
कानपुर के अरौल के आचार्यनगर निवासी सराफ लालू उर्फ अजय कटियार ने वारदात को अंजाम देने से पहले अपने पिता के नाम एक सुसाइड नोट भी लिखा। उसमें लिखा कि पूज्य पिता जी उतने की बेटों को जन्म देना चाहिए जितने बेटों को संभाल सको…। तुमने तो हमें जन्म से ही भुला दिया और धीरे-धीरे बड़ा हुआ। बड़े होने तक हमें बहुत तकलीफ मिली फिर भी जीता रहा…।
शादी हुई, शादी के बाद आप सबने मेरी बीवी को परेशान करना शुरू किया। धीरे-धीरे 8-10 साल गुजरने के बाद समय ऐसा आया कि हमें अपने ही पुत्रों को साथ में लेकर जाना पड़ रहा है…।
मैं इतना खुदगर्ज नहीं हूं कि जो तकलीफ हमने सही वह अपने अपने बच्चों को भी सहन कराऊं, वह दोनों फूल हैं। उन्हें किसके सहारे छोड़कर जाऊं, उनके कपड़ों, खाने का नाश्ता, स्कूल की फीस, छोटी-छोटी परेशानियों को कौन देखेगा… इसलिए मैं अपने बच्चों को अकेला नहीं छोड़ सकता।
क्योंकि बाद में उन्हें कोई तकलीफ हो और वह कहें कि कैसे मेरे माता-पिता थे और हमें छोड़कर चले गए। सराफ के पास से मिले इस सुसाइड नोट से साफ है कि वह अपने पिता की परवरिश से नाखुश था।
पहले जहरीला पदार्थ खाया फिर लालू ने फंदा लगाने का किया प्रयास
अरोल थानाध्यक्ष जनार्दन यादव ने बताया कि जांच अधिकारियों की पड़ताल में सामने आया है कि लालू ने पहले ईंट से बच्चों पर कई वार किए, बच्चों के खून से लथपथ हो जाने के बाद लालू ने गिलास से जहर मिलाकर निगला। इसके बाद रस्सी और एक पुराने कपड़े से फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया, लेकिन जहर का असर होने के कारण फंदा लगने से पहले ही टूट गया। वह भी बेसुधहोकर गिर गया।
मृतक के पिता रामशंकर व भाई चंद्रकिशोर जब दरवाजा तोड़ अंदर घुसे तो लालू, रुद्र और शुभ बेसुध पड़े मिले जिन्हें सीएचसी ले जाने पर डॉक्टरों ने लालू व छोटे बेटे शुभ को मृत घोषित कर दिया।
बहनोई के हमले में गई थी बहन की जान, लोकलाज के चलते बचाया था
आचार्यनगर अरौल में लालू कटियार उर्फ अजय के साले आशुतोष उर्फ कल्लू ने बताया कि 19 दिसंबर 2022 को ही बहनोई ने उनकी बहन अलका पर भी हमला कर दिया था जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी, लेकिन लोकलाज के कारण और भांजे रुद्र और शुभ की परवरिश के चलते हमने और पिता जी सहित अन्य परिवार ने पुलिस में शिकायत नहीं की और बहन के छत से गिरकर मौत हो जाने की बात ही पुलिस को बताई। ऐसा क्या मालूम था कि लालू कटियार भांजों के साथ ऐसा करेगा। नहीं तो इसे तीन साल पहले ही जेल की सलाखों के पीछे भिजवा देते।
स्कूल खुला होता तो बच सकती थी बच्चों की जान, सुबह के बाद नहीं दिखा
रुद्र और शुभ अरौल के गायत्री स्कूल में पढ़ते थे। शुक्रवार को छुट्टी की वजह से दोनों घर पर ही थे। मोहल्ले की महिलाओं ने बताया कि सर्दी के कारण स्कूल की छुट्टी न हुई होती तो दोनों बच्चे स्कूल चले गए होते। अजय भी दुकान पर समय से चले जाते। अजय ने जिस ईंट से बेटों पर हमला किया, वह घटनास्थल से पुलिस ने बरामद की है। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। मौके से बालों में लगाई जाने वाली डाई के कुछ पैकेट भी मिले हैं। आसपास घरों में लगे सीसीटीवी कैमरे देखे तो सुबह 6:20 बजे अजय कटियार साफ-सफाई के लिए बाहर दिखा फिर अंदर चला गया। इसके बाद वह घर से बाहर नहीं निकला।
पिता खाना लेकर पहुंचे, तब हुई घटना की जानकारी
अरौल के आचार्यनगर से हाशिमपुर गांव करीब चार किमी दूर है। अजय के पिता रामशंकर रोजाना गांव से पौत्र और बेटे के लिए खाना लेकर अरौल दुकान या घर पर जाते थे। शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे तक दुकान न खुली देखकर रामशंकर उसके घर पहुंचे और दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब नहीं मिला।
झांक कर देखा तो अंदर का दृश्य देखकर वह चींख पड़े। शोर शराबा सुनकर आसपास के रहने वाले लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस के सामने लोगों ने किसी तरह दरवाजा खोला तब अंदर पहुंचे।