हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सामने आए एक मामले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। सेना के लिए ड्रोन बनाने का प्रोजेक्ट मिलने और 3.50 करोड़ रुपये की सहायता का दावा कर सुर्खियों में आए सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है। जिस पत्र के आधार पर छात्र को सेना के लिए ड्रोन तैयार करने का प्रोजेक्ट मिलने की बात कही जा रही थी, उसे डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) ने फर्जी बताया है। इससे इस पूरे प्रकरण में साइबर धोखाधड़ी की आशंका गहरा गई है।

देश भर में चर्चा का विषय बनी थी सर्वेश की उपलब्धि
सितंबर में सर्वेश शर्मा की उपलब्धि का दावा देशभर में चर्चा का विषय बना था। कथित तौर पर सेना के लोगो वाला पत्र मिलने के बाद दावा किया गया कि उसे ड्रोन निर्माण के लिए 3.50 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मिला है। छात्र की प्रतिभा और उसके प्रोजेक्ट को लेकर खूब चर्चाएं हुईं। यहां तक कि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भी उसे सम्मानित किया था। लेकिन अब डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस उपलब्धि को बड़ी कामयाबी बताया जा रहा था, उसके पीछे कथित फर्जीवाड़े की आशंका सामने आई है।
3.50 करोड़ के प्रोजेक्ट का दावा कैसे बना चर्चा का विषय?
सर्वेश शर्मा सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर का छात्र है। उसे ड्रोन तकनीक में रुचि रखने वाला प्रतिभाशाली विद्यार्थी बताया गया है। इसी बीच उसके पास सेना के लोगो वाला एक कथित पत्र पहुंचा, जिसमें सेना के लिए ड्रोन बनाने का प्रोजेक्ट मिलने और 3.50 करोड़ रुपये की राशि से जुड़ा दावा किया गया।
Public Clarification‼️ News claiming that a ₹3.5 crore #iDEX grant was sanctioned to Sarvesh Sharma for developing an Army drone has been circulating online for two months. DIO clarifies that the news is FAKE. Please verify information through official sources before sharing. https://t.co/65UUoZm45A
— iDEX DIO (@India_iDEX) October 28, 2026
इस पत्र को आधार बनाकर प्रोजेक्ट मिलने की खबरें सामने आईं। कॉलेज प्रबंधन भी इस जानकारी के आधार पर आगे बढ़ा और मामला मीडिया में प्रमुखता से छाया रहा। हालांकि, अब डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन की ओर से दावे को फर्जी बताए जाने के बाद पूरे मामले की सच्चाई की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि कथित पत्र किसने तैयार किया, छात्र तक कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।
डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन की पोस्ट से खुला मामला
इस प्रकरण में अहम मोड़ तब आया, जब डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर कथित प्रोजेक्ट के दावे को फर्जी बताया। इसके बाद सेना के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर जारी किए गए पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठने लगे। यदि किसी व्यक्ति ने रक्षा संस्थान या सेना के नाम का इस्तेमाल करके फर्जी दस्तावेज तैयार किया है, तो यह गंभीर मामला है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में किसने और किस उद्देश्य से कथित पत्र तैयार किया, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
कॉलेज प्रिंसिपल को आई थी सेना की कॉल
कॉलेज के प्रिंसिपल चंद्रशेखर के अनुसार, उन्हें 15 अक्टूबर को सेना की ओर से फोन आया था। इसके बाद मामले की जांच-पड़ताल शुरू की गई। 27 अक्टूबर को सेना के अधिकारियों ने छात्र का रिकॉर्ड मांगा और इसके बाद छात्र से भी बातचीत की गई। इन घटनाओं के क्रम ने कथित प्रोजेक्ट के दावे को लेकर संदेह बढ़ा दिया। हालांकि, सेना की ओर से संपर्क किए जाने और रिकॉर्ड मांगे जाने की परिस्थितियों के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित पत्र किस स्रोत से आया और इसे लेकर क्या-क्या दावे किए गए थे।
हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरा सर्वेश
