योगगुरु स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म, जाति व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव को लेकर बड़ा बयान दिया है. हरिद्वार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सनातन सबको समान मानता है, किसी के साथ भेदभाव नहीं करता. संस्कृत में जो कुछ भी लिखा गया, उसे धर्मग्रंथ मान लिया गया, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. सनातन के सिद्धांत यूनिवर्सल, साइंटिफिक, सभी के लिए फायदेमंद और हमेशा रहने वाले हैं.

बाबा रामदेव ने कहा, ‘वाल्मीकि रामायण में भी ऐसे श्लोक और किस्से डाले गए हैं, जिनमें भगवान राम को मांस खाने वाला और माता सीता को मांस और शराब पीने वाला दिखाया गया है. दूसरे श्लोक डाले गए हैं जिनमें भगवान राम को शूद्रों और महिलाओं का अपमान करने वाला दिखाया गया है. यह इस देश में किया गया एक बड़ा धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पाप था, राजनीतिक हस्तियों ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सुरक्षा दी.’
सनातन धर्म में सब बराबर, जहां भेद वहां वेद नहीं
स्वामी रामदेव ने हरिद्वार में कहा कि सनातन धर्म सभी को समान मानता है, वेदों में कोई भेदभाव नहीं है. जहां भेद वहां वेद नहीं है. उन्होंने जातिवाद को विदेशी साजिश बताया और सनातन को बदनाम करने के प्रयासों की निंदा की. रामदेव ने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र जैसे शब्द गुणवाचक हैं, जातिसूचक नहीं. उनका मत है कि असली सनातन पाखंड और ऊंचनीच के खिलाफ है.
उन्होंने मनुस्मृति पर कहा कि देश भारत के संविधान से चल रहा है और आगे भी इसी से चलेगा. लेकिन हमारा आंतरिक जीवन सांस्कृतिक वेद, उपनिषद, रामायण, पुराण और सनातन शास्त्रों पर आधारित है. इसमें स्पष्ट है जो अज्ञान को मिटाए, वो ब्राह्मण. जो अन्याय को मिटाए, वो क्षत्रिय. जो अभाव को मिटाए, वो वैश्य. जो अपवित्रता को मिटाए और समाज में शुचिता स्थापित करे, वो शूद्र.
विदेशियों ने जाति की दीवार खड़ी की रामदेव
जातिगत भेदभाव पर बोलते हुए रामदेव ने सनातन धर्म के शास्त्रों में कथित मिलावट और उसकी गलत व्याख्या किए जाने के आरोप भी लगाए. उनका कहना है कि विदेशियों ने जाति की दीवार खड़ी की. हमे आपस में भेदभाव करके फूट डाली गई. हम सब एक ही ब्रह्म कुल के हैं. सनातन के खिलाफ साजिश हो रही है, इसे बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए…
स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म के खिलाफ कथित साजिशों का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके शास्त्रों की गलत व्याख्या की गई और उनमें मिलावट की गई. उन्होंने दावा किया कि सत्ता, संपत्ति और दूसरे प्रभावों के जरिए धार्मिक ग्रंथों में बदलाव किए गए.
‘भारत के सभी मुसलमान सनातनी वंश के हैं’
स्वामी रामदेव ने दावा किया कि सनातन धर्म के मूल सिद्धांत समानता, सद्भाव और सबके कल्याण की बात करते हैं. सनातन धर्म सभी धर्मों और मजहबों का आदि पिता और माता है. भारत के सभी मुसलमान भी मूल रूप से सनातनी वंश के ही हैं. साथ ही उन्होंने लोगों से अपील का है कि अपने धर्म, अपनी संस्कृति और अपने पूर्वजों के महान चरित्र पर हम गौरव करना सीखें.
उन्होंने कहा कि हमने कभी भी देशों के आधार पर भेदभाव नहीं किया. देशों के बनने में भी पॉलिटिकल सीमाएं होती हैं, लेकिन हमने हमेशा वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत और इस विश्वास को बनाए रखा है कि धरती हमारी मां है.



