बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को वर्ष 202526 के दौरान मार्च, 2026 के तीसरे एवं चौथे सप्ताह में आए आंधीतूफान, असामयिक वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करते हुए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत 3.96 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से 200 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि ऑनलाइन हस्तांतरित की.

मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण असामयिक वर्षा, आंधीतूफान और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित किसानों को अपने संसाधनों से हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रही है.

13 जिलों की फसल हुई थी खराब

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि इनपुट अनुदान योजना केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि किसानों में आत्मविश्वास और स्थिरता का संचार करने का भी माध्यम है. उन्होंने बताया कि मार्च, 2026 में आई प्राकृतिक आपदा से राज्य के 13 जिलों—सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मधेपुरा, अररिया, बेगूसराय, पूर्णिया, दरभंगा, किशनगंज, खगड़िया, मधुबनी, सुपौल और भागलपुर—में 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी. मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रभावित किसानों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए तथा कृषि विभाग के अनुरोध पर अतिरिक्त 60.71 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई. इस प्रकार किसानों की सहायता के लिए कुल 260.71 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के सशक्तीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. दो दिन पूर्व प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि किसानों के खातों में हस्तांतरित की गई है. उन्होंने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान की भरपाई में सहायता मिलती है.

प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने तथा प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि यह सहायता राशि प्रभावित किसानों को दोबारा खेतीकिसानी के कार्यों में संबल प्रदान करेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक की और राज्य में चीनी उद्योग के पुनरुद्धार, निवेश को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकारियों को निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि बिहार में गन्ना आधारित उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं. राज्य की बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनर्जीवन और नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए. मुख्यमंत्री ने रैयाम, सकरी, सासामुसा, मधौरा, मोतीपुर, समस्तीपुर, चकिया, चनपटिया और मोतिहारी सहित बंद चीनी मिलों वाले क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए तेजी से काम करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और किसानों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा.

गन्ना उत्पादन बढ़ाने पर जोर

उन्होंने कहा कि चंपारण क्षेत्र को देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन क्षेत्रों में विकसित करने के लिए विभाग विशेष कार्ययोजना बनाकर तेजी से काम करे. गन्ना उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार लाने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति2026 के तहत अधिकाधिक निवेश आकर्षित करने, निवेशकों को प्रोत्साहित करने और चीनी उद्योग के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि, औद्योगिक विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा गन्ना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी.