हिमाचल: युवक पर बंदरों के झुंड ने किया हम**ला, गिरने से सिर में गंभीर चोट; IGMC में भर्ती

2030 बंदरों ने युवक को घेरा बचने के चक्कर में गिरा युवक
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बंदरों और लावारिस कुत्तों का आतंक अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। शहर के रिहायशी इलाकों में बंदरों के झुंड लगातार सक्रिय हैं और सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। ताजा मामला अपर ढली वार्ड के इंद्रनगर से सामने आया है, जहां वीरवार शाम बंदरों के झुंड ने एक युवक पर हमला कर दिया। हमले से बचने की कोशिश में युवक सड़क किनारे बने डंगे से करीब 15 फीट नीचे जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया।
जानकारी के अनुसार करीब 20 वर्षीय अंशुल वीरवार शाम लगभग 5:15 बजे इंद्रनगर में पैदल जा रहा था। इसी दौरान बंदरों के एक बड़े झुंड ने उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि झुंड में करीब 20 से 30 बंदर थे।
यह भी पढ़ें :
अचानक हुए हमले से युवक को संभलने तक का मौका नहीं मिला। बंदरों से बचने की कोशिश में वह सड़क किनारे लगे डंगे से करीब 15 फीट नीचे पहाड़ी पर जा गिरा। गिरने से उसके सिर में गहरी चोट लगी। सिर और नाक से खून बहने लगा, जबकि टांग में भी चोट आई है।
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने घायल युवक को संभाला। लहूलुहान हालत में युवक को लोगों ने पीठ पर उठाकर पास के रास्ते तक पहुंचाया। इसके बाद घटना की सूचना स्थानीय पार्षद कमलेश मेहता को दी गई।
पार्षद मौके पर पहुंचीं और युवक के परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मजदूरों की मदद से घायल युवक को एनएच तक पहुंचाया गया, जहां से टैक्सी के जरिए उसे गंभीर हालत में IGMC अस्पताल ले जाया गया।
यह भी पढ़ें :
अंशुल इंद्रनगर में किराये के मकान में रहता है। वह ग्रेजुएशन के बाद इन दिनों आईटी का कोर्स कर रहा है और मूल रूप से गुम्मा क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। IGMC में उसका उपचार चल रहा है और उसके परिजन भी अस्पताल पहुंच चुके हैं।
शिमला में बंदरों के आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वीरवार को ही आईजीएमसी अस्पताल में बंदरों के काटने के 10 मामले पहुंचे। लक्कड़ बाजार, संजौली समेत शहर के अलगअलग उपनगरों से लोग बंदरों के हमले के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के मुताबिक बंदरों और कुत्तों के काटने के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। सभी घायलों को आवश्यक टीके लगाए गए हैं।
यह भी पढ़ें :
शिमला में बंदरों के हमले का मामला पहली बार इतना गंभीर नहीं है। पिछले महीने समिट्री में बंदरों के हमले से एक बुजुर्ग महिला तीन मंजिला मकान से नीचे गिर गई थीं। गंभीर रूप से घायल महिला का आईजीएमसी में कई दिनों तक उपचार चला, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई।
वहीं 20 सितंबर को शांकली में लावारिस कुत्तों ने दो साल की मासूम बच्ची पर हमला कर दिया था। कुत्ते बच्ची को घर के गेट से घसीटकर करीब 25 मीटर दूर तक ले गए थे। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह बच्ची को कुत्तों के चंगुल से बचाया।
यह भी पढ़ें :
आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। शहर में हर महीने बंदरों के काटने के करीब 50 से 70 मामले सामने आने की बात कही जा रही है, जबकि कुत्तों के काटने के मामलों की संख्या 100 से 150 के बीच बताई गई है।
बंदरों और लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर अब नगर निगम भी सक्रिय होने की बात कह रहा है। महापौर सुरेंद्र चौहान के अनुसार बंदरों से राहत दिलाने के लिए वन विभाग के साथ जल्द बैठक की जाएगी। स्थानीय पार्षद कमलेश मेहता ने भी लोगों से अपील की है कि सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों को खाने की चीजें न दें। क्योंकि लोगों द्वारा बंदरों को भोजन देने से वे रिहायशी इलाकों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं और कई बार आक्रामक भी हो जाते हैं।



