भारतीय रेडबॉल क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजी को लेकर हाल के दिनों में बनी अनिश्चितता के बीच, 24 वर्षीय युवा स्पिनर मानव सुथार ने गाले टेस्ट में अपनी फिरकी का ऐसा जादू चलाया जिसने भारतीय फैंस को पुराने जमाने की क्लासिकल बाएं हाथ की स्पिन की याद दिला दी। श्रीलंका के खिलाफ भारत की 165 रन की शानदार जीत में सुथार ने मैच में कुल 10/131 का बेहतरीन आंकड़ा दर्ज किया। इसके साथ ही वे विदेशी सरजमीं पर खेले गए टेस्ट मैच में 10 विकेट लेने वाले भारत के सातवें स्पिनर बन गए हैं।

सिर्फ स्पिन नहीं, ड्रिफ्ट, बाउंस और गति का अद्भुत तालमेल
सुथार का स्पेल केवल पिच से मिलने वाली टर्न पर निर्भर नहीं था, बल्कि उन्होंने हवा के बहाव का इस्तेमाल कर ड्रिफ्ट पैदा की और बिना एक्शन बदले गेंद की रफ्तार में छोटेछोटे बदलाव किए।
उनकी इस गेंदबाजी विविधता की झलक दूसरी पारी में साफ देखने को मिली, जब उन्होंने 5 अलगअलग तरीकों से 5 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा:
पथुम सूरियाबंदारा LBW आउट
सोनल दिनुशा लेग स्लिप पर कैच आउट
प्रभात जयसूर्या विकेट के पीछे कैच
लाहिरू कुमारा ऋषभ पंत द्वारा कैच आउट
केशरा नुवान्था क्लीन बोल्ड
आंकड़े कहानी का एक हिस्सा बताते हैं, जबकि सुथार का तरीका दूसरा हिस्सा। उन्होंने कंट्रोल के साथ गेंदबाजी की, हवा का इस्तेमाल करके ड्रिफ्ट पैदा किया, अपने एक्शन में बदलाव किए बिना गति बदली और लगातार एक ही जगह पर गेंद डालते रहे। खेल को जबरदस्ती आगे बढ़ाने की कोई जल्दबाजी नहीं थी। सुथार ने दबाव बनाए रखा, बल्लेबाजों के गलती करने का इंतजार किया और विकेट लेने के अलगअलग तरीके अपनाए। गाले में, पुराने जमाने का यह तरीका बहुत कारगर साबित हुआ।
एक क्लासिकल स्पिनर
भारत ने अक्षर पटेल के जरिए बाएं हाथ की स्पिन को आजमाया है, लेकिन वे टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए हैं। सुथार एक अलग तरह की संभावना पेश करते हैं। उनका राउंडआर्म एक्शन और ओवरस्पिन पर जोर उन्हें गेंद को टर्न कराने की क्षमता के साथसाथ डिप और बाउंस हासिल करने में मदद करता है। आर्म बॉल पर निर्भर रहने के बजाय, सुथार की मुख्य गेंद ही अनिश्चितता पैदा करती है। यह पारंपरिक आधार पर बनी स्पिन है, जहां शॉर्टकट के बजाय बुनियादी बातों को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाता है।
यह बात गाले में पहली ही गेंद से साफ हो गई थी। सुथार की गेंद ड्रिफ्ट हुई, टर्न हुई और तेजी से उछली, जिस पर दिनेश चांदीमल ने बल्ला लगाया और गेंद विकेटकीपर के पास चली गई।
दूसरी पारी में उनके स्पेल ने उनकी गेंदबाजी की पूरी रेंज दिखा दी। पथुम सूरियाबंदारा LBW आउट हुए। सोनल दिनुशा लेग स्लिप पर कैच आउट हुए। प्रभात जयसूर्या विकेट के पीछे कैच आउट हुए। लाहिरू कुमारा का कैच ऋषभ पंत ने पकड़ा। केशरा नुवान्था बोल्ड हो गए।
पांच विकेट, पांच अलगअलग तरह से आउट हुए बल्लेबाज
यह विविधता कोई इत्तेफाक नहीं है। यह सोचसमझकर दिखाई गई स्किल और कलाकारी है।
KL राहुल की सुथार पर राय
