
Ashwatthama Shri Krishna Story: बात उस समय की है जब महाभारत का युद्ध खत्म हो चुका था, लेकिन कुरुक्षेत्र की आग अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई थी. कौरवों की हार और दुर्योधन की मृत्यु के बाद अश्वत्थामा के मन में प्रतिशोध की ज्वाला भड़क रही थी. इसी क्रोध में उसने रात के अंधेरे में पांडवों के शिविर पर हमला किया और द्रौपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी. इसके बाद उसने पांडव वंश को समाप्त करने के लिए उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु पर भी ब्रह्मास्त्र चला दिया. इस पर भगवान कृष्ण भड़क गए और अश्वत्थामा को श्रीकृष्ण को कठोर श्राप दे डाला. पढ़िए आगे की रोचक कथा-
रात में किया ऐसा कृत्य, जिसने बदल दी कहानी
महाभारत की कथा के अनुसार, युद्ध के अंतिम चरण में दुर्योधन बुरी तरह घायल होकर मृत्युशैया पर था. अपने स्वामी की यह हालत देखकर अश्वत्थामा ने पांडवों से बदला लेने का संकल्प लिया. रात के समय वह कृपाचार्य और कृतवर्मा के साथ पांडव शिविर में पहुंचा. शिविर में सो रहे योद्धाओं पर हमला किया गया. इसी दौरान द्रौपदी के पांचों पुत्र- प्रतिविंध्य, सुतसोम, श्रुतकर्मा, शतानिक और श्रुतसेन मारे गए. अश्वत्थामा को लगा कि उसने पांडवों का वध कर दिया है, लेकिन बाद में उसे पता चला कि पांडव जीवित हैं.
पांडव वंश खत्म करने के लिए चलाया ब्रह्मास्त्र
इसके बाद अश्वत्थामा और पांडवों के बीच संघर्ष हुआ. जब उसे लगा कि वह पांडवों को परास्त नहीं कर सकता, तो उसने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया. कथा के अनुसार, यह अस्त्र उत्तरा के गर्भ में पल रहे अभिमन्यु के पुत्र को निशाना बनाकर छोड़ा गया था. उत्तरा के गर्भ में वही शिशु था, जो आगे चलकर परीक्षित के नाम से जाना गया. श्रीकृष्ण ने अपने दिव्य प्रभाव से गर्भस्थ शिशु की रक्षा की. इस तरह पांडव वंश की आगे की कड़ी बच गई.
श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को दिया कठोर दंड
अश्वत्थामा के कृत्य से श्रीकृष्ण अत्यंत क्रोधित हुए. महाभारत की कथा में बताया गया है कि अश्वत्थामा के माथे पर एक मणि थी, जिसे उसकी शक्ति और सुरक्षा से जोड़ा जाता है. श्रीकृष्ण ने वह मणि उससे छीन ली. इसके बाद अश्वत्थामा को ऐसा दंड मिला, जिसे मृत्यु से भी अधिक पीड़ादायक बताया गया है. कहा जाता है कि, श्रीकृष्ण ने उसे हजारों वर्षों तक पृथ्वी पर भटकने का श्राप दिया. उसके शरीर पर घाव और पीड़ा बनी रहने तथा समाज से दूर रहने की बात भी कथाओं में मिलती है.
क्या अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं?
अश्वत्थामा को भारतीय धार्मिक परंपरा में चिरंजीवी माने जाने की मान्यता है. हालांकि, उनके आज भी जीवित होने या किसी विशेष स्थान पर दिखाई देने से जुड़े दावे लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं.

