राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड के साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा खरीदी गई जमीनों पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं. महासचिव रहते हुए चंपत राय ने अनिल मिश्रा और गोपाल राव के साथ मिलकर जिस जमीन पर हाथ रख दिया था, वो ट्रस्ट की हो गई थी. ये बात अयोध्या के संत, वकील, कारसेवक ही नहीं, कागजात भी बोल रहे हैं. पहले एक मामला चंद मिनटों में जमीन लाखों से करोड़ों होने का सामने आया जो काफी पुराना है. आज ट्रस्ट की दो नई लैंड डील्स पर सबूत और गवाह TV9 भारतवर्ष के हाथ लगे हैं.

क्या नजूल की जमीन का बैनामा हो सकता है? जब जमीन रिकॉर्ड्स में सरकार की है तो कोई इसको ट्रस्ट को कैसे लिख सकता है? कानून भी कहता है ऐसा करना गैरकानूनी है, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट के चंपत राज में ये सब कुछ हुआ.
में केवल चढ़ावा चोरी नहीं हुआ, बल्कि उससे पहले से चंदा दुरुपयोग, रसूख के दुरुपयोग और खुद को सर्वशक्तिमान बता कर आधिपत्य जमा देने का खेल जारी था, जिसके तहत दर्जनों संपत्तियों को ट्रस्ट में शामिल कर लिया गया.
लैंड डील गैरकानूनी होने का आरोप
एडवोकेट राम अनुराग बताते हैं कि ये दोनों लैंड डील गैरकानूनी है. नजूल की जमीन जून 2023 के रिकॉर्ड्स में भी है फिर अप्रैल 2024 में महंत मुरली दास इसका बैनामा कैसे कर सकते हैं ट्रस्ट के नाम पर? ये 100% गलत है.
वहीं, सुग्रीव टीला के पास जमीन गाटा संख्या247 है. राम मंदिर के निकास द्वार के पास ही ये जगह है. जमीन के पेपर पर महंत मुरली दास और चंपत राय के हस्ताक्षर हैं. डील 23 करोड़ से ज्यादा में तय हुई और जमीन अवैध रूप से चंपत राय ने ट्रस्ट की ओर से खरीद ली. महंत मुरली दास ने इस पर बात करने से इनकार कर दिया और चंपत राय इस समय मौन पर हैं. ऐसे में सवाल यही है कि चारों तरफ से लग रहे आरोपों का जवाब आखिर कौन देगा?
हनुमान गढ़ी के महंत धर्म दास ने कहा कि एक नहीं कई जमीनें गलत तरीके से खरीदी गई हैं और करोड़ों का हेराफेरी हुआ है. जांच सही से हो तो सब निकल आएगा. मैंने खुद एक मामले में मुकदमा किया था, जब ये लोग मंदिर तोड़े थे.
संतोष दुबे ने SIT को सौंपे सबूत
कल देर शाम जब SIT ने संतोष दुबे से पूछताछ की तो सबूत मांगे. संतोष दुबे आज सबूतों की फाइल के साथ CO अयोध्या कार्यालय पहुंचे. इनके हाथ में जो फाइल थे, उसमें टॉप दो कागजात उन्ही दोनों लैंड डील के निकले. एक जमीन नजूल की तो दूसरी मंदिर कि देवोत्तर सम्पत्ति की है.
धर्म सेना के अध्यक्ष संतोष दुबे ने दोनों जमीनों का जिक्र करते कहा कि तमाम जमीनें जो खरीदी गईं, वो सबकी जांच की मांग कर रहे हैं. कुल 8 सबूत ले कर SIT को सौंपने पहुंचे हैं. दूसरी जमीन तो वो है जहां ट्रस्ट का कैंप कार्यालय बनाया गया है.
हरिशंकर सफरीवाला भी लगातार इस मुद्दे को अयोध्या से लखनऊ तक उठा रहे हैं. आज संतोष दुबे के साथ ही इन्होंने भी जमीन से जुड़े कागजात और बाकी डिटेल्स SIT को सौंपे हैं. अब देखना होगा कि इन तमाम लैंड डील्स पर SIT की फाइनल रिपोर्ट में कोई जिक्र या निष्कर्ष आता है या SIT की रिपोर्ट केवल चढ़ावा चोरी तक ही सीमित रह जाती है! प्रथम दृष्टया और आरोपों के अनुसार मामला चढ़ावा चोरी के साथ साथ चंदा मिसमैनेजमेंट का भी दिखाई देता है.


