16 फरवरी को श्याम नगर चौकी के पास 24 लाख की लूट हुई. पीड़ित वासिद-अरशद पप्पू छुरी के लिए काम करते थे. लूट की जांच में पुलिस महफूज के खातों तक पहुंची तो ढाई साल में 1600 करोड़ के लेनदेन का पता चला. पूछताछ के लिए बुलाने पर फरार हो गया.

पुलिस की गिरफ्त में महफूज अली उर्फ पप्पू चुरी.
Kanpur Conman Mahfooz Ali: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने फर्जीवाड़े और आर्थिक अपराध की सारी हदें पार कर दी थीं. पुलिस ने अरबों रुपये के वित्तीय धोखाधड़ी मामले के मुख्य आरोपी महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी को जाजमऊ इलाके से गिरफ्तार कर लिया है. यह मामला सिर्फ करोड़ों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हवाला, जीएसटी चोरी जैसे गंभीर एंगल भी शामिल है.
महफूज अली का काम करने का तरीका जितना सरल था, उतना ही शातिर भी. वह कम पढ़े-लिखे मजदूरों, पेंटरों और कबाड़ियों को निशाना बनाता था. उनके पैन कार्ड और पहचान पत्रों (Aadhaar आदि) का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां बनाई जाती थीं. इस पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड फिरोज खान नाम का एक वकील बताया जा रहा है, जो इन फर्जी जीएसटी फर्मों को कानूनी और तकनीकी रूप से तैयार करवाता था.
श्याम नगर चौकी के पास 16 फरवरी को दो बाइकों पर सवार चार युवकों ने यशोदा नगर के वासिद और अरशद से 24 लाख रुपये की लूट की थी। दोनों जाजमऊ निवासी महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी के लिए काम करते थे। लूट की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस महफूज और उसके खातों तक पहुंची तो ढाई साल में 1600 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला.
ममता सरकार जाने के बाद कोलकाता से लौटा कानपुर
पुलिस ने पूछताछ के लिए उसे बुलाया तो वह फरार हो गया. फरारी के दौरान वह अपनी ससुराल कोलकाता पहुंचा, जहां एक तृणमूल कांग्रेस नेता की पनाह में था. पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजे सामने आने के बाद तृणमूल का प्रभाव खत्म हुआ तो महफूज ने खुद को बचाने के लिए मुखबिरों से बातचीत की. पुलिस अधिकारियों की मानें तो एक मुखबिर के आश्वासन पर वह कानपुर आया. इसी दौरान पुलिस ने उसे दबोच लिया.
करोड़ों का ट्रांजेक्शन कर रहा था पप्पू छुरी
जाजमऊ की रहने वाली आरती बेरोजगार हैं. वह मजदूरी कर जीवन यापन कर रही हैं. महफूज ने उसके नाम पर आरती इंटरप्राइजेज बनाकर करीब 100 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया. इसी तरह शहनवाज के नाम पर फर्जी आधार-पैन बनाकर राजा इंटरप्राइजेज के जरिए 64.44 करोड़ रुपये का लेनदेन किया. काशिफ और अल्फिशा के नाम पर बनाई गई फर्मों से 68.25 करोड़ और 133 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया गया.
कबाड़ी का काम करने वाले अजय शुक्ला के दस्तावेज लेकर मां विध्यवासिनी इंटरप्राइजेज के नाम से करीब 21 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया गया. वहीं, पेंटर निखिल कुमार के नाम पर रवि इंटरप्राइजेज बनाकर 7.75 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया था.
इन सभी लोगों को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनके खातों का इस्तेमाल करोड़ों के फर्जी ट्रांजेक्शन के लिए किया जा रहा था. जब पुलिस इन तक पहुंची, तो उनकी आर्थिक हालत देखकर खुद पुलिस भी हैरान रह गई.
16 बैंकों के 100 से ज्यादा खातों में 3200 करोड़ का ट्रांजेक्शन
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि पुलिस जांच में अब तक 16 बैंकों के 100 से ज्यादा खातों के जरिए 3200 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन सामने आया. इसमें स्लॉटर हाउस (बूचड़ खाना), जीएसटी धोखाधड़ी और हवाला के जरिए रकम घुमाने की बात सामने आई है. पुलिस ने मास्टरमाइंड महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी के साले महताब आलम और उसके बेटे मासूम को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था.
इस बड़े फर्जीवाड़े में टेरर फंडिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है. पुलिस के साथ अब प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग (IT) और रिजर्व बैंक (RBI) जैसी एजेंसियां भी मामले की जांच में शामिल हो गई हैं. पूरे नेटवर्क की परतें खंगाली जा रही हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे की संभावना है.



