एविएशन सेक्टर में इस वक्त भारी उथलपुथल मची हुई है. दुनिया भर में चल रहे भूराजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद का सीधा असर अब भारतीय शेयर बाजार और आम मुसाफिरों की जेब पर पड़ने लगा है. इसी उठापटक के बीच, विदेशी ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो के शेयरों की रेटिंग घटा दी है.

इंडिगो के शेयरों में ‘टर्बुलेंस’! UBS ने घटाया टारगेट प्राइस
इंडिगो के शेयरों में ‘टर्बुलेंस’! UBS ने घटाया टारगेट प्राइस

क्यों गिरा इंडिगो का टारगेट प्राइस?

यूबीएस ने अपनी रिपोर्ट में इंडिगो के शेयर को ‘बाय’ से हटाकर ‘न्यूट्रल’ कैटेगरी में डाल दिया है. इसके साथ ही, शेयर का लक्ष्य मूल्य भी 5,480 रुपये से घटाकर 4,940 रुपये कर दिया गया है. इस कटौती के पीछे सबसे बड़ी वजह है एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी हवाई ईंधन की आसमान छूती कीमतें. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. अमेरिकाईरान संघर्ष के कारण सप्लाई को लेकर गहरी चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे जेट फ्यूल की हाजिर कीमतों में लगभग दोगुना इजाफा हो चुका है.

ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगर क्रूड 200 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो एयरलाइंस के मुनाफे पर भारी दबाव पड़ेगा. इसी को देखते हुए यूबीएस ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए ईंधन लागत के अनुमान में क्रमश: 28% और 30% की भारी बढ़ोतरी कर दी है.

मुसाफिर कैसे हो रहे प्रभावित?

जब एयरलाइंस का खर्च बढ़ता है, तो उसका बोझ आखिर में यात्रियों की जेब पर ही पड़ता है. अप्रैल के महीने में भारतीय उड्डयन बाजार में मांग में सुस्ती के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं. हवाई किराए में हुई हालिया बढ़ोतरी की वजह से यात्रियों की संख्या में मासिक और सालाना, दोनों आधार पर गिरावट दर्ज की गई है.

हालांकि, राहत की बात यह रही कि भारत में अप्रैल 2026 के लिए एटीएफ की कीमतों में सिर्फ 9% की बढ़ोतरी की गई, जबकि मार्च में ग्लोबल स्तर पर इसमें 115% का बेतहाशा उछाल आया था. इसके बावजूद, ब्रोकरेज का मानना है कि फ्यूल सरचार्ज बढ़ने से रेवेन्यू पैसेंजर किलोमीटर की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ने की आशंका है. साफ शब्दों में कहें तो, महंगे टिकटों के कारण आम आदमी अपने हवाई सफर के प्लान टाल रहा है.

शेयर का क्या है हाल?

इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, बाजार में सोमवार, 27 अप्रैल को इंडिगो के शेयरों ने शुरुआती झटके के बाद अच्छी रिकवरी दिखाई और यह 1.4% चढ़कर दिन के उच्चतम स्तर 4,571 रुपये तक पहुंच गया. यूबीएस ने भी अपनी रिपोर्ट में यह साफ किया है कि मजबूत कैश रिज़र्व और बड़े नेटवर्क के कारण इंडिगो अन्य प्रतिद्वंद्वी एयरलाइंस के मुकाबले कहीं बेहतर स्थिति में है. लेकिन बढ़ते खर्च और रुपये की कमजोरी के चलते शेयर का हालिया प्रदर्शन अब थोड़ा कमजोर नजर आने लगा है.

अगर शेयर के पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो इसने अगस्त 2025 में 6,225.05 रुपये का 52हफ्तों का उच्चतम स्तर छुआ था, जबकि मार्च 2026 में यह लुढ़ककर 3,894.80 रुपये के निचले स्तर पर आ गया था. पिछले एक साल में इस स्टॉक में 15% और पिछले तीन महीनों में 5% की गिरावट आई है, हालांकि पिछले एक महीने में इसने 10% की बढ़त भी हासिल की. अब शेयर बाजार और निवेशकों की निगाहें कल, यानी 28 अप्रैल 2026 को आने वाले इंडिगो के मार्च तिमाही के नतीजों पर टिकी हैं.