UP Politics: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव हैं। चुनावी लिहाज से राज्य के दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोट बैंक में अपनी पकड़ बढ़ाने के लिए आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना से लोकसभा सांसद 2 जून 2026 से प्रदेश भर में यात्रा शुरु करने वाले हैं। इसको लेकर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तैयारियों में जुटा हुआ है।

ASP के नेताओं ने बताया है कि चंद्रशेखर आजाद इस यात्रा के जरिए राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों को कवर करने वाले हैं। वे इस बार सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने वाले हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर ASP के प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ किशोर ने को बताया, “हम पूर्वांचल से शुरुआत करेंगे और हमारे नेता पूरे राज्य का दौरा करेंगे।”
100 सीटों पर EBC प्रत्याशी उतारने के ऐलान
आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने कहा कि पार्टी का चुनाव अभियान दलितों, मुसलमानों और अति पिछड़े वर्ग समूहों पर केंद्रित होगा। ASP इस बार के विधानसभा चुनाव में कम से कम 100 ईबीसी उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की योजना बना रही है। सूत्रों के अनुसार अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
एक अहम बात यह भी है कि ASP सामान्य सीटों पर भी 50 दलित उम्मीदवारों को भी उतारने की योजना बना रही है, जो विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक को करारा जवाब होगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि उन्होंने मंडल और बूथ स्तर तक सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक ढांचा तैयार कर लिया है।
सपाकांग्रेस में हलचल
चंद्र शेखर की लोकप्रियता और अब पार्टी का विस्तार करने की उनकी महत्वाकांक्षाओं ने समाजवादी पार्टी और का ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही, में समाजवादी पार्टी के कुछ सांसदों ने अध्यक्ष अखिलेश यादव से अपील की थी कि वे चंद्रशेखर से बातचीत शुरू करें, हालांकि अखिलेश ने अपने सांसदों के इस सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को ही टारगेट किया था।
अखिलेश यादव ने इसे पीडीए का फॉर्मूला बताया था। इसका पार्टी को फायदा भी मिला था। उस चुनाव में सपाकांग्रेस का गठबंधन हुआ था। सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थी, जबकि को यूपी में ही बड़ा नुकसान हुआ था। सपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं ने कहा कि इस पीडीए अभियान से उन्हें दलित वोट हासिल करने में मदद मिली लेकिन अब एएसपी विपक्ष के लिए खतरा बन गए हैं क्योंकि वे इन्हीं वोटों को विभाजित कर सकते हैं।
चंद्रशेखर बोले नहीं होते वोट ट्रांसफर
चंद्र शेखर ने बताया कि उनकी पार्टी से इंडिया ब्लॉक को नुकसान की चिंता है लेकिन ये सभी बेकार हैं। उन्होंने कहा, “विपक्ष कहां है? वे बंगाल, केरल, दिल्ली , हरियाणा में एकदूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं… हर कोई सत्ता की कुर्सी चाहता है। हमने 2022 और 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में एकजुट विपक्ष के लिए प्रयास किए। मुझे नहीं लगता कि सहयोगी दलों के बीच वोटों का ट्रांसफर होता है।”
चंद्रशेखर ने कहा, “2024 के बाद से कांग्रेस और सपा ने कितने उपचुनाव जीते हैं? राजनीति में कोई धन्यवाद नहीं कहता। जब किसी को आपकी ज़रूरत होती है, तभी मीठीमीठी बातें करते हैं। अगर किसी को भाजपा को हराने में हमारी मदद चाहिए, तो उन्हें आकर हमसे बात करनी चाहिए।”
बसपा का लगातार गिर रहा ग्राफ
गौर करने वाली बात यह भी है कि उत्तर प्रदेश में मायावती के नेतृत्व वाली बसपा का समर्थन लगातार गिर रहा है। साल 2017 में उसका वोट शेयर 22.23% से गिरकर 2022 में 12.88% हो गया। जाटवरविदासी दलितों की आबादी के लगभग समानुपातिक है, जो उसका मुख्य समर्थक आधार हैं। ऐसे में सपा और कांग्रेस से लेकर एएसपी तक सभी उस खाली जगह को भरने की कोशिश कर रहे हैं।
सपा और कांग्रेस दोनों ही दल डॉ. बी.आर. अंबेडकर और कांशी राम का जिक्र करते हुए दलितों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में दोनों पार्टियों ने 14 अप्रैल को अंबेडकर की जयंती पर राज्य भर में कार्यक्रम आयोजित किए। दलित वोटों के लिए मची इस होड़ में, एएसपी के नेताओं ने कहा कि वे सपाकांग्रेस गठबंधन को प्रभावित करेंगे और इंडिया ब्लॉक पर कड़ा प्रहार करेंगे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “हम जानते हैं कि हमें उच्च जाति के वोट नहीं मिल सकते, इसलिए हम उन्हें निशाना नहीं बनाएंगे। हमारे प्रयासों के बावजूद वे वोट बीजेपी को ही मिलेंगे। हमारा मुख्य ध्यान राज्य के दलित, मुस्लिम और ईबीसी समुदायों पर होगा।”
विपक्ष के लिए झटका हो सकती है ASP
राज्य कांग्रेस के नेताओं ने स्वीकार किया कि ASP विपक्षी गठबंधन के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “हम जानते हैं कि चंद्र शेखर एक लोकप्रिय नेता हैं। दोनों मुख्य विपक्षी दलों के पास दलित समुदाय से ऐसा कोई नेता नहीं है जो जनमानस जुटा सके। चंद्र शेखर का मतदाताओं और दलितों, विशेषकर दलित समुदाय के युवाओं पर निश्चित रूप से प्रभाव है।”
नगीना से लोकसभा सांसद की हाल ही में बाराबंकी समेत विभिन्न शहरों में हुई रैलियों में भारी भीड़ देखी गई। एक कांग्रेस सांसद ने कहा, “2024 में जब इंडिया ब्लॉक ने अच्छा प्रदर्शन किया था, तो इसका कारण यह था कि राहुल गांधी के नेतृत्व में संविधान पर खतरे के मुद्दे पर चलाए गए अभियान के चलते दलितों ने कांग्रेस और सपा को वोट दिया था लेकिन अब जब हमारे यहां एक दलित नेता चुनाव मैदान में उतरेंगे, तो यह वोटिंग ट्रेंड बदल सकता है।”
अखिलेश यादव लगातार कर रहे नजरंदाज
सपा चंद्र शेखर के संभावित प्रभाव से भी अवगत है और कुछ लोग उनसे बातचीत करने के पक्ष में हैं। हालांकि, अखिलेश समेत शीर्ष नेतृत्व गठबंधन के पक्ष में नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले सपाकांग्रेस और एएसपी के बीच चुनावपूर्व गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन यह साकार नहीं हो सका। चुनावों में चंद्र शेखर ने नगीना सीट 51.19% वोटों के साथ जीती, जबकि बीजेपी 36% वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। लेकिन इस एक चुनाव को छोड़कर, पार्टी अभी तक उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से अपनी पकड़ मजबूत नहीं कर पाई है।
साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में, एएसपी ने एआईएमआईएम और अन्य छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन में 110 सीटों पर चुनाव लड़ा और अपना खाता खोलने में विफल रही, सभी 110 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई और उसे इन सीटों पर नगण्य 0.47% वोट मिले थे।
में पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। दूसरे चरण के मतदान से पहले बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान के घर दबिश देने के बाद से उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।



