फिल्मी दुनिया के दिग्गज डायरेक्टर रहे सत्यजीत रे की आज जयंती है और इस खास दिन पर ही उनका जन्म हुआ था।  उनका निधन साल 1992 में हो गया था। लेकिन कला के इस पुजारी की कलाकृतियां आज भी लोगों को प्रेरणा देती हैं। आज ही के दिन 1921 में कोलकाता में जन्मे सत्यजीत रे के पिता एक जाने माने राइटर हुआ करते थे। सत्यजीत ने अपना बचपन कोलकाता जैसे खूबसूरत शहर में बिताया और प्रेसिडेंसी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद विश्व भारती विश्वविद्यालय से भी पढ़ाई की थी। इसके बाद सत्यजीत रे अपनी आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले गए। 

कोलकाता में जन्मा कला का पुजारी, जिसको सलाम ठोकते थे हॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर, आज भी अमर है फिल्में
कोलकाता में जन्मा कला का पुजारी, जिसको सलाम ठोकते थे हॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर, आज भी अमर है फिल्में

विज्ञापन एजेंसी में किया काम

सत्यजीत रे ने फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले एक ब्रिटिश विज्ञापन एजेंसी में काम किया था। 1950 में इस एजेंसी के साथ लंदन में बिताए 6 महीने में ही उनके मन में फिल्म मेकिंग को लेकर दिलचस्पी जागी। इसी दौरान उन्होंने बाइसिकल थीफ नाम की फिल्म देखी जिसने उनकी जिंदगी पर गहरा असर डाला। इसके बाद 1955 में सत्यजीत रे ने ‘पाथेर पांचाली’ नाम की फिल्म बनाई। इस फिल्म ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में नाम कमाया। इस फिल्म को भारतीय सिनेमा के लिए ऐतिहासिक भी माना जाता है। 

अप्पू ट्राइलॉजी ने दिलाई शोहरत

सत्यजीत रे ने अपने करियर में 36 फिल्मों का डायरेक्शन किया है। इसमें से अप्पू ट्रॉयलॉजी की कहानियां आज भी लोगों को याद हैं। उनकी फिल्मों को भारतीय सिनेमा का आईना कहा जाता है। सत्यजीत रे की फिल्में ऐज भी सिनेमाई दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती हैं। ये भारत के उन चंद डायरेक्टर्स में से एक हैं जिन्हें दुनिया के दिग्गज फिल्म मेकर्स सलाम ठोका करते थे। 

मौत के ठीक पहले मिला था ऑस्कर

सत्यजीत रे को गुजरे हुए आज कई साल बीत गए हैं लेकिन उनका काम आज भी लोगों को उनकी मौजूदगी का एहसास दिलाती रहती है। उन्हें कई खिताबों से सम्मानित किया जा चुका है। भारत रत्न से लेकर फ्रांस के ऑनर तक से सत्यजीत रे को सम्मानित किया जा चुका है। खास बात ये है कि उन्हें मौत से ठीक पहले ऑस्कर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।