
ग्रेटर नोएडा के परी चौक से 4 अगस्त को एक 16 वर्षीय 11वीं कक्षा की छात्रा के एक स्लीपर बस में सवार होने के बाद उसके साथ कथित तौर पर गैंगरेप का मामला सामने आया है. आरोप है कि चलती बस के अंदर ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ वारदात को अंजाम दिया. इस घटना ने 2012 के निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी हैं. दिल्ली पुलिस ने मामले में बस के ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार कर लिया है और बस को भी जब्त कर लिया गया है.
पुलिस के मुताबिक, छात्रा अपने परिवार के साथ मैनपुरी जिले के एक गांव में रहती है. पढ़ाई नहीं करने को लेकर मां के डांटने के बाद वह घर से निकल गई थी. उसका इरादा नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने कजिन से मिलने का था. 4 अगस्त को भारी बारिश और अंधेरा होने के कारण वह गलती से परी चौक पर उतर गई. इसके बाद उसने वहां से गुजर रही दूसरी बस को रोककर उसके गंतव्य के बारे में पूछा. कंडक्टर ने उसे बताया कि बस नोएडा सेक्टर-63 जा रही है. बस में कोई यात्री नहीं था, फिर भी छात्रा उसमें सवार हो गई. इसके बाद कथित तौर पर उसके साथ जो हुआ, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
छात्रा ने क्या कहा?
छात्रा ने पुलिस को बताया कि उसने 4 अगस्त को किसी को बताए बिना घर छोड़ दिया था. इससे एक दिन पहले उसकी मां ने पढ़ाई नहीं करने को लेकर उसे डांटा था. वह नोएडा सेक्टर-63 में अपने कजिन से मिलने के लिए जा रही थी. सफर के दौरान तेज बारिश और अंधेरा होने के कारण वह रास्ते में गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर उतर गई.
परी चौक पर उतरने के बाद छात्रा ने एक दूसरी बस को रुकवाया और कंडक्टर से पूछा कि बस कहां जा रही है. कंडक्टर ने उसे बताया कि बस नोएडा सेक्टर-63 की ओर जा रही है. इसके बाद छात्रा बस में सवार हो गई. बताया गया है कि उस समय बस के अंदर कोई यात्री मौजूद नहीं था.
पुलिस को दिए बयान में छात्रा ने आरोप लगाया कि बस चलने के कुछ ही समय बाद कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकतें और आपत्तिजनक व्यवहार शुरू कर दिया. इसके बाद आरोप है कि कंडक्टर और ड्राइवर दोनों ने उसके साथ जबरन यौन हमला किया. छात्रा के मुताबिक, विरोध करने पर दोनों ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी.
परी चौक से कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर चली बस
रिपोर्ट के मुताबिक, परी चौक से कश्मीरी गेट तक बस करीब 47 किलोमीटर चली. इस दौरान बस की खिड़कियों पर मोटे और गहरे रंग के पर्दे लगे हुए थे. इन पर्दों के कारण बाहर से बस के अंदर देख पाना मुश्किल था. आरोप है कि इसी वजह से बाहर से किसी को बस के अंदर हो रही घटना का पता नहीं चल सका.
रास्ते में कई जगहों से गुजरी, फिर भी नहीं रोकी गई बस…
यह बस नोएडा-दिल्ली सीमा, कई बड़े चौराहों, एक एक्सप्रेसवे और रिंग रोड से होकर गुजरी. रिपोर्ट के मुताबिक, रास्ते में पुलिस की कई तरह की व्यवस्थाएं और चेकिंग पॉइंट भी होते हैं. इसके बावजूद बस को कहीं नहीं रोका गया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस रूट पर बैरिकेड्स की वजह से अक्सर ट्रैफिक जाम होता है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि रात में एक खाली बस के चलने पर किसी का ध्यान क्यों नहीं गया.
पुलिस की जांच में सामने आया कि बस में पहले तकनीकी खराबी आई थी. इसके बाद ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप बस को ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप ले गए थे. मरम्मत के बाद दोनों खाली बस को नॉर्थ दिल्ली के तिमारपुर स्थित पार्किंग में वापस ले जा रहे थे.
छात्रा ने दर्ज कराई शिकायत?
बस से उतारे जाने के बाद छात्रा कश्मीरी गेट पुलिस के पास पहुंची और घटना की जानकारी दी. पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण कराया और उसका बयान दर्ज किया. इसके बाद गैंगरेप, अपहरण और मारपीट से जुड़ी धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई.
कैसे आरोपियों तक पहुंची पुलिस?
पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए टीम बनाई. कोतवाली के एसीपी शंकर बनर्जी के नेतृत्व में टीम ने CCTV फुटेज की मदद से बस और आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया. जांच के बाद पुलिस ने कुलदीप और संदीप को तिमारपुर की पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने बस को भी जब्त कर लिया है.
घटना की जानकारी मिलने के बाद छात्रा के परिवार को देर रात दिल्ली बुलाया गया. महिला पुलिसकर्मियों ने छात्रा की काउंसलिंग की. जरूरी कानूनी और मेडिकल औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से उसके परिवार को सौंप दिया गया.
पुलिस ने दोनों आरोपियों के पोटेंसी टेस्ट भी कराए हैं. इसके अलावा फॉरेंसिक टीम ने बस से छात्रा के बाल और अन्य जैविक साक्ष्य एकत्र किए हैं. इन नमूनों का छात्रा के ब्लड सैंपल से मिलान किया जाएगा, ताकि मामले में फॉरेंसिक सबूत जुटाए जा सकें.
निर्भया कांड के बाद बने सुरक्षा नियमों पर क्यों उठे सवाल?
- इस घटना ने 2012 के निर्भया कांड के बाद सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. कमर्शियल बसों में ड्राइवर और कंडक्टर का सत्यापन, पुलिस वेरिफिकेशन और यूनिफॉर्म पर नाम की प्लेट जैसे सुरक्षा प्रावधान होने चाहिए. इसके बावजूद निजी बसें रात में बिना पर्याप्त आधिकारिक निगरानी और नियमित रूट लॉग के चल सकती हैं.
- बस की खिड़कियों पर लगे गहरे पर्दों ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और मोटर व्हीकल्स नियमों के अनुसार ऐसे पर्दे जो बस के अंदर का दृश्य बाहर से देखने में बाधा डालते हैं, अनुमति के दायरे में नहीं हैं. इसके बावजूद जिस बस में यह घटना हुई, उसमें ऐसे गहरे पर्दे लगे थे, जिससे बाहर से अंदर देखना मुश्किल था.
- कमर्शियल यात्री बसों में लाइव व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLT) और कंट्रोल रूम से जुड़े पैनिक बटन भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होने चाहिए. लेकिन इस मामले में बस के अंदर से किसी तरह की इमरजेंसी कॉल नहीं की गई. इससे यह सवाल भी उठा है कि बस में मौजूद सुरक्षा इंतजामों ने उस समय काम क्यों नहीं किया.
- कमर्शियल परिवहन वाहनों में सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए जाने का प्रावधान है. लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि इस बस के अंदर कोई काम करने वाला सर्विलांस सिस्टम मौजूद नहीं था. ऐसे में बस के अंदर हुई कथित वारदात की निगरानी या तत्काल जानकारी देने के लिए CCTV भी उपलब्ध नहीं था.



