पूर्व भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि T20 क्रिकेट अपने छोटे समय की वजह से एक मुख्य फ़ॉर्मेट बना रहेगा; उनका मानना है कि यह फ़ॉर्मेट दुनिया भर में विस्तार और भविष्य में ओलंपिक में शामिल किए जाने के लिए ज़्यादा उपयुक्त है। यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग में डबलिन गार्डियंस के कप्तान और मेंटर के तौर पर काम कर रहे अश्विन ने कहा कि इस फ़ॉर्मेट से ज़्यादा खिलाड़ियों के जुड़ने और दुनिया भर में लीग्स के मज़बूत होने की संभावना है, जबकि उन्होंने वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट के लंबे समय के भविष्य पर संदेह भी जताया।

ETPL 2026 प्लेयर ड्राफ्ट में मीडिया से बात करते हुए अश्विन ने कहा कि अगर खेल को ग्लोबल बनाना है और इसे ओलंपिक खेल का दर्जा दिलाना है, तो खेल जितना छोटा होगा, उतना ही बेहतर होगा। इसी तरह यह और बड़ा बनेगा और आपको खिलाड़ियों का बेहतर सैंपल साइज़ देखने को मिलेगा, जो कई लीग के लिए बहुत ज़रूरी है। T20 खेल तो बना रहेगा, लेकिन ODI क्रिकेट के बारे में मैं पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकता।
अश्विन ने क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए अलगअलग हालात के हिसाब से खुद को ढालने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि लगातार सुधार करना और अलगअलग हालात के मुताबिक खुद को बदलना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने भारत और आयरलैंड के बीच हाल ही में हुई T20I सीरीज़ का उदाहरण दिया, जिसमें भारत को ऐतिहासिक रूप से 20 से हार का सामना करना पड़ा था। यह इस बात का उदाहरण है कि कैसे खेलने के हालात पारंपरिक T20 रणनीतियों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
अश्विन ने कहा कि मुझे लगता है कि क्रिकेट को कुल मिलाकर इस तरह से सीखा जाना चाहिए कि आप हर दिन बेहतर होते जाएं। आपको हालात के हिसाब से खुद को ढालना आना चाहिए। इस खेल का मूल मंत्र ही खुद को ढालना है। यही वजह है कि भारत और आयरलैंड के बीच हाल ही में हुई T20 सीरीज़ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे हालात खेल के उन कई पहलुओं को खत्म कर सकते हैं, जिन्हें T20 खेल के मुख्य आधार के तौर पर विकसित किया गया था।
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