Dehradun News: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित केदारताल झील भविष्य में किसी बड़ी कुदरती आपदा का कारण बन सकती है. राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान , रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि यदि केदारताल का प्राकृतिक बांध टूटता है, तो महज 45 मिनट के भीतर बाढ़ की विनाशकारी लहर गंगोत्री धाम तक पहुंच सकती है. ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिमोट सेंसिंग’ में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ का पानी केदारगंगा के जरिए भागीरथी नदी से होते हुए ऋषिकेश तक तबाही मचा सकता है.

अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 1990 में केदारताल का क्षेत्रफल 64,455.86 वर्गमीटर था, जो 2020 में बढ़कर 1,05,772.99 वर्गमीटर और 2025 तक 1,33,823.1 वर्गमीटर हो गया. पिछले 35 सालों में झील का आकार 107.5% बढ़ा है, जिसमें 2020 से 2025 के बीच ही 28,000 वर्गमीटर का इजाफा दर्ज किया गया. 20 वैज्ञानिकों की टीम द्वारा सितंबर 2026 में किए गए सर्वे के अनुसार, 600 मीटर लंबी और 200 मीटर चौड़ी इस झील की गहराई 13 मीटर है. इसमें फिलहाल लगभग 1.56 अरब लीटर पानी जमा है.
शोधकर्ता डॉ. लवकुश कुमार पटेल ने बताया कि बढ़ते तापमान और ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे हिमनद झीलों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.
15 मिनट में 2800 घनमीटर प्रहार, संकरी घाटी में 20 मीटर तक गहरा होगा पानी
टूडायमेंशनल हाइड्रोडायनामिक मॉडल के अनुसार, बांध टूटने के महज 15 मिनट में बाढ़ का प्रवाह 2,800 घनमीटर प्रति सेकेंड के उच्चतम स्तर तक पहुंच जाएगा. केदारगंगा घाटी में 20 किलोमीटर की दूरी तय कर बाढ़ की लहर 45 मिनट में गंगोत्री पहुंचेगी. गंगोत्री पहुंचने पर भी पानी का प्रवाह 1,450 घनमीटर प्रति सेकेंड रहेगा. घाटी के संकरे हिस्सों में पानी का स्तर 20 मीटर तक बढ़ सकता है, जबकि संगम के आसपास निचले इलाकों में जलभराव शून्य से 15 मीटर तक होने का अनुमान है, जिससे पुलों, बुनियादी ढांचों और बस्तियों को गंभीर खतरा है.



