शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नशा तस्करी के एक बेहद शातिर और तकनीक आधारित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय ड्रग सप्लाई चेन का भंडाफोड़ किया है, जिसमें तस्कर चिट्टे की डिलीवरी के लिए कुरकुरे और दूध के खाली पैकेटों का इस्तेमाल कर रहे थे। खास बात यह रही कि इस पूरे नेटवर्क में सप्लायर और खरीदार का आमना-सामना तक नहीं होता था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी नशे की खेप को सीधे ग्राहक तक पहुंचाने के बजाय उसे सामान्य दिखने वाले दूध या कुरकुरे के पैकेटों में पैक कर शहर के अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रख देते थे। इसके बाद उन स्थानों की वीडियो रिकॉर्डिंग तैयार कर नेटवर्क संचालकों को भेजी जाती थी। जब ऑनलाइन भुगतान प्राप्त हो जाता था तो खरीदार को पैकेट की सटीक लोकेशन भेज दी जाती थी, जहां से वह नशा हासिल कर लेता था।

नशा विरोधी अभियान के तहत पुलिस थाना बालूगंज की टीम ने सबसे पहले एक आरोपी को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान पूरे नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं। जांच में बिहार के भोजपुर निवासी दो भाइयों की संलिप्तता सामने आई, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इनके जरिए पुलिस को सप्लाई चेन और नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले।

डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और मोबाइल डेटा के विश्लेषण के आधार पर पुलिस मुख्य सप्लायर तक पहुंचने में सफल रही। जांच के बाद मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी रवि अहिरवार को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में सक्रिय रहकर हिमाचल में नशे की आपूर्ति कर रहा था। उसे अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि शिमला के आईएसबीटी टूटीकंडी और आसपास के कई स्थानों को ड्रग डिलीवरी प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोपी पहले से तय स्थानों पर पैकेट रख देते थे और बाद में खरीदारों को लोकेशन भेज दी जाती थी। पूरी प्रक्रिया में ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल वीडियो और डिजिटल कम्युनिकेशन का उपयोग किया जाता था।

पुलिस को वित्तीय जांच में भी अहम जानकारी मिली है। प्रारंभिक जांच के अनुसार केवल तीन महीनों में इस नेटवर्क के जरिए करीब 1.25 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। अब पुलिस बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और अन्य आर्थिक गतिविधियों की जांच कर नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाने में जुटी हुई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशा तस्करों के खिलाफ अभियान के तहत अब केवल बरामदगी तक सीमित न रहकर सप्लाई चेन और उसके स्रोत तक पहुंचने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसी कड़ी में इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस का मानना है कि तकनीक और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर संचालित किए जा रहे ऐसे नेटवर्क कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं, लेकिन लगातार तकनीकी जांच और सतर्कता के जरिए इनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।