आजकल ऑफिस में छुट्टी मांगने से लेकर जरूरी काम की जानकारी देने तक, व्हाट्सएप का इस्तेमाल आम हो गया है. कई बार कर्मचारी अपने बॉस को मैसेज भेजते हैं और जवाब में सिर्फ OK मिलते ही मान लेते हैं कि उनकी बात मान ली गई है. लेकिन, क्या बॉस का इतना छोटासा जवाब सरकारी नौकरी में छुट्टी मंजूर होने का पक्का सबूत है? इलाहाबाद में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के एक मामले ने इस सवाल को चर्चा में ला दिया है.

उत्तर मध्य रेलवे के एक कर्मचारी ने दावा किया कि उनके अधिकारी ने व्हाट्सएप पर OK लिखकर छुट्टी बढ़ाने की मंजूरी दी थी. लेकिन, बाद में उन्हें निलंबन और तबादले का सामना करना पड़ा. मामला ट्रिब्यूनल तक पहुंचा, जहां 7 अक्टूबर 2026 को दिए गए फैसले में कहा गया कि व्हाट्सएप पर मिला OK अपने आप में छुट्टी मंजूर होने का पुख्ता सबूत नहीं है. इस मामले में यह भी देखा गया कि छुट्टी मंजूर करने का अधिकार किस अधिकारी के पास था और रेलवे के तय नियमों का पालन किया गया था या नहीं.
क्या है रेलवे कर्मचारी का पूरा मामला?
यह मामला उत्तर मध्य रेलवे में तैनात कर्मचारी से जुड़ा है. वो जुलाई 2025 में अपने पैतृक गांव जाने के लिए 14 से 16 जुलाई तक छुट्टी पर थे. इसके बाद उन्होंने 17 और 18 जुलाई के लिए दो दिन की और छुट्टी मांगी. उनके मुताबिक, उन्होंने व्हाट्सएप पर अपने सीनियर अधिकारी हिमांशु शुक्ला से छुट्टी बढ़ाने की रिक्वेस्ट की थी. जिस पर उनका दावा था कि अधिकारी ने जवाब में OK लिखा, जिसे उन्होंने छुट्टी की मंजूरी समझ लिया.
लेकिन जब वो 21 जुलाई को ड्यूटी पर लौटे, तो उन्हें सस्पेंड कर दिया गया. इसके बाद 25 जुलाई को उनका प्रयागराज से फतेहपुर ट्रांसफर कर दिया गया और 31 जुलाई को उन्हें विभागीय आरोपपत्र भी जारी किया गया. कर्मचारी ने आरोप लगाया कि यह ट्रांसफर छुट्टी से जुड़े विवाद की वजह से उन्हें पनिशमेंट दने के लिए किया गया था.
रेलवे ने छुट्टी मंजूर होने पर क्या कहा?
रेलवे ने कर्मचारी के दावे का विरोध किया. उसका कहना था कि संबंधित अधिकारी हिमांशु शुक्ला 14 से 25 जुलाई 2025 तक ट्रेनिंग पर थे. इस दौरान वाणिज्य विभाग का प्रशासनिक काम दूसरे अधिकारी अतुल यादव संभाल रहे थे. रेलवे के मुताबिक, छुट्टी मंजूर करने का अधिकार संबंधित सक्षम अधिकारी के पास था और इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था.
रेलवे ने यह भी बताया कि छुट्टी के आवेदन को HRMS पोर्टल के जरिए मंजूर कराया जाना था. HRMS यानी ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम एक ऑनलाइन व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल कर्मचारियों की छुट्टी और सेवा से जुड़े कामों के लिए किया जाता है. रेलवे के अनुसार, कर्मचारी ने तय प्रक्रिया के तहत छुट्टी मंजूर नहीं कराई थी.
CAT ने व्हाट्सएप के OK पर क्या कहा?
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की इलाहाबाद पीठ ने स्पष्ट किया कि व्हाट्सएप पर OK लिखे होने से यह अपने आप साबित नहीं होता कि छुट्टी मंजूर कर दी गई थी. साथ ही ये भी कहा गया कि ये देखना भी जरूरी है कि छुट्टी मंजूर करने का अधिकार उस अधिकारी के पास था या नहीं और विभाग के नियमों का पालन हुआ था या नहीं. ट्रांसफर के मामले में भी कर्मचारी ये साबित नहीं कर सके कि उन्हें जानबूझकर परेशान करने के लिए दूसरी जगह भेजा गया था. रेलवे ने तबादले के पीछे प्रशासनिक जरूरत बताई थी.
ट्रिब्यूनल ने कर्मचारी के ट्रांसफर को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी. अदालत ने पाया कि रेलवे ने फतेहपुर स्टेशन पर नए एंट्री गेट और बुकिंग ऑफिस के डेवलेपमेंट के लिए कर्मचारी की जरूरत होने का प्रशासनिक कारण बताया था. कर्मचारी अपने तबादले के पीछे दुर्भावना या दंड देने की मंशा के पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सके.



