हिमाचली खबर: क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो रोजाना महंगी और अच्छी सनस्क्रीन लगाते हैं, लेकिन इसके बाद भी आपकी स्किन पर टैनिंग हो जाती है। तो गलती सनस्क्रीन की नहीं आपकी अधूरी जानकारी की है। सूरज की हानिकारक किरणों से त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन लगाई जाती है। यह न केवल स्किन को डैमेज होने से बचाती है बल्कि टैनिंग से रोकती है।

कई लोग गर्मियों में नियमित रूप से सनस्क्रीन लगाते हैं, फिर भी उनकी त्वचा टैन हो जाती है। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि जब सनस्क्रीन लगाया था, तो टैनिंग हुई कैसे? दरअसल, इसके पीछे कई कई कारण हो सकते हैं। सिर्फ सनस्क्रीन लगाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसका सही चुनाव और सही इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है।
क्या है होती टैनिंग ?
सबसे पहले तो आप यह समझिए कि टैनिंग होती क्या है। टैनिंग त्वचा की एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया है। जब त्वचा सूर्य की पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आती है, तो त्वचा की कोशिकाएं मेलानिन नामक पिगमेंट अधिक मात्रा में बनाने लगती हैं। मेलानिन त्वचा को UV किरणों से बचाने की कोशिश करता है, जिससे त्वचा का रंग गहरा दिखाई देने लगता है। इसी प्रक्रिया को टैनिंग कहा जाता है।
अब जानें सनस्क्रीन लगाने के बाद भी क्यों हो जाती है टैनिंग
सनस्क्रीन 100% सुरक्षा नहीं देता
बहुत से लोग सोचते हैं कि SPF 50 या SPF 60 वाली सनस्क्रीन लगाने के बाद धूप का कोई असर नहीं होगा। वास्तव में कोई भी सनस्क्रीन UV किरणों को पूरी तरह नहीं रोक सकती। जैसे SPF 30 लगभग 97% UVB किरणों को रोकता है। वहीं SPF 50 लगभग 98% UVB किरणों को रोकता है।यानी थोड़ी मात्रा में किरणें त्वचा तक पहुंच ही जाती हैं, जिससे टैनिंग हो सकती है।
सही मात्रा में सनस्क्रीन नहीं लगाना
बहुत सारे लोगों को यही पता नहीं होता है कि उन्हें कितनी सनस्क्रीन लगानी है। अधिकांश लोग चेहरे पर बहुत कम मात्रा में सनस्क्रीन लगाते हैं। कम मात्रा लगाने पर SPF की प्रभावशीलता घट सकती है।
बारबार सनस्क्रीन नहीं लगाना
पसीना, पानी, चेहरे को बारबार पोंछना और त्वचा का प्राकृतिक तेल सनस्क्रीन की परत को कम कर सकता है। अगर आप लंबे समय तक बाहर रहते हैं, तो 23 घंटे के अंतराल पर सनस्क्रीन दोबारा लगाना जरूरी हो सकता है।
UVA किरणों से पर्याप्त सुरक्षा न मिलना
धूप में दो प्रकार की प्रमुख UV किरणें होती हैं। पहली UVB, यह सनबर्न के लिए जिम्मेदार होती है। वहीं UVA, यह त्वचा की गहराई तक पहुंचकर टैनिंग और फोटोएजिंग का कारण बन सकती हैं। कई लोग केवल SPF देखते हैं, लेकिन यह नहीं देखते कि सनस्क्रीन Broad Spectrum है या नहीं। यदि UVA सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, तो टैनिंग हो सकती है।
लंबे समय तक धूप में रहना
दोपहर 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच UV इंडेक्स सबसे अधिक होता है। इस दौरान लगातार धूप में रहने पर सनस्क्रीन की सुरक्षा भी सीमित हो सकती है।
खिड़की और बादलों के बावजूद UV किरणें पहुंचना
बहुत से लोगों को लगता है कि केवल सीधे धूप में रहने से ही टैनिंग होती है। लेकिन UVA किरणें बादलों और कांच से भी काफी हद तक गुजर सकती हैं। यही कारण है कि कार चलाते समय या खिड़की के पास बैठने पर भी धीरेधीरे टैनिंग हो सकती है।
टैनिंग से बचने के लिए क्या करें?
सही सनस्क्रीन चुनें। कम से कम SPF 30 या उससे अधिक चुनें।
Broad Spectrum सनस्क्रीन का उपयोग करें।
गर्मियों में वाटररेसिस्टेंट विकल्प बेहतर हो सकते हैं।
चेहरे और गर्दन के लिए लगभग दो उंगलियों के बराबर सनस्क्रीन का नियम अपनाया जा सकता है।
कान, गर्दन और हाथों को न भूलें। बाहर रहने पर हर 23 घंटे में दोबारा लगाएं।
ज्यादा पसीना आने या तैराकी के बाद दोबारा लगाएं। साथ ही फिजिकल प्रोटेक्शन अपनाएं।
सनस्क्रीन टैनिंग के जोखिम को कम कर सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देती। टैनिंग अक्सर गलत मात्रा में सनस्क्रीन लगाने, समय पर दोबारा न लगाने, लंबे समय तक धूप में रहने या UVA सुरक्षा की कमी के कारण हो सकती है। इसलिए बेहतर सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन के साथ टोपी, कपड़े और धूप से बचाव के अन्य उपायों को भी अपनाना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि आप लगातार टैनिंग, सनबर्न, त्वचा में जलन, एलर्जी या किसी अन्य त्वचा संबंधी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित रहेगा।



