Tirthan River Pollution: हिमाचल प्रदेश में जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार में स्थित विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के तीर्थन क्षेत्र की पहचान यहां की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव-विविधता के साथ-साथ तीर्थन नदी में पाई जाने वाली विश्व प्रसिद्ध ब्राउन ट्राउट मछली से भी जुड़ी है। ठंडे, स्वच्छ और ऑक्सीजनयुक्त पानी में पाई जाने वाली यह मछली तीर्थन नदी के स्वस्थ जलीय पर्यावरण की महत्वपूर्ण पहचान मानी जाती है। ऐसे में इसके अस्तित्व को लेकर बढ़ती चिंताएं पर्यावरणप्रेमियों के लिए गंभीर विषय बनती जा रही हैं।

युवा क्रांति दल के संयोजक ठाकुर पवन सिंह ने कहा कि हिमाचल सरकार ने तीर्थन नदी को एंगलिंग रिजर्व घोषित किया है और इसकी जलीय जैव-विविधता के संरक्षण के लिए प्रावधान किए गए हैं। इसके बावजूद नदी के आसपास बढ़ता पर्यटन दबाव और विभिन्न प्रकार की मानवीय गतिविधियां नदी के प्राकृतिक पर्यावरण के लिए चुनौती बन सकती हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 की बाढ़ से तीर्थन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा है। इसके अतिरिक्त सड़कों का अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण, नदी किनारे तेजी से बढ़ते होटल, होमस्टे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाले सीवरेज, रसोई के गंदे पानी, प्लास्टिक और ठोस कचरे के उचित निस्तारण को लेकर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने नदी किनारे अनियंत्रित निर्माण, बाढ़ क्षेत्र में गतिविधियों, अपर्याप्त सीवेज एवं सेप्टिक व्यवस्था, सड़क निर्माण से नदी में पहुंचने वाली मिट्टी, मलबे और पत्थर, बाढ़ के बाद जमा सिल्ट तथा प्राकृतिक जलधाराओं में संभावित बदलाव जैसे विषयों पर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।

नदी की नियमित जांच जरूरी

ठाकुर पवन सिंह ने कहा कि ब्राउन ट्राउट केवल एक मछली नहीं, बल्कि तीर्थन नदी के स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण की महत्वपूर्ण पहचान है। नदी के पानी की गुणवत्ता और प्राकृतिक आवास में लगातार गिरावट का असर ब्राउन ट्राउट के साथ-साथ अन्य जलीय जीवों, स्थानीय आजीविका और एंगलिंग पर्यटन पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने मांग की कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्रशासन, मत्स्य विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से तीर्थन नदी का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि नदी में गिरने वाले सभी संभावित गंदे पानी के निकासी बिंदुओं की पहचान की जाए तथा होटल, होमस्टे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के एसटीपी एवं सेप्टिक सिस्टम की जांच की जाए। साथ ही नदी के पानी की गुणवत्ता की नियमित वैज्ञानिक जांच और निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी

उन्होंने कहा कि तीर्थन घाटी के लिए पर्यटन महत्वपूर्ण है और इससे स्थानीय लोगों को रोजगार एवं आजीविका मिलती है, लेकिन पर्यटन का विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। जिस स्वच्छ नदी, प्राकृतिक सुंदरता और जैव-विविधता को देखने के लिए पर्यटक तीर्थन घाटी आते हैं, उसी प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना स्थानीय समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने प्रशासन से समय रहते ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि यदि तीर्थन नदी और इसके जलीय पर्यावरण का संरक्षण अभी से प्राथमिकता के आधार पर किया गया, तो ब्राउन ट्राउट सहित क्षेत्र की समृद्ध जलीय जैव-विविधता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।