कार का माइलेज सिर्फ पेट्रोल या डीजल की क्वालिटी पर निर्भर नहीं करता. ट्रैफिक, गाड़ी चलाने का तरीका, AC का इस्तेमाल और सड़क की हालत भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. लेकिन अगर आपकी कार अचानक पहले के मुकाबले ज्यादा पेट्रोल या डीजल खर्च करने लगे, तो जरूरी नहीं कि कोई बड़ी खराबी हो. कई बार छोटीछोटी दिक्कतों की वजह से भी माइलेज गिर जाता है.

ऐसी स्थिति में तुरंत मैकेनिक के पास जाने से पहले कुछ चीजों पर ध्यान देना चाहिए. टायर में हवा कम होना, एयर फिल्टर का गंदा होना या स्पार्क प्लग खराब होना इसके पीछे की वजह हो सकती है. आइए जानते हैं ऐसी बातें, जिन्हें नजरअंदाज करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.
टायर में हवा कम तो नहीं?
कार के में हवा कम होने पर इंजन को गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. इसका सीधा असर माइलेज पर पड़ सकता है. कई बार स्टीयरिंग भारी लगने लगता है या एक्सीलरेटर से पैर हटाने पर भी कार आसानी से आगे नहीं बढ़ती.
इसलिए सबसे पहले चारों टायरों में हवा चेक करें. ध्यान रखें कि टायर ठंडे हों और उनमें कंपनी के बताए गए दबाव के हिसाब से हवा भरी जाए. टायर की साइड पर लिखा अधिकतम प्रेशर सही प्रेशर का पैमाना नहीं है.
गंदा एयर फिल्टर भी हो सकता है वजह
इंजन को ठीक से चलने के लिए की जरूरत होती है. एयर फिल्टर धूल और गंदगी को इंजन तक पहुंचने से रोकता है. लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल होने पर इसमें गंदगी जमा हो जाती है और हवा का रास्ता रुक सकता है.
इससे इंजन की परफॉर्मेंस कमजोर पड़ सकती है और एक्सीलरेटर दबाने पर गाड़ी सुस्त महसूस हो सकती है. अगर माइलेज कम होने के साथ ऐसी परेशानी भी दिख रही है, तो एयर फिल्टर की जांच करवाएं.
स्पार्क प्लग की हालत जरूर देखें
पेट्रोल कार के इंजन में स्पार्क प्लग ईंधन को जलाने में मदद करते हैं. समय के साथ इनके घिसने या गंदे होने से इंजन ठीक से काम नहीं कर पाता. इससे पेट्रोल की खपत बढ़ सकती है.
अगर कार स्टार्ट होने के बाद भी ठीक से नहीं चल रही, रफ्तार बढ़ाने में झिझक रही है या इंजन में कंपन महसूस हो रहा है, तो स्पार्क प्लग चेक करवाना सही रहेगा. इन्हें कब बदलना है, इसकी जानकारी कार के सर्विस मैनुअल में मिल सकती है.
ब्रेक फंसे होने पर भी घटता है माइलेज
कभीकभी ब्रेक पैडल छोड़ने के बाद भी ब्रेक पूरी तरह नहीं हटता. ऐसे में कार के पहियों पर लगातार दबाव बना रहता है और इंजन को गाड़ी चलाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.
अगर कार भारी लग रही है, एक तरफ खिंच रही है या गाड़ी चलाने के बाद जलने जैसी गंध आ रही है, तो ब्रेक की जांच करवाएं. किसी एक पहिए का असामान्य रूप से गर्म होना भी परेशानी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में गाड़ी चलाते रहना खतरनाक हो सकता है.
इंजन के तापमान में गड़बड़ी
इंजन को सही तापमान पर काम करना जरूरी है. थर्मोस्टेट या कूलेंट टेम्परेचर सेंसर में खराबी आने पर इंजन को गर्म होने में ज्यादा समय लग सकता है. इससे माइलेज पर भी असर पड़ सकता है.
अगर तापमान मीटर सामान्य से कम दिख रहा है या केबिन हीटर को गर्म हवा देने में ज्यादा समय लग रहा है, तो कूलिंग सिस्टम की जांच करवाएं. आसान उपायों से समस्या समझ न आए, तो सेंसर भी चेक करवाना चाहिए.
छोटी यात्राएं और AC चलाकर खड़ी कार
हर बार कम माइलेज की वजह कार में खराबी नहीं होती. अगर आप गाड़ी खड़ी करके लंबे समय तक इंजन और AC चालू रखते हैं, तो बिना कहीं जाए भी ईंधन खर्च होता रहता है.
इसी तरह बारबार छोटी दूरी तय करने पर इंजन को सामान्य तापमान तक पहुंचने का समय नहीं मिलता. भारी ट्रैफिक में बारबार ब्रेक लगाने और एक्सीलरेटर दबाने से भी खपत बढ़ जाती है. इसलिए अगर हाल में आपका ड्राइविंग रूट या गाड़ी इस्तेमाल करने का तरीका बदला है, तो माइलेज में गिरावट की वजह यही हो सकती है.



