मेनोपॉज को लेकर भारत में आज भी कई गलतफहमियों पर आसानी से भरोसा कर लिया जाता है. इससे जुड़े मिथक में एक मिथ ये भी है कि अगर कम उम्र में मेनोपॉज हो जाए तो क्या इससे हाई बीपी की समस्या हो सकती है. मेनोपॉज को बीमारी नहीं है लेकिन अगर ये समय से पहले हो जाए तो हेल्थ का खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. 40 की उम्र से पहले की कंडीशन को प्रीमेच्योर मेनोपॉज कहा जाता है.

यहां हम प्रीमेच्योर मेनोपॉज और हाई बीपी के बीच क्या कनेक्शन है ये आपको बताने जा रहे हैं. अगर ऐसा है तो आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए, ये भी एक्सपर्ट से जानें…
क्या होता है मेनोपॉज । ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। What is Menopause
45 से 55 की उम्र के बीच महिलाओं को मेनोपॉज हो जाता है. ये एक प्राकृतिक जैविक चरण है जिसमें पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं. इसके अलावा प्रेगनेंसी कंसीव करने की पावर भी खत्म हो जाती है. अगर किसी महिला को 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आते और उसे इसके पीछे कोई हेल्थ प्रॉब्लम नहीं है तो ये मेनोपॉज कहलाता है. वैसे इसकी एवरेज एज 51 साल मानी जाती है.
अर्ली मेनोपॉज से हाई बीपी का होना
डॉ. मानिनि पटेल का कहना है कि अगर किसी महिला में सामान्य उम्र से पहले मेनोपॉज हो जाता है, तो आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होना है.
यह हार्मोन ब्लड वेसल्स को लचीला बनाए रखने और हार्ट को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है. जब इसका स्तर कम होने लगता है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है.
इसके अलावा मेनोपॉज के बाद वेट गेन, पेट के आसपास फैट बढ़ना, फिजिकल एक्टिविटी कम होना, स्ट्रेस, नींद की कमी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल जैसी आदतें भी इस जोखिम को और बढ़ा सकती हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला को हाई ब्लड प्रेशर होगा, लेकिन कम उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं को अपनी हार्ट हेल्थ पर विशेष ध्यान देना चाहिए. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
इन बातों का रखें ध्यान
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना, बैलेंस्ड डाइट लेना, रोज़ कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करना, स्मोकिंग और अल्कोहल से बचना तथा स्ट्रेस को नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है. सही समय पर जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.



