चीन के मुकाबले भारत में 17% सस्ती है चांदी, ये है इसके पीछे का कारण

चीन के मुकाबले भारत में 17% सस्ती है चांदी, ये है इसके पीछे का कारण

बीते कई दिनों से आपने चांदी की कीमतों में तेजी से जुड़ी कई सारी खबरें सुनी होंगी और हेडलाइन भी देखी होगी. सिल्वर ने अपने रिटर्न से बीते 1 साल में चौंकाया ही है. कीमतों ने कई बार अपना बनाया खुद का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. ऐसे में निवेशकों के लिए यह सुखद पल रहा. मगर जिनको शादी ब्याह के लिए चांदी खरीदनी पड़ी या पड़ रही है उनके हालात खराब हैं. लेकिन इन तेजी के बीच एक फैक्ट है जो आपको जानना चाहिए कि भारत में चांदी पड़ोसी देश चीन के मुकाबले सस्ती है. चांदी के दाम भारत 17 फीसदी कम है. जी हां, यह सही बात है आइए आपको इसके पीछे का कारण डेटा के साथ बताते हैं.

चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. इंटरनेशनल मार्केट में चांदी 109 डॉलर प्रति औंस से ऊपर कारोबार कर रही है. साल 2026 में अब तक चांदी के दाम करीब 44 फीसदी बढ़ चुके हैं, जबकि पिछले 12 महीनों में इसमें 250 फीसदी से ज्यादा की जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. चीन में चांदी इंटरनेशनल रेट से भी ज्यादा महंगे दाम पर बिक रही है, जहां 1 औंस चांदी लगभग 125 डॉलर तक पहुंच गई है.

भारत में सस्ती है चांदी

अगर भारत से तुलना करें तो यहां चांदी अभी भी सस्ती है. भारत में चांदी का भाव करीब 335 रुपये प्रति ग्राम है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। 1 औंस यानी लगभग 28.3 ग्राम के हिसाब से भारत में 1 औंस चांदी की कीमत करीब 9,984 रुपये बैठती है, जबकि चीन में यही चांदी लगभग 11,450 रुपये की पड़ रही है. इस तरह भारत और चीन में चांदी की कीमत में करीब 2,000 रुपये का अंतर है, यानी भारत में चांदी लगभग 17 फीसदी सस्ती है.

चांदी में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल सप्लाई की कमी है. इसके साथ ही चीन की नई पॉलिसी ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है. चीन ने 1 जनवरी 2026 से चांदी के एक्सपोर्ट पर सख्ती कर दी है. अब कंपनियों को चांदी निर्यात करने के लिए सरकारी लाइसेंस लेना होगा और यह नियम 2027 तक लागू रहेगा. इसका असर यह होगा कि सिर्फ बड़ी और सरकार से मंजूर कंपनियां ही एक्सपोर्ट कर पाएंगी, जबकि छोटे निर्यातक बाहर हो सकते हैं.

चांदी और चीन

दुनिया की चांदी की सप्लाई में चीन की अहम भूमिका है. ग्लोबल सप्लाई का 65 फीसदी से ज्यादा हिस्सा चीन से आता है. चीन न सिर्फ चांदी का सबसे बड़ा ट्रेडिंग मार्केट है, बल्कि दूसरा सबसे बड़ा फैब्रिकेटर भी है. ऐसे में चीन द्वारा एक्सपोर्ट सीमित किए जाने से इंटरनेशनल मार्केट में चांदी की उपलब्धता घट सकती है और कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

इसके अलावा फरवरी 2026 में शुरू होने वाली चीन की लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों का भी असर बाजार पर पड़ सकता है. 17 फरवरी से शुरू होकर करीब एक हफ्ते चलने वाली इन छुट्टियों से पहले लोग चांदी का स्टॉक करना शुरू कर देते हैं. इससे मांग बढ़ती है और कीमतों पर दबाव बनता है. मौजूदा समय में चीन में चांदी का स्टॉक पहले से ही कम है और प्रीमियम ऊंचा है, ऐसे में इसका असर ग्लोबल चांदी बाजार पर साफ तौर पर दिखाई दे सकता है.

Budget 2026:

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