KL राहुल का मानना है कि मानव सुथार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे अपने बॉलिंग एक्शन को बदले बिना अपनी गति में बदलाव कर सकते हैं, जिससे बल्लेबाजों के लिए उन्हें समझना मुश्किल हो जाता है। राहुल ने कहा, “यह एक ही एक्शन और एक ही एंगल से किए जाने वाले छोटेछोटे बदलाव हैं। वे अपने हाथ की गति बदले बिना ही गेंद को धीमा या तेज़ फेंक सकते हैं।”
सुथार ने गाले की परिस्थितियों का भी समझदारी से इस्तेमाल किया। राहुल ने बताया कि वे हवा का फायदा उठाकर गेंद को ड्रिफ्ट कराते थे और फिर उसे सीधा या अंदर की ओर लाते थे। राहुल ने कहा, “जब एक तरफ से हवा चल रही थी, तो उन्होंने उस ड्रिफ्ट का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया और वहां से गेंद सीधी हो जाती थी या अंदर आती थी। ऐसा वे भारत में भी हमेशा करते रहे हैं।”
उनकी निरंतरता ही उन्हें खास बनाती है। सुथार गति में छोटेछोटे बदलाव करते हुए भी एक ही जगह पर गेंद डालते रहते हैं, जिससे बल्लेबाजों को यह अंदाजा नहीं लग पाता कि अगली गेंद कैसी होगी।
राहुल ने कहा, “वे एक ही जगह से लगातार गेंदबाजी करते हैं और बस छोटेछोटे बदलावों का इस्तेमाल करके पूरे दिन ऐसा कर पाते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उनकी सबसे बड़ी खूबी उनकी गति और निरंतरता है, जिससे वे हमेशा बल्लेबाज को आउट करने के अलगअलग तरीके आजमाते रहते हैं।”
सुथार का दूसरी पारी का स्पेल उनके स्वभाव और काबिलियत का सबसे बड़ा सबूत था। श्रीलंका का स्कोर 175/6 से 199/6 हो गया था और वे भारत के लिए परेशानी खड़ी कर रहे थे। सुथार की वापसी ने खेल बदल दिया। उन्होंने छह गेंदों के भीतर दिनुशा, जयसूर्या और कुमारा को आउट किया, और फिर नुवान्था को आउट करके अपने 10 विकेट पूरे किए।
यह सिर्फ अचानक मिली टर्न नहीं थी। यह कंट्रोल, गति, उछाल और ड्रिफ्ट पर आधारित स्पेल था। उन्हें इस बात की समझ थी कि बल्लेबाज क्या करने की कोशिश करेंगे और उसे कैसे रोका जाए।
खोज पूरी हो गई है, यह कहने के लिए दो टेस्ट मैच काफी नहीं हैं। लेकिन सैंपल साइज़ से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है बुनियादी हुनर। सुथार ने दिखाया है कि वे लंबे स्पेल तक गेंदबाजी कर सकते हैं, दबाव बनाए रख सकते हैं और विकेट लेने के अलगअलग तरीके ढूंढ सकते हैं।
खूबियों को बनाए रखें
चेतेश्वर पुजारा ने सुथार से उन खूबियों को बनाए रखने का आग्रह किया है जो उन्हें टेस्ट क्रिकेट में असरदार बनाती हैं, खासकर इसलिए क्योंकि IPL की मांगें बहुत अलग होती हैं। गाले में सुथार की ओवरस्पिन, पेस, ड्रिफ्ट और बाउंस सभी देखने को मिलीं, साथ ही बल्लेबाजों को बिना कोई साफ संकेत दिए छोटेछोटे बदलाव करने की उनकी काबिलियत भी दिखी। ये वे हुनर हैं जिन्हें उनके खेल का मुख्य हिस्सा बने रहना चाहिए।
सिर्फ़ एक प्रदर्शन से भारत की लंबे समय की स्पिन योजनाओं के बारे में कोई पक्का फ़ैसला नहीं किया जा सकता। लेकिन सुथार के 10 विकेट लेने के कारनामे ने यह दिखा दिया कि एक युवा स्पिनर मौजूद है जो लंबे स्पेल तक गेंदबाजी कर सकता है, अपनी लाइन बनाए रख सकता है और हालात का अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल कर सकता है। फ़िलहाल, सुथार ने भारत को क्लासिकल स्पिन की अहमियत की याद दिलाई है।
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