हिमाचली खबर: दिनभर की भागदौड़ और काम के दबाव के बाद, रात का खाना यानी डिनर, सुकून से खाने का वक्त होता है। लेकिन क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि डिनर करने के ठीक बाद पेट में भारीपन, गैस या अपच की समस्या शुरू हो जाती है? अक्सर लोग इस रोजरोज की असहजता से राहत पाने के लिए तुरंत दवाओं का सहारा लेते हैं, जो लंबे समय के लिए ठीक नहीं है। कुछ लोग पाचन से जुड़ी परेशानियों से राहत पाने के लिए कोल्ड ड्रिंक और कई तरह के पानी का सेवन करते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि खाने के बाद पेट का भारीपन,अपच और गैस को कंट्रोल करने में किचन में मौजूद कुछ मसाले बेहद असरदार साबित होते हैं।

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर सुभाष गोयल के अनुसार सौंफ, जीरा और अजवाइन तीन ऐसे मसाले हैं जिन्हें पेट का सबसे अच्छा दोस्त माना जाता है। ये मसाले गट हेल्थ को बेहतर बनाने, भूख बढ़ाने और पाचन को दुरुस्त रखने में मददगार माने जाते हैं। खासतौर पर अजवाइन को आयुर्वेद में नेचुरल पेन किलर वाला मसाला भी बताया गया है। एक्सपर्ट ने बताया अगर सौंफ, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में लेकर उनका पाउडर बना लिया जाए, तो यह पेट की कई परेशानियों में राहत पहुंचा सकता है। खाने के बाद एक चम्मच इस मिश्रण का सेवन करने से पेट की जलन, गैस, ब्लोटिंग और अपचन जैसी समस्याओं में आराम मिल सकता है। यह मिश्रण पेट की गर्मी को शांत करने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी सहायक माना जाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ये आयुर्वेदिक चूर्ण डिनर के बाद कैसे पेट के लिए अमृत साबित होता है और इसका सेवन कैसे करें।
सौंफ के फायदे
सौंफ को प्राकृतिक कूलिंग एजेंट माना जाता है। इसका सेवन पेट को ठंडक पहुंचाने और एसिडिटी कम करने में मदद कर सकता है। सौंफ पेट में बनने वाली गैस और भारीपन को कम करने के साथ पाचन तंत्र को शांत रखने में सहायक मानी जाती है। इसके अलावा यह ब्लोटिंग कम करने, शरीर को डिटॉक्स करने और वजन कंट्रोल रखने में भी उपयोगी हो सकती है। BioMed Research International और Journal of Food Science में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक सौंफ के बीजों में एनेथोल नाम का एक मुख्य वोलेटाइल ऑयल पाया जाता है। यह तत्व गैस्ट्रिक एंजाइमों को उत्तेजित करता है और आंतों की चिकनी मांसपेशियों को आराम देता है। रिसर्च बताती है कि यह ‘एंटीस्पास्मोडिक की तरह काम करता है, जिससे पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग तुरंत शांत होती है। इसका कूलिंग इफेक्ट एसिडिटी को न्यूट्रलाइज करने में मदद करता है।
जीरा क्यों है फायदेमंद
जीरा पाचन क्रिया को तेज करने वाला मसाला माना जाता है। यह भोजन को बेहतर तरीके से पचाने में मदद करता है और पेट दर्द, ऐंठन व अपच जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है। जीरा शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में भी सहायक माना जाता है। नियमित सेवन से कब्ज की समस्या कम हो सकती है और सुबह पेट साफ होने में मदद मिलती है। Middle East Journal of Digestive Diseases में छपे एक क्लिनिकल ट्रायल और Nutritional Neuroscience की रिसर्च के अनुसार, जीरा सीधे तौर पर लीवर और पैंक्रियाज को एक्टिव करता है। यह शरीर में पित्त और पाचक एंजाइमों जैसे एमाइलेज और लाइपेज के स्राव को तेज करता है, जिससे भोजन खासतौर पर फैट और प्रोटीन तेजी से पचता है। इसके अलावा, जीरे में मौजूद आयरन कंटेंट हीमोग्लोबिन सुधारने और कब्ज को कम करने में वैज्ञानिक रूप से असरदार पाया गया है।
अजवाइन के गुण
अजवाइन को पेट की समस्याओं के लिए सबसे असरदार घरेलू मसालों में गिना जाता है। यह गैस, एसिडिटी और सीने में जलन जैसी परेशानियों में जल्दी राहत देने में मदद कर सकता है। अजवाइन पेट दर्द और ऐंठन को कम करने के साथ पाचन को मजबूत बनाने में भी उपयोगी मानी जाती है। आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक पेन रिलीवर और फैट बर्निंग मसाला भी कहा जाता है। Journal of Ethnopharmacology और Phytotherapy Research के अनुसार, अजवाइन में ‘थाइमोल नाम का एक बेहद शक्तिशाली सक्रिय यौगिक होता है जो पेट के एसिड लेवल को संतुलित करता है और हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है। रिसर्च में इसे ‘नेचुरल कैल्शियम चैनल ब्लॉकर की तरह काम करते देखा गया है, जो पेट और आंतों की ऐंठन व दर्द में पेनकिलर की तरह तुरंत राहत देता है। यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर फैट बर्निंग में भी मदद करता है।
रात में कैसे करें सेवन
अगर सौंफ, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में मिलाकर उसका पाउडर बना लें और उसे किसी कांच के जार में स्टोर कर लें। रात में खाने के बाद एक चम्मच इस पाउडर को गुनगुने पानी के साथ लें तो आपके पेट में गैस नहीं बनेगी। कब्ज, एसिडिटी और अपच से राहत मिलेगी। यह मिश्रण भोजन को जल्दी पचाने और सुबह पेट साफ करने में भी मददगार माना जाता है।
डिस्क्लेमर: किसी भी घरेलू उपाय का असर व्यक्ति की सेहत और शरीर की प्रकृति पर निर्भर करता है। अगर पेट की समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।



