शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम संदेश जारी करते हुए नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन को सशक्त समाज की रीढ़ बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिशक्ति मां भगवती की उपासना तभी सार्थक होगी, जब समाज में महिलाओं को वास्तविक सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भर बनने के समान अवसर मिलेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि नारी का गौरव और स्वाभिमान ही एक समृद्ध और विकसित राज्य के निर्माण का मजबूत आधार है। नवरात्रि का यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भीतर की नकारात्मकता पर विजय पाकर मातृशक्ति के सशक्तिकरण का संकल्प लेने का महापर्व है।

मिशन शक्ति और कानूनव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2020 में शारदीय नवरात्रि के दौरान ही प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ की शुरुआत की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम आज पूरे राज्य में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। पुलिस व्यवस्था में नारी भागीदारी को ऐतिहासिक बढ़ावा देते हुए पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। आज उत्तर प्रदेश पुलिस में 44 हजार से अधिक महिला कर्मी कार्यरत हैं। इसके साथ ही वीरांगना ऊदा देवी पासी, झलकारी बाई कोरी और रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर तीन समर्पित महिला पीएसी बटालियनों का गठन कर नारी शक्ति को नई पहचान दी गई है।

आवास और कल्याणकारी योजनाओं में महिलाओं को मालिकाना हक

योगी सरकार ने महिलाओं को केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में दिए जाने वाले पक्के मकानों का मालिकाना हक परिवार की महिला मुखिया के नाम पर दर्ज किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश में 10 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से एक करोड़ से अधिक बहनें आत्मनिर्भर बनकर आर्थिक विकास की नई गाथा लिख रही हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और सामूहिक विवाह योजना से बेटियों की पढ़ाई से लेकर शादी तक का मार्ग सुगम हुआ है।

विकसित उत्तर प्रदेश के लिए समाज से सामूहिक अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में असुरक्षा का वातावरण था, लेकिन वर्तमान में डबल इंजन की सरकार ने सुशासन के दम पर महिलाओं के लिए भयमुक्त माहौल स्थापित किया है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे केवल सरकार पर निर्भर न रहें, बल्कि समाज भी बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी सक्रिय सहभागिता निभाए। जब तक मातृशक्ति सुरक्षित और सशक्त नहीं होगी, तब तक विकसित उत्तर प्रदेश की कल्पना अधूरी रहेगी।