
किडनी हमारी बॉडी का एक अहम अंग है। इसका मुख्य काम खून को फिल्टर करना और शरीर से अतिरिक्त पानी, नमक व अपशिष्ट पदार्थों को यूरिन के जरिए बाहर निकालना है। किडनी शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आसान भाषा में कहें तो किडनी शरीर की एक प्राकृतिक फिल्टर मशीन की तरह काम करती है, जो खून से अपशिष्ट पदार्थों को अलग करके उन्हें पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। बॉडी की ये फिल्टर मशीन शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम, पोटैशियम का संतुलन बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी अहम भूमिका निभाती है।
हरिद्वार में आदर्श आयुर्वेदिक फार्मेसी में आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर दीपक कुमार ने बताया किडनी की कार्यक्षमता में आ रही गिरावट को समय पर पहचानना बेहद जरूरी है। खराब डाइट, बिगड़ता लाइफस्टाइल, जरूरत से ज्यादा दवाओं का सेवन हमारी किडनी की सेहत को बिगाड़ रहा है। किडनी की बीमारी को मेडिकल साइंस में साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि किडनी की कार्यक्षमता 60-70% तक घटने के बाद ही इसमें होने वाली खराबी के लक्षण दिखते हैं।
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डॉक्टर ने बताया जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, तो शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इनमें से कई लक्षण दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम से जुड़े भी हो सकते हैं इसलिए समय पर जांच कराना जरूरी है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि किडनी में खराबी होने पर हमारी बॉडी में कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
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- सुबह चेहरे और आंखों के आसपास सूजन को न करें इग्नोर:
सुबह उठने पर चेहरे, खासकर आंखों के आसपास सूजन या भारीपन दिखाई देना शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने का संकेत हो सकता है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, चेहरे की सूजन के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। - लगातार थकान महसूस होना
: बिना ज्यादा मेहनत के लगातार थकान, कमजोरी या काम करने की क्षमता कम होना भी किडनी की बीमारी का संकेत हो सकते हैं। जब किडनी ठीक तरह से काम नहीं करती तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा हो सकते हैं। इसके अलावा, किडनी की बीमारी से एनीमिया भी हो सकता है, जिससे कमजोरी और थकान बढ़ सकती है। हालांकि, थकान के पीछे एनीमिया, नींद की कमी और दूसरी कई वजहें भी हो सकती हैं लेकिन तो भी ऐसी परेशानी दिखने पर आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। - एनीमिया या त्वचा का रंग पीला पड़ना:
हमारी किडनी एरिथ्रोपोइटिन (Erythropoietin) नामक हार्मोन बनाती है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। किडनी की गंभीर बीमारी में इस हार्मोन का उत्पादन कम हो सकता है और एनीमिया की समस्या हो सकती है। इससे कमजोरी, थकान और त्वचा का रंग फीका दिखाई दे सकता है। कमजोरी,थकान और आंखों में सूजन के साथ ही अगर स्किन की रंगत पीली पड़ने लगे तो आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। - पैरों और टखनों में सूजन:
पैरों, टखनों या पैरों के आसपास बार-बार सूजन होना शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने से जुड़ा हो सकता है। किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर अतिरिक्त नमक और पानी को पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकाल पाता। अगर पैर दबाने पर कुछ देर के लिए गड्ढा बनता है और सूजन नियमित रूप से बनी रहती है। बॉडी में लम्बे समय तक होने वाली सूजन को इग्नोर नहीं करें तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। - भूख कम लगना और जी मिचलाना:
किडनी की गंभीर समस्या में भूख कम लगना, खाने से अरुचि, मतली या उल्टी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसा शरीर में अपशिष्ट पदार्थों के जमा होने के कारण हो सकता है। भूख कम लगने के लक्षण पेट, लिवर, संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं। इसलिए इन्हें केवल किडनी की बीमारी से जोड़ना सही नहीं है। आप ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। - एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता में कमी:
किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अपशिष्ट पदार्थों का स्तर बढ़ने से कुछ लोगों को ध्यान लगाने, सोचने या चीजों को याद रखने में परेशानी हो सकती है। इसे यूरेमिक एन्सेफैलोपैथी जैसी गंभीर स्थिति से जोड़ा जा सकता है। लेकिन सामान्य भूलने की समस्या या कभी-कभार एकाग्रता कम होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। - पेशाब बार-बार आना या कम आना:
किडनी की बीमारी में पेशाब के रंग और मात्रा में बदलाव हो सकता है। कुछ लोगों के पेशाब की मात्रा कम हो सकती है। पेशाब में बदलाव, बार-बार पेशाब आना या रात में अधिक पेशाब आना भी कुछ किडनी और यूरिनरी समस्याओं में देखा जा सकता है। हालांकि पेशाब का रंग गहरा होना या उसमें तेज गंध आना हमेशा किडनी की बीमारी का संकेत नहीं होता। पानी की कमी, कुछ खाद्य पदार्थ, दवाएं और संक्रमण भी इसकी वजह हो सकते हैं। - सांस फूलना:
किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने पर फेफड़ों पर भी असर पड़ सकता है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। किडनी की बीमारी से जुड़ा एनीमिया भी सांस फूलने का कारण बन सकता है। हालांकि, सांस फूलने के पीछे हृदय, फेफड़ों और एनीमिया से जुड़ी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। अचानक या गंभीर सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। - झागदार पेशाब आना:
पेशाब में बार-बार और ज्यादा झाग दिखाई देना कभी-कभी प्रोटीन यूरिया (Proteinuria) का संकेत हो सकता है। जब किडनी के फिल्टर यानी ग्लोमेरुली को नुकसान पहुंचता है, तो प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकता है। हालांकि, हर बार झागदार पेशाब का मतलब किडनी की बीमारी नहीं होता। लगातार ऐसा होने पर यूरिन टेस्ट और डॉक्टर की सलाह जरूरी है। - पेशाब पर कंट्रोल कम होना:
पेशाब का अचानक लीक हो जाना या पेशाब करने से पहले निकल जाना यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस कहलाता है। हालांकि यह किडनी की बीमारी का सीधा और विशिष्ट लक्षण नहीं है। इसके पीछे मूत्राशय की समस्या, उम्र, प्रोस्टेट की समस्या, न्यूरोलॉजिकल बीमारी, संक्रमण या अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए पेशाब पर नियंत्रण कम होने की समस्या को किडनी की बीमारी मानकर खुद इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
किडनी की सेहत का ध्यान कैसे रखें
शुरुआती दौर में सही लाइफस्टाइल, सही खान-पान और मेडिकल गाइडेंस से किडनी को आगे नुकसान पहुंचने से रोका जा सकता है। डॉक्टर दीपक ने बताया किडनी की सेहत के लिए सबसे जरूरी है कि पानी का सेवन अधिक किया जाएं, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखा जाए, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि की जाए और संतुलित आहार का सेवन किया जाए। बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाओं पर कंट्रोल करना, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचना किडनी की सेहत के लिए जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए प्रकाशित किया गया है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह या निदान का विकल्प न मानें। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लें।



