केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि रूसयूक्रेन युद्द में रूसी सेना में लगभग 267 भारतीय शामिल हुए थे, जिनमें से 51 की मौत हुई और 77 अब भी लापता हैं. इनमें से सात के लापता होने की पुष्टि रूसी अधिकारियों ने की है. जबकि 139 भारतीय को भारत सरकार द्वारा रूसी फेडरेशन के साथ किए गए सतत राजनयिक सहयोग के तहत पहले ही सेवा से मुक्त कर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ‘दिव्या बनाम भारत संघ’ मामले की सुनवाई कर रहा था. इसी दौरान विदेश मंत्रालय ने रूसी सेना में शामिल हुए भारतीय नागरिकों का पूरा ब्योरा दिया. CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने विदेश मंत्रालय से कहा कि वह प्रभावित भारतीयों के परिवारों को मदद और मुआवजा पाने के लिए आमंत्रित करते हुए एक सार्वजनिक सूचना जारी करने पर विचार करे.
शवों को वापस लाने में हो रही देरी पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि विदेश मंत्रालय परिवारों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रहा है और उम्मीद करता है कि अधिकारी मुआवजे के दावों में मदद करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने रूस से मुआवजा पाने में आ रही दिक्कतों, DNA पहचान और शवों को वापस लाने में हो रही देरी पर भी गौर किया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों से लगातार फॉलोअप कर रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सिकंदर सिंह के मामले पर भी विचार किया,जो रूस में आठ साल की सजा काट रहा है और इस संभावना पर भी कि क्या वह अपनी बाकी सजा भारत में काट सकता है? वहीं, याचिकाकर्ता उन एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं,जिन पर भारतीयों को रूसी सेना में भर्ती करने में शामिल होने का आरोप लगा है.
रूसी सेना में भर्ती के प्रस्ताव से दूर रहें MEA
इससे पहले 7 अक्टूबर को MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने वीकली मीडिया ब्रीफिंग में इसके बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि हम रूसी सेना के साथ बचे 69 भारतीय नागरिकों के बारे में अपडेट के लिए रूसी अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी प्रस्ताव से दूर रहने की अपील की थी.



