में जानकारी हुई ये कोर्स पहले ही शुरू हो चुका है और फिर शिक्षक की कोशिश के बाद फिर से जेसी को मौका मिला और उसने दिनरात मेहनत की जिसके बाद उसका सिलेक्शन हो सका.
10वीं बोर्ड परीक्षा के साथ कोर्स की तैयारी भी
मिशन शक्तिसैट में सिलेक्ट होने तक का सफर उतना आसान नहीं था. जेसी ने इसके लिए दिनरात मेहनत की, वो रोजाना 10वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ ऑनलाइन क्लास में भी हिस्सा लेती थी. मिशन शक्तिसैट प्रोग्राम में करीब 550 सेशन और 21 मॉड्यूल शामिल थे और सभी विषय के सिलेबस उनके लिए एडवांस लेवल के थे. हालांकि, फिर भी उन्होंने रोजाना ऑनलाइन क्लास में हिस्सा लिया. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। यहां तक कि इसमें शामिल होने के लिए कंडुला ने अंग्रेजी भाषा भी सीखी. जानकारी के लिए बता दें कि कंडुला जेसी का सपना है कि वो इसरो में साइंटिस्ट बनें और भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम में भाग भी ले.



