हिमाचली खबर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर शहर के महुआबाग स्थित माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी और उनके परिवार से जुड़े चर्चित गजल होटल को लेकर कानूनी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहले मोती वर्मा ने होटल की जमीन पर अपना दावा ठोका था, अब टेढ़ी बाजार निवासी अभिषेक अग्रवाल भी कोर्ट पहुंच गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि दोनों दावेदार एक ही जमीन को अपनी बता रहे हैं, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।

मुख्तार अंसारी के 'गजल होटल' के दो दावेदार, स्वामित्व को लेकर छिड़ी जंग, कोर्ट साबित करेगा मालिकाना हक, जानिए मामला​
मुख्तार अंसारी के 'गजल होटल' के दो दावेदार, स्वामित्व को लेकर छिड़ी जंग, कोर्ट साबित करेगा मालिकाना हक, जानिए मामला​

शनिवार को एमपीएमएलए कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अभिषेक अग्रवाल ने प्रार्थना पत्र दाखिल कर दावा किया कि जिस जमीन पर गजल होटल बना है, उसका वास्तविक स्वामित्व उनके परिवार का है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी ने जमीन पर कब्जा कर होटल का निर्माण कराया था।

जमीन का असली मालिक कौन?

अब सवाल यह है कि आखिर गजल होटल की जमीन का असली मालिक कौन है? यही सवाल आने वाले दिनों में अदालत के सामने सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाला है।

पहले मोती वर्मा ने किया था दावा

गजल होटल विवाद में पहला बड़ा मोड़ तब आया था, जब 28 अप्रैल 2026 को मोती वर्मा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने भी दावा किया था कि होटल जिस जमीन पर बना है, वह उनकी संपत्ति है और उस पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया।

मोती वर्मा के दावे पर कानूनी प्रक्रिया चल ही रही थी कि अब अभिषेक अग्रवाल भी सामने आ गए हैं। ऐसे में एक ही संपत्ति पर दो अलगअलग व्यक्तियों के स्वामित्व दावे ने मामले को और जटिल बना दिया है।

कोर्ट में क्या हुआ?

शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान विधायक अब्बास अंसारी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत से समय मांगा। इसी दौरान अभिषेक अग्रवाल की तरफ से उनके वकील ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि होटल की जमीन उनके परिवार की है और उस पर जबरन कब्जा किया गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एमपीएमएलए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय कर दी।

क्यों चर्चा में रहता है गजल होटल?

गाजीपुर का गजल होटल लंबे समय से चर्चाओं में रहा है। मुख्तार अंसारी परिवार से जुड़े होने के कारण यह संपत्ति कई बार जांच एजेंसियों और प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में भी आ चुकी है। होटल और उससे जुड़ी जमीन को लेकर समयसमय पर विभिन्न दावे और कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं।

अब नए दावेदार के सामने आने के बाद मामला केवल कब्जे के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वामित्व निर्धारण की कानूनी लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है।

अब आगे क्या?

फिलहाल अदालत के सामने तीन बड़े सवाल हैं। 

  1. गजल होटल की जमीन का मूल स्वामी कौन है?
  2. दावेदारों के पास स्वामित्व साबित करने के लिए कौनकौन से दस्तावेज हैं?
  3. क्या जमीन पर कब्जे के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं?

इन सवालों के जवाब अदालत में पेश होने वाले दस्तावेजों और दलीलों से तय होंगे। फिलहाल इतना तय है कि एक होटल और दो दावेदारों ने गाजीपुर के इस पुराने विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

टाइमलाइन: गजल होटल विवाद

28 अप्रैल 2026: मोती वर्मा ने जमीन पर स्वामित्व का दावा करते हुए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया।

शनिवार को अभिषेक अग्रवाल ने भी जमीन अपनी बताते हुए दावा पेश किया।

सुनवाई के दौरान: अब्बास अंसारी पक्ष ने समय मांगा।

27 जून: मामले की अगली सुनवाई निर्धारित।

फिलहाल गजल होटल की जमीन पर मालिकाना हक का सवाल अदालत में है, लेकिन दोदो दावेदारों के सामने आने से यह मामला गाजीपुर की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाइयों में शामिल हो गया है।

शशि कांत तिवारी की रिपोर्ट