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नई दिल्ली/नेपाल बॉर्डर। नेपाल से भारत आने वाली कुछ युवतियों को कथित तौर पर पैसे के बदले संतान पैदा करने की व्यवस्था में शामिल किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। एक मीडिया हाउस की अंडरकवर पड़ताल में दावा किया गया है कि नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से आर्थिक रूप से कमजोर युवतियों से संपर्क किया जाता है और उन्हें भारत में ऐसे परिवारों तक पहुंचाया जाता है, जो संतान चाहते हैं।

शादी के बिना बच्चा पैदा कराने की कथित व्यवस्थाएक करोड़ रुपये तक की डील का दावानेपाल से भारत तक कैसे पहुंचती हैं युवतियां?20 से 25 लाख रुपये मिलने का दावा‘गोरा बच्चा’ चाहने की बात भी सामने आईक्या यह कानूनी सरोगेसी है?मानव तस्करी का भी उठ सकता है सवालबिचौलियों के नेटवर्क पर उठे सवालअब आधिकारिक जांच का इंतजार

रिपोर्ट में एक कथित सौदे की रकम एक करोड़ रुपये तक बताए जाने का दावा किया गया है। इसमें युवती को करीब 20 से 25 लाख रुपये दिए जाने और बाकी रकम कथित तौर पर बिचौलियों तथा नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच जाने की बात सामने आई है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुलिस या सरकारी जांच से पुष्टि अभी नहीं हुई है । इसलिए इस पूरे मामले को फिलहाल मीडिया पड़ताल में सामने आए आरोपों और दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

शादी के बिना बच्चा पैदा कराने की कथित व्यवस्था

पड़ताल के मुताबिक, कथित नेटवर्क में ऐसे लोगों से संपर्क किया जाता है जो किसी महिला के गर्भधारण नहीं कर पाने के कारण संतान चाहते हैं। दावा है कि कुछ मामलों में कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया के बजाय महिला को भारत लाकर गर्भधारण कराने की व्यवस्था की जाती है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ मामलों में युवती और संबंधित परिवार के बीच शादी नहीं होती, बल्कि केवल बच्चा पैदा करने के उद्देश्य से पूरी व्यवस्था की जाती है।

यदि ऐसा किसी महिला की सहमति के बिना, दबाव में या आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर किया जाता है, तो मामला बेहद गंभीर कानूनी और मानवाधिकार संबंधी सवाल खड़े कर सकता है।

एक करोड़ रुपये तक की डील का दावा

अंडरकवर बातचीत के दौरान कथित एजेंटों की ओर से एक मामले में करीब एक करोड़ रुपये तक की डील की जानकारी दिए जाने का दावा किया गया है।

बताया गया कि इस रकम में से युवती को लगभग 20 से 25 लाख रुपये मिल सकते हैं। बाकी रकम कथित तौर पर बिचौलियों और अन्य लोगों के बीच बांटे जाने की बात सामने आई है।

इस तरह की व्यवस्था में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वास्तव में इतना बड़ा आर्थिक लेन-देन हो रहा है, तो इसमें शामिल बिचौलियों का नेटवर्क कैसे काम करता है और महिलाओं की सुरक्षा तथा अधिकारों की निगरानी कौन करता है।

नेपाल से भारत तक कैसे पहुंचती हैं युवतियां?

मीडिया पड़ताल के अनुसार, कथित नेटवर्क में नेपाल के अलग-अलग इलाकों में संपर्क रखने वाले लोग शामिल हैं। ये लोग जरूरतमंद युवतियों की तलाश करते हैं और उन्हें बड़ी रकम मिलने का लालच देकर इस तरह की व्यवस्था के लिए तैयार करने का दावा किया गया है।

इसके बाद कथित तौर पर भारत में मौजूद संपर्कों के जरिए उन्हें संबंधित परिवारों तक पहुंचाया जाता है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ महिलाओं को गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक लंबे समय तक भारत में रखने की व्यवस्था की जाती है।

20 से 25 लाख रुपये मिलने का दावा

कथित नेटवर्क से जुड़ी बातचीत में युवती को 20 से 25 लाख रुपये दिए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह रकम बड़ी होती है, इसलिए बिचौलियों द्वारा इसी आर्थिक जरूरत का फायदा उठाए जाने की आशंका जताई गई है।

लेकिन किसी महिला को पैसे देकर गर्भधारण के लिए तैयार करना अपने आप में इस प्रक्रिया को कानूनी नहीं बना देता। मामले की वैधता इस बात पर निर्भर करेगी कि पूरी प्रक्रिया किस तरीके से हुई, महिला की सहमति क्या थी और कौन-कौन से कानून लागू होते हैं।

‘गोरा बच्चा’ चाहने की बात भी सामने आई

पड़ताल में यह दावा भी सामने आया कि कुछ लोग बच्चे की शारीरिक बनावट और रंग को लेकर विशेष पसंद रखते हैं और इसी वजह से नेपाली युवतियों की तलाश करते हैं।

हालांकि, यह बात स्पष्ट है कि बच्चे का रंग या शारीरिक विशेषताएं किसी सौदे के आधार पर सुनिश्चित नहीं की जा सकतीं। ऐसे दावे वैज्ञानिक रूप से निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं देते।

क्या यह कानूनी सरोगेसी है?

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है। भारत में सरोगेसी को लेकर कानून मौजूद है और व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध है। कानूनी सरोगेसी के लिए निर्धारित शर्तों और प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है।

इसलिए किसी महिला को सीमा पार से लाकर पैसे के बदले गर्भधारण कराने की कथित व्यवस्था को सामान्य कानूनी सरोगेसी मान लेना उचित नहीं होगा।

यदि इसमें बिचौलियों द्वारा महिलाओं की भर्ती, आवाजाही, आर्थिक शोषण या दबाव शामिल पाया जाता है, तो जांच का दायरा और भी बढ़ सकता है।

मानव तस्करी का भी उठ सकता है सवाल

यदि जांच में यह सामने आता है कि महिलाओं को लालच, दबाव, धोखे या उनकी कमजोर आर्थिक स्थिति का फायदा उठाकर सीमा पार ले जाया गया और उनका इस्तेमाल किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किया गया, तो मानव तस्करी से जुड़े कानूनों के तहत भी जांच की आवश्यकता हो सकती है।

हालांकि, इस मामले में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सामने आए आरोप मानव तस्करी की कानूनी परिभाषा में आते हैं। इसका निर्धारण संबंधित जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर करेंगी।

बिचौलियों के नेटवर्क पर उठे सवाल

पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका कथित बिचौलियों की बताई जा रही है। आरोप है कि ये लोग जरूरतमंद युवतियों और संतान की इच्छा रखने वाले परिवारों के बीच संपर्क स्थापित करते हैं।

मीडिया पड़ताल में कुछ कथित एजेंटों से बातचीत और पैसों से जुड़ी जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, संबंधित लोगों के खिलाफ किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा कार्रवाई या आरोपों की पुष्टि की आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं है।

अब आधिकारिक जांच का इंतजार

मामला सामने आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि संबंधित भारतीय और नेपाली एजेंसियां इन दावों की स्वतंत्र जांच करें। जांच में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि क्या वास्तव में सीमा पार से महिलाओं को इस तरह भारत लाया गया, कितनी महिलाएं इसमें शामिल हुईं और कथित आर्थिक लेन-देन किस माध्यम से हुआ।

साथ ही, यदि किसी महिला का शोषण हुआ है तो उसकी पहचान और सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी जरूरी होगा।

फिलहाल यह मामला एक मीडिया हाउस की अंडरकवर पड़ताल में सामने आए दावों पर आधारित है। Himachali Khabar इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक जांच या अदालत के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।