आरबीआई ने 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट चलाने की तैयारी तेज कर दी है. पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है और करेंसी छापने वाली सब्सिडियरी कंपनी ने ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिया है. लेकिन इसके साथ ही लोगों के मन में कई सवाल हैं. यह नोट कैसे बनेगा, कितना पैसा बचेगा, आम आदमी को क्या फायदा होगा और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या पुराने कागज के नोट बंद हो जाएंगे? आइए हर सवाल का जवाब सिलसिलेवार समझते हैं. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। करेंसी छापने की लागत लगातार बढ़ रही है. साल 202425 में नोट छापने पर आरबीआई ने करीब 6,373 करोड़ रुपये खर्च किए, जो इससे पिछले साल के 5,101 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा था. हालांकि वित्त वर्ष 202526 में आरबीआई का नोट छपाई खर्च घटकर करीब 4,875 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 23.5 प्रतिशत कम है. इसके बावजूद पिछले पांच साल के आंकड़े देखें तो यह खर्च लगातार ऊपरनीचे होता रहा है.

दूसरी बड़ी वजह है नकदी की बढ़ती मांग और खराब होकर नष्ट किए जाने वाले नोटों की तादाद वित्त वर्ष 2025 में करीब 2,380 करोड़ गंदेफटे नोट नष्ट किए गए, जबकि इससे पिछले साल यह आंकड़ा 2,124 करोड़ था. वहीं, मई 2026 तक देश में चलन में मौजूद नकदी रिकॉर्ड 42.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, यानी डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद कैश की मांग कम नहीं हो रही. इसी वजह से आरबीआई पॉलीमर नोटों की तरफ लौटा है, क्योंकि यह कागज के नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ और सस्ता विकल्प साबित हो सकता है.
सवाल प्लास्टिक नोट कैसे बनता है और इसमें क्या खास है?
जवाब पॉलीमर नोट कागज नहीं बल्कि खास तरह की प्लास्टिक शीट से बनते हैं. भारत में करेंसी छापने वाली कंपनी BRBNMPL ने इसी सब्सट्रेट की खरीद के लिए ग्लोबल कंपनियों से टेंडर मंगाया है, जो इस दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है.
पॉलीमर नोटों की खासियतें
- ये कागज के नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना ज्यादा समय तक चल सकते हैं.
- ये पानी और फटने से ज्यादा सुरक्षित होते हैं और इन पर गंदगी भी कम जमती है.
- कई अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि इनकी सतह पर बैक्टीरिया कम टिकते हैं.
- इनमें लगी पारदर्शी खिड़की और एडवांस सिक्योरिटी फीचर इन्हें नकली बनाना बेहद मुश्किल बना देते हैं.
- ATM मशीनों को भी इन नोटों को डिस्पेंस करने के लिए तैयार किया जाएगा.
सवाल किन देशों में प्लास्टिक नोट चलते हैं?
जवाब दुनिया भर में 60 से ज्यादा देश पूरी तरह या आंशिक रूप से पॉलीमर नोट इस्तेमाल कर रहे हैं. 1988 में ऑस्ट्रेलिया 10 डॉलर के नोट के साथ ऐसा करने वाला पहला देश बना. इसके बाद कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम जैसे देशों ने भी प्लास्टिक करेंसी अपनाई. रोमानिया 1998 में यह कदम उठाने वाला पहला यूरोपीय देश था.
पूरी तरह प्लास्टिक नोट अपनाने वाले देश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, रोमानिया, वियतनाम, ब्रूनेई, पापुआ न्यू गिनी, मालदीव, मॉरिटानिया, निकारागुआ, वानुआतु, यूनाइटेड किंगडम, बारबाडोस और पूर्वी कैरिबियाई देश. 2026 में ओमान भी अपने 1रियाल के नोट को पॉलीमर में जारी कर इस लिस्ट में शामिल हो गया.
आंशिक रूप से अपनाने वाले देश सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, फिलीपींस, चीन, हांगकांग, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राजील, चिली, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और इजराइल.
सवाल कितना पैसा बचेगा?
जवाब लंबी उम्र और कम टूटफूट की वजह से पॉलीमर नोट लंबे समय में छपाई और रिप्लेसमेंट की लागत घटा सकते हैं. आरबीआई सालाना हजारों करोड़ रुपये सिर्फ नोट छापने और खराब नोटों को बदलने पर खर्च करता है. ऐसे में टिकाऊ नोट इस खर्च को काफी हद तक कम कर सकते हैं. हालांकि, शुरुआत में सब्सट्रेट खरीदने और तकनीक अपनाने की लागत ज्यादा रहेगी.
सवाल आम आदमी को क्या फायदा होगा?
- नोट लंबे समय तक टिकेंगे, यानी बारबार गंदेफटे नोट बदलवाने की झंझट कम होगी.
- पानी में भीगने या हल्कीफुल्की चोट से नोट खराब होने का खतरा घटेगा.
- नकली नोटों की पहचान आसान होगी, क्योंकि पॉलीमर नोटों में पारदर्शी खिड़की जैसे सुरक्षा फीचर होते हैं जिन्हें कॉपी करना मुश्किल है.
- नोट ज्यादा साफसुथरे रहेंगे, क्योंकि इन पर गंदगी और बैक्टीरिया कम टिकते हैं.
सवाल क्या नए नोट आने से पुराने कागज के नोट बंद हो जाएंगे?
जवाब नहीं, आरबीआई ने अभी मौजूदा कागजी नोटों को बंद करने की कोई घोषणा नहीं की है, और फिलहाल यह पहल सिर्फ एक पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित है. मौजूदा सभी नोट कानूनी रूप से मान्य बने रहेंगे. आरबीआई पहले ट्रायल के नतीजों का आकलन करेगा, उसके बाद ही बाकी मूल्यवर्ग के नोटों में इसे बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा. खुद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी जून 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. केंद्रीय बैंक इसके फायदेनुकसान का आकलन कर रहा है.
सवाल कब से नोट मार्केट में आएंगे?
जवाब अभी तक कोई पक्की तारीख तय नहीं हुई है. पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ही देशभर में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक नोट जारी किए जाएंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका फुलस्केल रोलआउट 2027 से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, यानी अगले साल तक ही पूरे देश में इनके व्यापक इस्तेमाल की उम्मीद की जा सकती है. हालांकि यह तारीख अभी अनुमान पर आधारित है और टेंडर, ट्रायल के नतीजों व सरकार की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगी.
सवाल भारत में प्लास्टिक नोटों की चर्चा नई नहीं
जवाब भारत में यह विचार पहली बार नहीं आया है. 2012 में तत्कालीन UPA सरकार ने कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर इन पांच शहरों में 10 रुपये के 100 करोड़ पॉलीमर नोटों को फील्ड ट्रायल के तौर पर उतारने की योजना बनाई थी, ताकि अलगअलग जलवायु परिस्थितियों में इनकी टिकाऊपन को परखा जा सके. हालांकि तकनीकी अड़चनों के चलते वह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया. अब एक दशक बाद आरबीआई ने इस योजना को नए सिरे से जिंदा किया है.



