हिमाचली खबर: देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और इनके काटने की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश नहीं बदलेगा. इनके हमले चिंताजनक हैं. नगर निगम आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और टीकाकरण करेगा. रैबीज संक्रमित खूंखार कुत्ते वापस नहीं छोड़े जाएंगे. खतरनाक व्यवहार वाले कुत्तों के लिए अलग से शेल्टर होम तैयार किया जाए और खुली जगहों पर आवारा कुत्तों को खाना नहीं खिलाया जा सकता. यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आवारा कुत्तों के लिए राष्ट्रीय नीति बनाई जाए.

Stray Dogs Case Verdict: न UP, न गुजरात, किस राज्य में कुत्तों के काटने के सबसे ज्यादा मामले? SC ने सुनाया फैसला​
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अब तक सबसे बड़ा सवाल उठा था कि आवारा कुत्तों के हमले से किसी को चोट लगती है या मौत होती है तो जिम्मेदार कौन होगा, उस क्षेत्र का नगर निकाय या कुत्तों को खाना खिलाने वाले? कोर्ट इसलिए भी ऐसे मामलों को लेकर सख्त है क्योंकि घटनाओं को ग्राफ थम नहीं रहा. सिर्फ 2024 में ही आवारा कुत्तों के काटने के 37 लाख मामले सामने आए.

कितने बढ़े कुत्तों के काटने के मामले?

पिछले 3 सालों का रिकॉर्ड देखें तो साफ पता चलता है कि देश में कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़े हैं. साल 2022 में कुत्तों के काटने की 21,89,909 घटनाएं हुईं. 2023 में बढ़कर उनका ग्राफ 30,52,521 तक पहुंचा. वहीं 2024 में कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई और 37 लाख से अधिक मामले सामने आए. आंकड़ों का ग्राफ बताता है कि देश में ऐसे मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. अगर 2025 में सिर्फ जनवरी महीने की बात करें तो सवा चार लाख से अधिक केस सामने आए.

कुत्तों के काटने के मामले घट नहीं रहे.

2024 के आंकड़ों को देखें तो महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कुत्तों का आतंक रहा है. यहां सबसे ज्यादा4,85,345 मामले सामने आए. कुत्तों के काटने के 4,80,427 मामलों के साथ तमिलनाडु दूसरे पायदान पर और गुजरात तीसरे पायदान पर रहा. यहां3,92,837 मामले रहे. कर्नाटक चौथे और बिहार पांचवे नम्बर पर है.

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दर्ज किए गए कुत्ते के काटने के मामले