फिल्म में सिर्फ ऐतिहासिक कहानी है, बांटने वाली नहीं…AR रहमान के आरोपों पर ‘छावा’ के मेकर्स ने तोड़ी चुप्पी

Chhawa Movie Rishi Virmani Ar Rahman Controversy After Response

AR Rahman Divisive Comment: विक्की कौशल स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘छावा’ बॉक्स ऑफिस पर रिलीज के समय ही विवादों में रही थी। बीते दिनों म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने फिल्म को ‘बांटने वाली’ बताया था, जिसके बाद सोशल मीडिया और मीडिया में आलोचनाओं की बाढ़ आ गई थी। अब इस पूरे विवाद पर फिल्म के राइटर ऋषि विरमानी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

ऋषि विरमानी ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि फिल्म समाज में फूट डालने का काम कर रही है। उनका कहना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम है और यह लोगों की पुरानी सोच को रातों-रात बदल नहीं सकता।

ऋषि विरमानी ने रखा अपना पक्ष

Zoom को दिए इंटरव्यू में ऋषि विरमानी ने स्पष्ट किया कि फिल्म नफरत या बंटवारे को बढ़ावा नहीं देती। उन्होंने कहा, “यह यकीन करना बेहद मुश्किल है कि कुछ घंटों का स्क्रीन टाइम किसी इंसान की पूरी विचारधारा या सोच बदल सकता है। दर्शक बहुत समझदार हैं और वे अपनी स्वतंत्र सोच रखते हैं।” विरमानी ने यह भी कहा कि दर्शकों ने फिल्म को जिस तरह का रिस्पॉन्स दिया है, वैसा जुड़ाव उन्होंने लंबे समय से किसी फिल्म के लिए नहीं देखा।

ऋषि विरमानी ने आगे कहा कि संभाजी महाराज एक ऐसी ऐतिहासिक शख्सियत हैं, जो सिनेमाई पहचान के हकदार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फिल्म न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी लोगों के दिलों में जगह बनाएगी और संभाजी महाराज के बलिदान की कहानी हर घर तक पहुंचेगी।

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एआर रहमान की प्रतिक्रिया

विवाद की शुरुआत बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए के इंटरव्यू से हुई थी। उनसे पूछा गया था कि क्या बॉलीवुड में तमिल कंपोजर होने के नाते उन्होंने कभी भेदभाव का सामना किया। इस पर रहमान ने कहा कि पिछले आठ सालों में पावर शिफ्ट होने की वजह से कुछ बदलाव आए हैं और अब पावर उन लोगों के हाथ में है जो क्रिएटिव नहीं हैं। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। उन्होंने इस फिल्म की आलोचना करते हुए इसे बांटने वाली फिल्म भी बताया। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस फिल्म का म्यूजिक उन्हीं ने दिया था।

फिलहाल, ऋषि विरमानी के जवाब ने इस विवाद पर नया नजरिया दिया है और यह साफ कर दिया कि फिल्म का मकसद केवल ऐतिहासिक कहानी दिखाना और मनोरंजन करना है, न कि समाज में फूट डालना।

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