बांसवाड़ा; राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक सरकारी शिक्षक को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। बागीदौरा ब्लॉक में कार्यरत शिक्षक लक्ष्मीनारायण रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे थे, लेकिन शिक्षा विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए 29 जून को तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी। खास बात यह है कि अगले ही दिन यानी 30 जून को उनका रिटायरमेंट होना था।

1992 की नियुक्ति पर उठा सवाल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लक्ष्मीनारायण की नियुक्ति साल 1992 में बागीदौरा ब्लॉक में हुई थी। करीब 34 साल तक सरकारी सेवा में रहने के बाद जांच में सामने आया कि नियुक्ति के समय उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़ा किया गया था।

फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी लेने का आरोप
मामले की शुरुआत राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायत से हुई। शिकायत मिलने के बाद जिला परिषद ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद दस्तावेजों की जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि लक्ष्मीनारायण ने सेकेंडरी, हायर सेकेंडरी और एसटीसी परीक्षा के दस्तावेज नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत किए थे, जिनकी सत्यता पर सवाल पाए गए।

थर्ड डिवीजन को बताया गया फर्स्ट डिवीजन
जांच के दौरान पता चला कि शिक्षक ने सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी परीक्षाएं थर्ड डिवीजन से पास की थीं। जबकि नौकरी के लिए जमा किए गए दस्तावेजों में उन्हें फर्स्ट डिवीजन बताया गया था। वहीं शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में एसटीसी परीक्षा से जुड़ा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं मिला।

29 जून को जारी हुआ बर्खास्तगी आदेश
जिला स्थापना समिति की बैठक में पूरे मामले पर चर्चा की गई। फर्जी दस्तावेजों की पुष्टि होने के बाद राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 91 के तहत कार्रवाई शुरू की गई। इसके बाद लक्ष्मीनारायण को 29 जून को राजकीय सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया।

जिला परिषद अधिकारियों ने बताया कि सरकारी सेवा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई है।