हिमाचली खबर: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में हाल के महीनों में सामने आए प्रशासनिक विवादों, जांचों और कार्रवाईयों के बीच शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. संतोष कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने शिक्षक संघ के अध्यक्ष को भेजे पत्र में शिक्षकों की घटती भागीदारी, लंबित मांगों और संगठन की कमजोर होती सामूहिक ताकत को अपने निर्णय का कारण बताया है. हालांकि, उनके इस्तीफे के समय को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं.

करीब एक दशक से अधिक समय तक शिक्षक संघ का नेतृत्व संभालने वाले डॉ. संतोष कुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि शिक्षक संघ ने लंबे संघर्ष के बाद शिक्षकों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं दिलाईं. इनमें संजय गांधी पीजीआई के समान वेतन एवं भत्तों का लाभ भी शामिल है. उन्होंने कहा कि संगठन ने हमेशा शिक्षकों के हितों के लिए संघर्ष किया, लेकिन हाल के वर्षों में सामूहिक सहभागिता लगातार कमजोर होती गई.
दिवंगत शिक्षकों के परिवारों को मदद में भी घटा सहयोग
डॉ. संतोष कुमार ने अपने पत्र में शिक्षकों की घटती भागीदारी का उदाहरण देते हुए बताया कि शिक्षक संघ की आमसभा में दिवंगत शिक्षकों के परिवारों की सहायता के लिए एक दिन का वेतन दान करने का निर्णय लिया गया था. पहले मामले में लगभग 400 शिक्षकों ने योगदान दिया, दूसरे में यह संख्या घटकर 326 रह गई और तीसरे मामले में केवल 211 शिक्षकों ने सहयोग किया. जबकि विश्वविद्यालय में कुल 486 शिक्षक कार्यरत हैं.
कई महत्वपूर्ण मांगें अब भी लंबित
इस्तीफा पत्र में अर्जित अवकाश , ग्रेच्युटी, कॉन्फ्रेंस भत्ता, शिक्षकों के प्रार्थनापत्रों के त्वरित निस्तारण, प्रशासनिक पारदर्शिता और समान अवसर जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है. डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि इन विषयों को कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति के समक्ष उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.
सामूहिक संघर्ष की भावना पर उठाए सवाल
उन्होंने पत्र में लिखा कि शिक्षकों के हितों से जुड़े मामलों में अपेक्षित स्तर पर सामूहिक संघर्ष की भावना दिखाई नहीं दी. उनका मानना है कि यदि प्रभावशाली शिक्षक गंभीरता से पहल करें तो अधिकांश समस्याओं का समाधान संभव है, लेकिन व्यक्तिगत हित कई बार सामूहिक हितों पर भारी पड़ जाते हैं.
क्या शिक्षक संघ सिर्फ औपचारिकताओं तक सीमित रह गया है?
शिक्षक संघ की वर्तमान भूमिका पर भी सवाल
डॉ. संतोष कुमार ने शिक्षक संघ की वर्तमान भूमिका पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने लिखा कि कई शिक्षक उनसे यह प्रश्न पूछते हैं कि क्या शिक्षक संघ अब केवल स्वागत और विदाई समारोहों तक सीमित होकर रह गया है. उन्होंने स्वीकार किया कि इस सवाल का उनके पास कोई संतोषजनक उत्तर नहीं है.
अपने इस्तीफे के अंत में डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उनके लिए महासचिव पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि कोई नया और सक्षम शिक्षक आगे आकर संगठन की कमान संभालेगा तथा शिक्षकों की लंबित मांगों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएगा.
KGMU के शिक्षक समुदाय में नई बहस
डॉ. संतोष कुमार के इस्तीफे ने KGMU के शिक्षक समुदाय में नई बहस छेड़ दी है. खासतौर पर ऐसे समय में जब विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है, उनके इस फैसले को महज व्यक्तिगत निर्णय से अधिक व्यापक संस्थागत संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है.



