Etawah News: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से वृद्धावस्था पेंशन से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. बढ़पुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत विचारपुरा में एक महिला पर दस्तावेजों में अपनी उम्र 60 वर्ष दर्शाकर करीब 10 साल तक वृद्धावस्था पेंशन लेने का आरोप है. शिकायत के बाद मामला विभाग के संज्ञान में आया और जांच के साथसाथ विभागीय सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

मामले में उमा देवी, पत्नी शिवराज सिंह की वास्तविक उम्र को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है. शिकायत के अनुसार महिला की उम्र करीब 36 वर्ष है, जबकि वृद्धावस्था पेंशन के रिकॉर्ड में उनकी उम्र 60 वर्ष दर्ज कराई गई. इसी उम्र के आधार पर उन्हें वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ मिलता रहा. सवाल यह उठ रहा है कि उम्र में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद महिला करीब एक दशक तक सरकारी योजना का लाभ कैसे लेती रही.

ऐसे खुली पोल

मामले की जानकारी ग्राम पंचायत विचारपुरा के प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार को हुई तो उन्होंने इसकी लिखित शिकायत जिलाधिकारी के माध्यम से जिला समाज कल्याण विभाग से की. शिकायत के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू की. विभाग की ओर से 13 अगस्त 2026 को दिए गए जवाब में बताया गया कि वर्ष 202425 के वार्षिक सत्यापन के दौरान महिला पेंशन के लिए अपात्र पाई गई. इसके बाद उसकी वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी गई.

10 साल तक लिया लाभ

हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल पिछले करीब 10 वर्षों के सत्यापन को लेकर उठ रहा है. यदि महिला वास्तव में वृद्धावस्था पेंशन की निर्धारित आयु सीमा के भीतर नहीं आती थी, तो योजना में उसका नाम किस आधार पर स्वीकृत किया गया. इतना ही नहीं, हर साल होने वाले सत्यापन के दौरान उम्र से जुड़ी यह बड़ी विसंगति पहले क्यों नहीं पकड़ी गई.

प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने लंबे समय तक मिली पेंशन की राशि की रिकवरी को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अपात्र होने के बावजूद महिला को वर्षों तक सरकारी धन मिलता रहा. ऐसे में अब तक मिली पेंशन राशि की वसूली और मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.

जांच के बाद सरकारी धन की वसूली

वहीं जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल का कहना है कि महिला के अपात्र पाए जाने के बाद उसकी पेंशन रोक दी गई है. मामले की जांच कराई जा रही है और जांच में तथ्यों की पुष्टि होने पर नियमों के अनुसार पेंशन की रकम की रिकवरी की कार्रवाई भी की जाएगी. अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि महिला की उम्र 60 वर्ष किस दस्तावेज के आधार पर दर्ज की गई, गलत जानकारी किस स्तर पर रिकॉर्ड में शामिल हुई और करीब एक दशक तक विभागीय सत्यापन में यह मामला पकड़ में क्यों नहीं आया. जांच के बाद ही सरकारी धन की वसूली और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो सकेगी.