पति शराब पीता था, नौकरी छोड़ने का दबाव बनाता था और विवाद इतना बढ़ गया था कि बात तलाक तक पहुंच गई थी. यह दावा बिहार के नालंदा में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले में गिरफ्तार दरोगा पुष्पा कुमारी के पिता अरुण प्रजापति ने किया है. पिता के मुताबिक, शादी के बाद पुष्पा की जिंदगी में पारिवारिक तनाव बढ़ता गया. दूसरी ओर, अब सिपाही की मौत के मामले में उसकी गिरफ्तारी ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है. पिता अपनी बेटी को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

औरंगाबाद जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खखड़ा गांव की रहने वाली पुष्पा कुमारी की कहानी अब दो अलगअलग पहलुओं के कारण चर्चा में है. एक तरफ उसके पिता की ओर से सामने आया वैवाहिक विवाद है, तो दूसरी तरफ नालंदा में ड्यूटी के दौरान सिपाही अजीत कुमार की गोली लगने से हुई मौत और उसके बाद की पुलिस जांच. दोनों पहलुओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन शादीशुदा जिंदगी में तनाव और सिपाही की मौत के बीच किसी संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है.

पुष्पा के पिता अरुण प्रजापति के मुताबिक, वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी बेटी की शादी पुलिस सेवा में उनके साथ काम कर चुके एक दरोगा के बेटे से कराई थी. उन्होंने बताया कि शादी से पहले उनके बेटे ने इस रिश्ते पर आपत्ति जताई थी, लेकिन उन्होंने बेटे की बात नहीं मानी और शादी कर दी.

अरुण प्रजापति का आरोप है कि शादी के बाद दामाद शराब पीने लगा था. वह पुष्पा पर नौकरी छोड़ने का दबाव भी बनाता था. पिता के मुताबिक, इन्हीं बातों को लेकर पतिपत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया और स्थिति तलाक तक पहुंच गई. पिता के इस बयान ने पुष्पा की निजी जिंदगी में चल रहे तनाव को सामने ला दिया है.

पुष्पा तो ऐसी नहीं थी, मेरी बेटी को फंसाया गया

सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले में बेटी की गिरफ्तारी से परेशान अरुण प्रजापति का कहना है कि पुष्पा का स्वभाव हमेशा शांत रहा है. वह पढ़ाई पर ध्यान देती थी और परिवार में भी उसका किसी से विवाद नहीं होता था. उन्होंने अपनी बेटी पर लगे आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि पुष्पा ऐसा काम कैसे कर सकती है. उनका दावा है कि उनकी बेटी को साजिश के तहत फंसाया गया है.

अरुण प्रजापति खुद पुलिस सेवा में रह चुके हैं और पिछले साल सेवानिवृत्त हुए. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी नौकरी ईमानदारी से की और कभी कोई दाग नहीं लगने दिया. नालंदा जिले में भी उनकी पोस्टिंग रही थी. उनके मुताबिक, सात आईपीएस अधिकारियों के साथ काम करने के दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाईं.

पिता का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को भी हमेशा ईमानदारी से काम करने और सही रास्ते पर चलने की सीख दी. ऐसे में बेटी पर हत्या जैसे गंभीर मामले में शामिल होने का आरोप उनके लिए बेहद पीड़ादायक है.

अरुण प्रजापति ने कहा कि वह अपनी बेटी पर लगे आरोपों को समझना चाहते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है. उनके मुताबिक, पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बावजूद उन्हें बेटी से मिलने का मौका नहीं दिया गया.
उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी तथ्य सामने लाए जाएं. पिता का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि घटना की रात वास्तव में क्या हुआ था और पुष्पा की भूमिका क्या थी.

