शहर में हर कोई अपना खुद का घर खरीदना चाहता है, लेकिन घर खरीदना एक बड़ा काम होता है. कई बार लोग कुछ गलतियों की वजह से नुकसान कर बैठते हैं. दरअसल, एक परिवार को फ्लैट मिलने में दो साल से ज्यादा की देरी हुई, लेकिन इसके बावजूद उसे बिल्डर से मुआवजा नहीं मिल सका. इसकी वजह फ्लैट का पजेशन लेते समय की गई एक बड़ी चूक बताई गई.

मामला मुंबई के करीब 1.05 करोड़ रुपये के फ्लैट से जुड़ा है. परिवार ने 25 फरवरी 2022 को बिल्डर के साथ सेल एग्रीमेंट किया था. समझौते के मुताबिक फ्लैट का पजेशन 30 जून 2022 तक दिया जाना था. हालांकि, परिवार को फ्लैट का पजेशन 15 मार्च 2025 को मिला. यानी पजेशन मिलने में दो साल से ज्यादा की देरी हुई. यानी परिवार को देर से पजेशन देने लिए मुआवजा मिलता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

पजेशन लेते समय नहीं जताई आपत्ति

परिवार ने देरी को लेकर बाद में MahaRERA में शिकायत दर्ज कराई और मुआवजे की मांग की. परिवार का कहना था कि देरी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी हुई. उन्होंने अपनी ओर से किए गए भुगतान पर 18 फीसदी सालाना ब्याज की मांग की थी. परिवार के मुताबिक, यह रकम 15 मार्च 2025 तक के लिए करीब 50.6 लाख रुपये बनती थी. लेकिन अथॉरिटी ने परिवार को मुआवजा दिलाने से इनकार कर दिया है. इसकी वजह परिवार की ओर से कई गई एक गलती थी.

समय दर्ज नहीं कराई शिकायत

दरअसल, MahaRERA के सामने सबसे अहम बात यह रही कि परिवार ने पजेशन लेते समय देरी के खिलाफ कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी. न ही उन्होंने पजेशन लेते समय कोई औपचारिक विरोध दर्ज कराया. रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार ने 10 मार्च 2025 को भी बिल्डर को भुगतान किया था, लेकिन बिल्डर ने कथित तौर पर उसकी रसीद नहीं दी. इसके कुछ दिन बाद 15 मार्च को परिवार ने फ्लैट का पजेशन ले लिया. बिल्डर ने अब तक औपचारिक पजेशन लेटर भी जारी नहीं किया था.

बाद में मुआवजे की मांग नहीं मानी

MahaRERA ने कहा कि देरी से जुड़ी शिकायत पजेशन स्वीकार करने के बाद काफी देर से नहीं उठाई जा सकती. अथॉरिटी के अनुसार, घर खरीदार को पजेशन पूरा होने और उसे स्वीकार करने से पहले ही अपनी आपत्ति दर्ज करनी चाहिए थी. परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि बिल्डर ने सेल एग्रीमेंट में बताए गए सभी कॉमन एरिया और सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं. लेकिन MahaRERA के सामने परिवार इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त फोटो, दस्तावेज या अन्य सबूत पेश नहीं कर सका. इसलिए इस आधार पर भी परिवार को राहत नहीं मिली.

घर खरीदारों के लिए क्या सीख?

इस मामले से घर खरीदारों को एक अहम सबक मिलता है. अगर बिल्डर फ्लैट देने में देरी करता है और खरीदार मुआवजा या ब्याज मांगना चाहता है, तो पजेशन लेते समय अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज कराना बेहद जरूरी हो सकता है. पजेशन से जुड़े दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें, सभी कमियों की फोटो और वीडियो रखें और बिल्डर को लिखित शिकायत दें. भुगतान की रसीदें और दूसरे जरूरी दस्तावेज भी संभालकर रखें. किसी कानूनी विवाद की स्थिति में यही रिकॉर्ड आपके काम आते हैं.