हर किसी की ख्वाहिश होती है कि उसका कमाया हुआ पैसा तेजी से बढ़े. बैंक की एफडी या सेविंग अकाउंट में पैसा सुरक्षित तो रहता है, लेकिन कई बार महंगाई को मात देने वाला रिटर्न नहीं मिल पाता. ऐसे में आम लोग अब शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की तरफ अपना रुख कर रहे हैं. बाजार में सही समय पर और सही जगह किया गया निवेश आपको सच में बहुत अच्छी वेल्थ बनाकर दे सकता है. ऐसी ही एक दमदार कहानी है एचडीएफसी मिडकैप फंड की. इस फंड ने लंबी अवधि में अपने निवेशकों को इतना शानदार रिटर्न दिया है कि जिसने भी इसमें पैसा लगाकर संयम रखा, वह आज करोड़पति बन चुका है.

13 साल में 10 लाख कैसे बन गए 1.25 करोड़

आंकड़ों की बात करें, तो इस फंड का प्रदर्शन हैरान करने वाला है. किसी व्यक्ति ने साल 2013 में एचडीएफसी मिडकैप फंड में 10 लाख रुपये एक साथ लगा दिए होते और उस निवेश को बनाए रखा होता, तो आज 13 साल बाद उस 10 लाख की वैल्यू बढ़कर करीब 1.25 करोड़ रुपये हो गई होती. यह पूरा हिसाब फंड की नेट एसेट वैल्यू में हुई लगातार बढ़ोतरी के आधार पर किया गया है.

इस फंड के डायरेक्ट प्लान की शुरुआत 1 जनवरी 2013 को हुई थी, जबकि इसकी मूल स्कीम बाजार में जून 2007 से ही मौजूद है. पिछले 13 सालों में इस फंड के डायरेक्ट प्लान ने सालाना 20 फीसदी से भी ज्यादा का जबरदस्त रिटर्न दिया है. इसे ही लॉन्ग टर्म कंपाउंडिंग का जादू कहते हैं, जहां समय के साथ आपके मुनाफे पर भी मुनाफा जुड़ता चला जाता है.

कहां निवेश करता है यह फंड

अब सवाल उठता है कि ये फंड इतना पैसा बनाता कैसे है? दरअसल, यह एक ओपनएंडेड स्कीम है. इसका सीधा सा मतलब है कि आप अपनी मर्जी और सुविधा के अनुसार इसमें कभी भी पैसा लगा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर निकाल भी सकते हैं. इसमें पैसा फंसने जैसी कोई बात नहीं होती.

यह फंड मुख्य रूप से बाजार की मिडकैप कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाता है. फंड हाउस की रणनीति के मुताबिक, इस स्कीम का कम से कम 65 फीसदी हिस्सा हर वक्त मिडकैप शेयरों में ही निवेशित रहता है. मिडकैप कंपनियां वो होती हैं जिनमें आगे चलकर बहुत बड़ी कंपनी बनने की भरपूर क्षमता होती है. जब देश की अर्थव्यवस्था अच्छी होती है और कॉरपोरेट कमाई बढ़ती है, तो यही कंपनियां सबसे तेज रफ्तार से भागती हैं. इसके अलावा, फंड मैनेजर अलगअलग सेक्टर्स की कंपनियों में पैसा बांटकर लगाते हैं, जिससे डाइवर्सिफिकेशन का फायदा मिलता है और जोखिम भी थोड़ा संतुलित हो जाता है.

भारी मुनाफा है तो रिस्क भी कम नहीं

शेयर बाजार का एक कड़वा सच यह भी है कि जहां रिटर्न ज्यादा होता है, वहां जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है. एचडीएफसी का यह फंड ‘वेरी हाई रिस्क’ वाली कैटेगरी में आता है. मिडकैप कंपनियों के शेयर बाजार की चाल के हिसाब से बहुत तेजी से ऊपरनीचे होते हैं.

अगर बाजार में गिरावट का दौर आता है, तो इन शेयरों के भाव बहुत जल्दी टूट भी जाते हैं. इसलिए, यह स्कीम उन निवेशकों के लिए बिल्कुल सही नहीं है जो बाजार थोड़ा सा गिरते ही घबराकर अपना पैसा निकाल लेते हैं. इस फंड में पैसा उसी को लगाना चाहिए जो बाजार के उतारचढ़ाव को झेलने की हिम्मत रखता हो और जो लंबे समय तक टिके रहने का धैर्य रखता हो.

निवेश करने से पहले क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

किसी भी म्यूचुअल फंड का पिछला शानदार रिकॉर्ड देखकर तुरंत अपनी सारी गाढ़ी कमाई उसमें डाल देना समझदारी नहीं है. बाजार के एक्सपर्ट्स हमेशा यही सलाह देते हैं कि सिर्फ पुराना प्रदर्शन देखकर निवेश का कोई भी फैसला मत लीजिए. भविष्य में भी यह फंड बिल्कुल ऐसा ही रिटर्न देगा, इसकी कोई पक्की गारंटी नहीं होती.

अगर आप इसमें निवेश करने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले अपना आर्थिक लक्ष्य तय करें. यह देखें कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और कितने सालों तक उस पैसे को बाजार में छोड़ सकते हैं. इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में असली पैसा तभी बनता है जब आप लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं. आप अपनी सहूलियत के हिसाब से इसमें एकमुश्त रकम डाल सकते हैं या फिर हर महीने एक तय रकम की सिप भी शुरू कर सकते हैं.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.