अंतरिक्ष में पहुंचे सैटेलाइट्स वहां मलबा बढ़ा रहे हैं. वही मलबा धरती पर गिर रहा है. पोलिस स्पेस एजेंसी के मारियस स्लोनिना ने दावा किया है कि हर हफ्ते एक मीट्रिक टन कचरा धरती पर गिरता है. इसका पता तब चला जब केन्या में इस साल की शुरुआत में अंतरिक्षयान की धातु की एक बड़ी रिंग नीचे गिरी. दुनिया के कई देश अपने स्पेस प्रोग्राम को तेजी से बढ़ा रहे हैं. अरबों रुपए खर्च कर रहे हैं. अंतरिक्ष में रॉकेट और उपग्रहों की बढ़ती संख्या के कारण पृथ्वी पर वापस गिरने वाले अंतरिक्ष मलबे की मात्रा भी बढ़ रही है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अधिकांश मलबा वायुमंडल में जल जाता है या समुद्र में गिर जाता है, लेकिन लगभग एक मीट्रिक टन वजनी बड़ी वस्तुएं अब हफ्ते में एक बार पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर रही हैं.अमेरिका की स्पेस फोर्स का दावा है कि 2025 में वायुमंडल में प्रवेश करने वाली लगभग 820 वस्तुओं के लिए अलर्ट जारी किया गया था जबकि एक दशक पहले यह संख्या मात्र 110 थी. आंकड़े बताते है कि कैसे अंतरिक्ष में गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं. जानिए, अंतरिक्ष में कैसे बढ़ रहा कचरा, यह कहां से आता है, कौन सा से देश सबसे ज्यादा कचरा फैला रहा?
अंतरिक्ष में कहां से आया कचरा?
अंतरिक्ष के कचरे को स्पेस डेब्रिस भी कहते हैं. यह उन वस्तुओं को कहा जाता है जिसे इंसान ने बनाया है और पृथ्वी की कक्षा में मौजूद हैं लेकिन अब किसी काम के नहीं हैं. ये न तो किसी उपग्रह का हिस्सा हैं और न ही किसी मिशन के लिए उपयोगी. सिर्फ बेकार पड़े मलबे की तरह अंतरिक्ष में तैर रहे हैं. यह कचरा कई जगहों से आता है.
- डेड सैटेलाइट: जिन सैटेलाइट्स की उम्र पूरी हो चुकी है या जो खराब हो गए हैं. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
- रॉकेट के टुकड़े: लॉन्च के बाद अलग हुए रॉकेट बूस्टर और उनके पुर्जे.
- टकराव से बना मलबा: जब दो उपग्रह या मलबे के टुकड़े आपस में टकराते हैं तो हजारों नए छोटे टुकड़े बन जाते हैं.
- एंटीसैटेलाइट टेस्ट: जब कोई देश मिसाइल से अपने ही सैटेलाइट को उड़ाकर सैन्य क्षमता परखता है, तो वह विस्फोट भी बड़ी मात्रा में मलबा पैदा करता है.
- छोटेछोटे उपकरण: अंतरिक्ष यात्रियों के गिरे हुए औजार, पेंट के कण, यहां तक कि रॉकेट ईंधन की बूंदें भी कचरे में गिनी जाती हैं.
किस देश ने फैलाया सबसे ज्यादा कचरा?
अंतरिक्ष में कचरा फैलाने वाले देशों की लिस्ट में रूस सबसे ऊपर है. इसके बाद अमेरिका, चीन, फ्रांस और जापान का नंबर आता है. रूस के आगे होने की वजह इसका लंबा स्पेस इतिहास है. दशकों से भेजे गए सैटेलाइट, रॉकेट बूस्टर और 2021 में किया गया एंटीसैटेलाइट टेस्ट, जिसमें रूस ने अपनी ही पुरानी सैटेलाइट को उड़ाकर हजारों टुकड़ों का मलबा कक्षा में फैला दिया था, इतना ज्यादा था कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को भी खतरे में डाल दिया.
अंतरिक्ष में कचरा. फोटो: AI Generated
कितनी रफ्तार से घूमते हैं?
अंतरिक्ष में मलबे 25,000 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक रफ्तार से घूमते हैं. इस रफ्तार पर एक छोटा सा पेंच भी किसी सैटेलाइट या स्पेस स्टेशन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियां जैसे NASA, ESA, ISRO अब डेब्रिस ट्रैकिंग सिस्टम, “डीऑर्बिटिंग” तकनीक और सफाई मिशनों पर काम कर रही हैं, ताकि पुराने सैटेलाइट्स को जानबूझकर पृथ्वी के वायुमंडल में जलाकर नष्ट किया जा सके या सुरक्षित “ग्रेवयार्ड ऑर्बिट” में भेजा जा सके.
कहांकहां हुई कचरा गिरने की घटनाएं?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का कचरा एक बार फ्लोरिडा के एक घर से टकरा चुका है. वहीं, स्पेसएक्स के रॉकेट के टुकड़े पोलैंड और कनाडा में गिर चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस के समुद्र तटों पर भी मलबा बहकर आ चुका है. केन्या में तो एक बड़ा रॉकेट का हिस्सा खेत में जा गिरा.



