हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को मुफ्त इलाज व दवाएं उपलब्ध करवाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर के मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से सामने आई तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों को कई जरूरी दवाएं और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

हालात ऐसे हैं कि अस्पताल के स्टोर में सिरिंज करीब छह महीने से, कैल्शियम की दवाएं चार महीने से और कई अन्य जरूरी दवाएं व सामान लगभग तीन महीने से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मुख्यमंत्री के अपने गृह जिला के प्रमुख चिकित्सा संस्थान में मरीजों को बुनियादी जरूरतों के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है, तो प्रदेश के दूसरे अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कैसी होगी?
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मरीजों की जेब पर बढ़ रहा बोझ
सरकारी अस्पतालों में मरीज इस उम्मीद से पहुंचते हैं कि उन्हें कम खर्च में बेहतर उपचार और जरूरी दवाएं मिल सकेंगी। लेकिन हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी के कारण मरीजों को बाजार का रुख करना पड़ रहा है। मुफ्त मिलने वाली दवाएं और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध न होने से पहले ही इलाज के खर्च से परेशान मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। खासकर उन परिवारों के लिए यह स्थिति अधिक मुश्किल पैदा कर सकती है, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं।
छह महीने से सिरिंज नहीं, चार महीने से कैल्शियम की दवाएं गायब
अस्पताल के स्टोर रिकॉर्ड के अनुसार, सिरिंज की उपलब्धता करीब छह महीने से नहीं है। वहीं, कैल्शियम की दवाएं भी लगभग चार महीने से स्टॉक में नहीं हैं। इसके अलावा पैरासिटामोल की गोलियां और इंजेक्शन, ग्लूकोज तथा शुगर और ब्लड प्रेशर से संबंधित कुछ दवाओं की कमी भी सामने आई है। ये ऐसी जरूरतें हैं, जिनका संबंध मरीजों के नियमित उपचार से है। इनकी अनुपलब्धता मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।
ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाले सामान की कमी
दवाओं की कमी का मामला केवल सामान्य उपचार तक सीमित नहीं है। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं के साथ सुई और दस्ताने जैसी जरूरी चिकित्सा सामग्री भी करीब तीन महीने से स्टॉक में नहीं होने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में दवाओं और आवश्यक सामान की नियमित उपलब्धता बेहद अहम होती है। ऐसे में लंबे समय तक स्टॉक खाली रहने की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
रोजाना करीब 2,500 मरीज पहुंचते हैं ओपीडी में
डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में रोजाना करीब 2,500 मरीज ओपीडी में उपचार करवाने पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों को सेवाएं देने वाले संस्थान में आवश्यक दवाओं की कमी का असर बड़ी आबादी पर पड़ सकता है। मरीजों को यदि डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद जरूरी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ें, तो मुफ्त उपचार की व्यवस्था का लाभ सीमित हो जाता है। ऐसे में दवाओं की नियमित सप्लाई सुनिश्चित करना अस्पताल प्रशासन और संबंधित व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
एनएचएम के तहत मिलता है बजट, फिर भी नहीं मिल रहीं दवाएं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मुफ्त दवाओं की खरीद के लिए मेडिकल कॉलेज को बजट उपलब्ध करवाया जाता है। स्टोर कर्मचारियों के अनुसार, दवाओं की सप्लाई अस्पताल पहुंचने पर उन्हें संबंधित विभागों को भेज दिया जाता है। यदि किसी विभाग की ओर से अतिरिक्त मांग आती है, तो इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जाती है। इसके बावजूद जरूरी दवाओं और चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता में लंबे समय से बनी कमी ने आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पोर्टल पर ऑर्डर, लेकिन अस्पताल तक नहीं पहुंची सप्लाई
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि दवाओं की खरीद निर्धारित पोर्टल के माध्यम से की जाती है और आवश्यक दवाओं के ऑर्डर दिए जा चुके हैं। हालांकि, संबंधित सप्लाई अभी तक अस्पताल नहीं पहुंची है। प्रशासन के मुताबिक, बजट की कमी के कारण बाजार से सीधे दवाएं खरीदना संभव नहीं है। यानी ऑर्डर दिए जाने के बावजूद सप्लाई में देरी का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। अब सवाल यह है कि जब अस्पताल में जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म हो जाता है, तो वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए मरीजों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
चिकित्सा अधीक्षक ने भी मानी कुछ दवाओं की कमी
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देशराज शर्मा ने स्वीकार किया है कि अस्पताल में कुछ दवाओं की कमी है। उन्होंने बताया कि दवाओं के ऑर्डर दिए गए हैं, लेकिन सप्लाई अभी तक नहीं पहुंची है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खरीद पोर्टल के माध्यम से की जाती है और बजट की कमी के चलते सीधे बाजार से दवाएं खरीदना संभव नहीं है।
सरकार के दावों और जमीनी व्यवस्था के बीच कितना अंतर?
हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और आम लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने के दावे लगातार किए जाते रहे हैं। लेकिन हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में जरूरी दवाओं और सिरिंज की लंबे समय से बनी कमी यह सवाल खड़ा करती है कि इन दावों का लाभ मरीजों तक किस हद तक पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री के गृह जिला के प्रमुख अस्पताल में ही यदि मरीजों को जरूरी सामान के लिए बाजार पर निर्भर रहना पड़ रहा है, तो व्यवस्था की जवाबदेही तय करना जरूरी है।



