चीन में 6 साल की एक बच्ची की मौत के बाद Gene Therapy को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। बच्ची को एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी थी. डॉक्टरों ने उसकी बीमारी का इलाज करने के लिए एक नई Gene Therapy का ट्रायल किया. लेकिन इलाज शुरू होने के सिर्फ 7 दिन बाद उसकी मौत हो गई. अब इस मामले में चीन की स्वास्थ्य व्यवस्था और ऐसे ट्रायल के नियमों पर सवाल उठ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची को Snijders BlokCampeau Syndrome नाम की एक दुर्लभ बीमारी थी. इस बीमारी में बच्चों के बोलने, सीखने और दिमाग के विकास पर असर पड़ता है. हालांकि यह बीमारी आमतौर पर जानलेवा नहीं मानी जाती और सही देखभाल व थेरेपी से मरीज लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकते हैं.

क्या है Gene Therapy?
Gene Therapy एक ऐसी आधुनिक इलाज की तकनीक है, जिसमें शरीर के खराब या बदले हुए जीन को ठीक करने की कोशिश की जाती है. आसान भाषा में समझें तो अगर किसी बीमारी की वजह जीन में खराबी है, तो वैज्ञानिक उसी जीन को सुधारकर बीमारी का इलाज करने की कोशिश करते हैं. इसके लिए खास तरह के बदले हुए वायरस का इस्तेमाल किया जाता है, जो दवा को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाते हैं. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इस मामले में डॉक्टरों ने CRISPR आधारित बेस एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें डीएनए के एक छोटे हिस्से को बदलने की कोशिश की जाती है, ताकि खराब जीन ठीक हो सके.

इलाज के बाद बिगड़ गई बच्ची की तबीयत
बताया गया कि इलाज के बाद बच्ची की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. उसे तेज बुखार आया, पेशाब आना बंद हो गया और खून में प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम हो गई. डॉक्टरों ने उसे ICU में भर्ती किया, लेकिन इलाज के सातवें दिन उसकी मौत हो गई. अस्पताल की जांच में सामने आया कि बच्ची की मौत Thrombotic Microangiopathy नाम की गंभीर समस्या से हुई. यह ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में छोटेछोटे खून के थक्के बनने लगते हैं और कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ मामलों में वायरस के जरिए दी जाने वाली जीन थेरेपी के बाद ऐसी प्रतिक्रिया हो सकती है.

मातापिता ने इलाज के लिए खर्च किए 8.6 लाख डॉलर
रिपोर्ट के अनुसार बच्ची के मातापिता ने इस इलाज के लिए करीब 8.6 लाख डॉलर खर्च किए थे. उनका आरोप है कि उन्हें इलाज के संभावित जानलेवा खतरे के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी. इस घटना के बाद चीन में Gene Therapy के ट्रायल, मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल रिसर्च की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी नई तकनीक का इंसानों पर इस्तेमाल करने से पहले उसकी सुरक्षा की पूरी जांच और सख्त निगरानी जरूरी है, खासकर तब जब बीमारी जानलेवा न हो.