इस पूरे प्रकरण के बीच 28 अक्टूबर को सर्वेश शर्मा हॉस्टल की तीसरी मंजिल से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती करवाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। कथित फर्जी प्रोजेक्ट का खुलासा और छात्र के साथ हुआ यह हादसा समय के लिहाज से एक-दूसरे के करीब होने के कारण कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है, या छात्र किसी अन्य कारण से नीचे गिरा—इस बारे में अभी कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। केवल घटनाओं के क्रम के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि साइबर फ्रॉड ही हादसे का कारण बना।
क्या प्रोजेक्ट के फर्जी होने का पता चलने से परेशान था छात्र?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सर्वेश के हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने की वजह क्या थी। क्या वह किसी मानसिक दबाव में था, क्या यह महज दुर्घटना थी या फिर घटना के पीछे कोई अन्य कारण था? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच पर निर्भर हैं। पुलिस मामले को विभिन्न पहलुओं से देख रही है। आत्महत्या की आशंका समेत अन्य संभावित कारणों की जांच किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन अभी तक किसी एक वजह की पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने से पहले साइबर फ्रॉड और छात्र के गिरने की घटना को सीधे जोड़ना अटकल ही होगा।
हॉस्टल के कमरे नंबर 302 में पहुंची पुलिस
घटना की जांच के लिए हमीरपुर पुलिस की टीम कॉलेज के हॉस्टल में स्थित कमरे नंबर 302 में पहुंची। जानकारी के अनुसार, कमरे की कुंडी लगी हुई थी और छात्र बालकनी की ओर पहुंचने के बाद नीचे गिरा था। पुलिस ने घटनास्थल की परिस्थितियों का जायजा लिया और यह पता लगाने का प्रयास किया कि आखिर वह नीचे कैसे गिरा। जांच में कमरे की स्थिति, बालकनी और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की अहम भूमिका हो सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के समय वहां क्या परिस्थितियां थीं। फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
मजदूर का बेटा, ड्रोन तकनीक में थी रुचि
सर्वेश शर्मा एक साधारण परिवार से संबंध रखता है। उसके पिता मजदूरी करते हैं और सर्वेश कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में पढ़ाई कर रहा है। उसे ड्रोन बनाने में रुचि रखने वाला प्रतिभाशाली छात्र बताया गया है। इसी वजह से सेना के लिए ड्रोन बनाने और करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट का दावा सामने आने पर उसकी कहानी ने व्यापक ध्यान खींचा था। अब कथित पत्र के फर्जी बताए जाने के बाद यह मामला साइबर सुरक्षा और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को भ्रमित करने के खतरे की ओर भी ध्यान दिलाता है।
प्रिंसिपल की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया मामला
कॉलेज प्रिंसिपल की शिकायत के आधार पर हमीरपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 319 और 336(3) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66C और 66D के तहत केस दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत कथित धोखाधड़ी, पहचान के दुरुपयोग और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए गए संभावित फर्जीवाड़े जैसे पहलुओं की जांच की जा सकती है। अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित पत्र कहां तैयार हुआ, किसने इसे भेजा और छात्र तथा कॉलेज तक यह जानकारी किस तरह पहुंची।
जांच के बाद ही सामने आएगी पूरे मामले की सच्चाई
सर्वेश शर्मा का मामला अब दो अहम पहलुओं पर केंद्रित है—पहला, सेना के लिए ड्रोन प्रोजेक्ट और 3.50 करोड़ रुपये से जुड़ा दावा फर्जी कैसे साबित हुआ; दूसरा, 28 अक्टूबर को छात्र हॉस्टल की तीसरी मंजिल से किन परिस्थितियों में गिरा। फिलहाल सर्वेश पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। कथित साइबर फ्रॉड के पीछे शामिल लोगों की पहचान और छात्र के गिरने की वास्तविक वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। इस मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक जांच के नतीजों का इंतजार करना जरूरी है।