दादा बोले बचपन से सौम्य और शांत स्वभाव की थी पुष्पा

पुष्पा के दादा चंद्रिका प्रजापति ने भी अपनी पोती को शांत स्वभाव का बताया. उनके मुताबिक, बचपन से ही पुष्पा सौम्य थी. घर में उसका किसी से विवाद नहीं होता था और वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती थी. दादा ने बताया कि पुष्पा ने पहले बिहार पुलिस में सिपाही की नौकरी हासिल की थी. इसके बाद परीक्षा पास कर उत्पाद विभाग में दरोगा बनी. परिवार के लिए उसकी यह नौकरी उपलब्धि थी, लेकिन अब उस पर लगे गंभीर आरोपों से घर के लोग परेशान हैं.

अपनी पोती पर लगे आरोपों के बारे में बात करते हुए चंद्रिका प्रजापति भावुक हो गए. परिवार का कहना है कि पुष्पा को बचपन से जिस स्वभाव में देखा, उसके आधार पर उन्हें इन आरोपों पर भरोसा करना मुश्किल लग रहा है.

14 अक्टूबर की रात शराब लदे वाहन का पीछा, सिपाही को लगी गोली

नालंदा में सिपाही अजीत कुमार की मौत की घटना 14 अक्टूबर 2026 की रात की है. शराब लदे एक संदिग्ध पिकअप वाहन का पीछा करने के दौरान गोली चली और अजीत कुमार को गोली लग गई. उन्हें पहले पावापुरी स्थित अस्पताल ले जाया गया. हालत गंभीर होने पर पटना रेफर किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई.

शुरुआत में बताया गया कि शराब तस्करों की फायरिंग में अजीत कुमार को गोली लगी. लेकिन 16 अक्टूबर को नालंदा के एसपी हृदयकांत ने जांच के बाद बताया कि गोली शराब तस्करों की ओर से नहीं, बल्कि उत्पाद विभाग की टीम के साथ मौजूद होमगार्ड जवान की राइफल से चली थी.

पुलिस के अनुसार, टीम शराब लदे वाहन का पीछा कर रही थी. वाहन को रोकने के प्रयास के दौरान फायरिंग हुई और गोली आगे चल रहे विभागीय वाहन में मौजूद अजीत कुमार को लग गई. जांच में तीन राउंड फायरिंग की बात सामने आई, जिनमें दो राउंड मिसफायर हुए थे. गोली चलाने में इस्तेमाल राइफल को जब्त किए जाने की जानकारी भी दी गई.

घटना के बाद सूचना देने में देरी और सबूत छिपाने के आरोप

जांच में सिर्फ गोली चलने की परिस्थितियां ही नहीं, बल्कि घटना के बाद की गई कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आई. पुलिस के अनुसार, घटना की सूचना तत्काल स्थानीय थाने और वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई थी. बाद में अधिकारियों को बताया गया कि सिपाही शराब तस्करों की गोलीबारी में घायल हुआ है.

पुलिस ने यह भी कहा कि घटना से संबंधित वाहन को स्थानीय पुलिस के हवाले करने के बजाय पटना ले जाया गया. बाद में वाहन की जांच की गई और गोली लगने के निशान मिलने की जानकारी सामने आई. जांच एजेंसी को आशंका है कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने और साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी.

दरोगा पुष्पा समेत सात लोगों की गिरफ्तारी

इस मामले में दरोगा पुष्पा कुमारी समेत सात लोगों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई. गिरफ्तार लोगों में होमगार्ड जवान रिशु कुमार, दीनानाथ और सन्नी कुमार, उत्पाद सिपाही अनूप कुमार, निजी वाहन चालक गौरव उर्फ निशांत और शंकर कुमार शामिल है.

वही मृत सिपाही अजीत कुमार और पुष्पा कुमारी के बीच कथित नजदीकी या संबंधों को लेकर भी कुछ मीडिया रिपोर्टों में चर्चा हुई है. हालांकि, नालंदा के एसपी ने शुरुआती रिपोर्टों में ऐसे संबंधों की पुष्टि नहीं की थी और कहा था कि मामले की जांच जारी है. इसलिए इस चर्चा को प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा.