8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच फिटमेंट फैक्टर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि अब कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि केवल फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने से कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतें पूरी नहीं होंगी. उनका मानना है कि न्यूनतम वेतन तय करने में इस्तेमाल होने वाली फैमिली यूनिट की भी समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि मौजूदा समय की पारिवारिक जिम्मेदारियों को सही तरीके से शामिल किया जा सके.

7वें वेतन आयोग में 3.0 फैमिली यूनिट का था आधार
7वें वेतन आयोग ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 3.0 फैमिली यूनिट को आधार बनाया था. इसमें सरकारी कर्मचारी को 1.0 यूनिट, जीवनसाथी को 0.8 यूनिट, पहले बच्चे को 0.6 यूनिट और दूसरे बच्चे को 0.6 यूनिट माना गया था. इस तरह कुल फैमिली यूनिट 3.0 तय की गई थी.
हालांकि इस गणना में आश्रित मातापिता को शामिल नहीं किया गया था. आज के समय में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी अपने मातापिता की आर्थिक और चिकित्सा संबंधी जरूरतों की जिम्मेदारी भी निभाते हैं.
फैमिली यूनिट बढ़ाकर 4.6 से 5.0 करने की मांग
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि मौजूदा सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए फैमिली यूनिट को 3.0 से बढ़ाकर कम से कम 4.6 से 5.0 किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि इससे न्यूनतम वेतन का निर्धारण अधिक वास्तविक आधार पर होगा और कर्मचारियों की पारिवारिक जरूरतों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा.
विशेष रूप से आश्रित मातापिता, बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य खर्च और शिक्षा पर बढ़ते खर्च को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव जरूरी माना जा रहा है.
क्या होगा इसका असर?
अगर 8वां वेतन आयोग फैमिली यूनिट बढ़ाने की सिफारिश करता है, तो न्यूनतम वेतन की गणना पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. इससे फिटमेंट फैक्टर के अलावा बेसिक सैलरी तय करने का आधार भी बदल सकता है, जिसका लाभ लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिल सकता है.
हालांकि अभी तक सरकार या 8वें वेतन आयोग की ओर से फैमिली यूनिट बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा या सिफारिश नहीं की गई है. फिलहाल यह कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों की ओर से उठाई गई मांग है, जिस पर आयोग के गठन और सिफारिशों के दौरान विचार किया जा सकता है.



